Dhaka में राजकीय सम्मान के साथ अदा होगा नमाज-ए-जनाजा, एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित
Bangladesh की राजनीति और सामाजिक आंदोलनों से जुड़े एक अहम नाम, इंकिलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी के निधन से देश में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके निधन को लेकर बांग्लादेश सरकार ने एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। शनिवार को Dhaka स्थित संसद भवन परिसर में उनका नमाज-ए-जनाजा अदा किया जाएगा, जिसमें अंतरिम सरकार के प्रमुख और मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस समेत कई प्रमुख नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक शामिल होंगे।
संसद भवन परिसर में होगा नमाज-ए-जनाजा
इंकिलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी का नमाज-ए-जनाजा शनिवार को Dhaka के जतियो संसद भवन के साउथ प्लाजा में दोपहर 2 बजे अदा किया जाएगा। इस संबंध में मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के प्रेस विंग की ओर से आधिकारिक पुष्टि की गई है। जनाजे को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
सरकार की ओर से कहा गया है कि जनाजे में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है, जिसको देखते हुए संसद भवन परिसर और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
काजी नजरुल इस्लाम के पास होगा अंतिम संस्कार
परिवार की इच्छा के अनुसार शरीफ उस्मान हादी को ढाका यूनिवर्सिटी परिसर में स्थित सेंट्रल मस्जिद के पास, बांग्लादेश के राष्ट्रीय कवि काजी नजरुल इस्लाम के मकबरे के नजदीक दफनाया जाएगा। यह स्थान बांग्लादेश के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व से जुड़ा हुआ है, जिससे हादी के अंतिम संस्कार को भी विशेष प्रतीकात्मक महत्व मिल गया है।
डकसू (Dhaka यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन) की मुक्ति संग्राम और लोकतांत्रिक आंदोलन सचिव फातिमा तस्नीम जुमा ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि यह निर्णय परिवार की भावनाओं और हादी की वैचारिक पहचान को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

मोहम्मद यूनुस भी होंगे जनाजे में शामिल
जनाजे में अंतरिम सरकार के प्रमुख और मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस की मौजूदगी भी तय मानी जा रही है। इसके अलावा राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, छात्र संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और इंकिलाब मंच से जुड़े बड़ी संख्या में लोग इस मौके पर शामिल होंगे।
बताया जा रहा है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से हादी के समर्थक ढाका पहुंच रहे हैं, जिससे जनाजे में भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, ड्रोन पर पूरी तरह प्रतिबंध
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनाजे को देखते हुए ढाका में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह का बैग या भारी सामान अपने साथ न लाएं। संसद भवन और उसके आसपास के इलाकों में ड्रोन उड़ाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है।
इसके अलावा, यातायात व्यवस्था को भी अस्थायी रूप से बदला गया है ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं।
बांग्लादेश में एक दिन का राजकीय शोक
शरीफ उस्मान हादी के निधन पर बांग्लादेश सरकार ने शनिवार को एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। इस दौरान सभी सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और सरकारी कार्यक्रमों में शोक व्यक्त किया जाएगा।
मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस ने हादी के निधन को देश के लिए एक बड़ी क्षति बताते हुए कहा कि वह लोकतांत्रिक आंदोलनों और सामाजिक न्याय की आवाज थे।
सिंगापुर से लाया गया पार्थिव शरीर
शुक्रवार शाम को शरीफ उस्मान हादी का पार्थिव शरीर सिंगापुर से ढाका लाया गया। बांग्लादेश एयरलाइंस की एक उड़ान शाम करीब 5:48 बजे हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरी, जहां उनका ताबूत राष्ट्रीय ध्वज में लिपटा हुआ था।
हवाई अड्डे पर उनके समर्थकों, राजनीतिक सहयोगियों और परिवार के सदस्यों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी।
कैसे हुई थी हादी पर जानलेवा हमला?
शरीफ उस्मान हादी पर 12 दिसंबर को राजधानी ढाका के पुराना पल्टन इलाके में चुनाव प्रचार के दौरान हमला हुआ था। इस हमले में उन्हें सिर में गंभीर गोली लगने की चोट आई थी। घटना के बाद उन्हें तुरंत ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, बाद में बेहतर इलाज के लिए एवरकेयर अस्पताल ले जाया गया।
हालत गंभीर होने के चलते 15 दिसंबर को उन्हें एयरलिफ्ट कर सिंगापुर भेजा गया, जहां सिंगापुर जनरल हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था। हालांकि, तमाम प्रयासों के बावजूद गुरुवार रात उनका निधन हो गया।
कौन थे शरीफ उस्मान हादी?
शरीफ उस्मान हादी इंकिलाब मंच के प्रवक्ता थे और बांग्लादेश में लोकतांत्रिक आंदोलन और सामाजिक बदलाव से जुड़े एक मुखर चेहरा माने जाते थे। वे युवाओं और छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय थे और अपनी स्पष्टवादिता तथा जनहित के मुद्दों पर बेबाक राय रखने के लिए जाने जाते थे।
उनकी हत्या ने बांग्लादेश में राजनीतिक माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है और देशभर में गुस्से और शोक का माहौल है।
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आंदोलन को शांतिपूर्ण रखने की अपील
डकसू नेता फातिमा तस्नीम जुमा ने छात्रों और समर्थकों से अपील की है कि वे आंदोलन को शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से आगे बढ़ाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनाजे को देखने की अनुमति नहीं होगी और सभी से व्यवस्था बनाए रखने का अनुरोध किया गया है।
उन्होंने कहा कि सभी लोग “शहीद हादी” के लिए दुआ करें और उनकी विचारधारा को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाएं।
निष्कर्ष
शरीफ उस्मान हादी का निधन बांग्लादेश के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास में एक दर्दनाक अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाना इस बात का संकेत है कि वे केवल एक संगठन के प्रवक्ता नहीं, बल्कि एक व्यापक जन आंदोलन की पहचान थे। अब पूरा देश उनकी अंतिम विदाई के लिए एकत्र हो रहा है, वहीं उनकी मौत से जुड़े सवालों और हालात पर भी गंभीर चर्चा जारी है।

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