Dewas पटाखा फैक्ट्री हादसे के बाद इंदौर एमवाय अस्पताल की बर्न यूनिट पर उठे सवाल, गंभीर मरीजों के इलाज में लापरवाही के आरोप
मध्य प्रदेश के Dewas जिले के टोंककलां में स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने कई मजदूरों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस हादसे में गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को इलाज के लिए इंदौर के महाराजा यशवंतराव (एमवाय) अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन यहां इलाज की व्यवस्था और अस्पताल की सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
गंभीर मरीजों की हालत नाजुक
हादसे में झुलसे कुल मरीजों में से कई की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। एमवाय अस्पताल में भर्ती तीन मरीज 75 से 90 प्रतिशत तक झुलसे हुए हैं और उनकी स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। वहीं चार अन्य मरीज चोइथराम अस्पताल में भर्ती हैं, जिनके शरीर का 10 से 20 प्रतिशत हिस्सा झुलसा हुआ है।
डॉक्टरों के अनुसार, इतने बड़े स्तर पर जलने वाले मरीजों में संक्रमण का खतरा बहुत अधिक होता है, इसलिए उनका इलाज विशेष सावधानी और नियंत्रित वातावरण में किया जाना जरूरी है।
प्राथमिक उपचार में लापरवाही के आरोप
परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि घायलों को देवास में उचित प्राथमिक उपचार नहीं दिया गया। मरीजों को बिना आवश्यक मेडिकल सहायता, जैसे इंट्रावेनस (IV) लाइन या दर्द निवारक दवाएं दिए सीधे एंबुलेंस से इंदौर भेज दिया गया।
इसके चलते मरीजों को रास्तेभर असहनीय दर्द का सामना करना पड़ा। कई लोगों का कहना है कि यह गंभीर लापरवाही है, जिसने मरीजों की हालत और बिगाड़ दी।
एमवाय अस्पताल की बर्न यूनिट की स्थिति पर सवाल
इंदौर के एमवाय अस्पताल की बर्न यूनिट में इलाज के दौरान एक और गंभीर समस्या सामने आई है। यूनिट का एसी (एयर कंडीशनिंग सिस्टम) खराब पाया गया, जबकि बर्न मरीजों के लिए नियंत्रित तापमान बेहद जरूरी होता है।
डॉक्टरों के अनुसार, बर्न यूनिट में सही तापमान और साफ वातावरण संक्रमण को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन एसी खराब होने के कारण वहां दो कूलर लगाए गए हैं, जो विशेषज्ञों के अनुसार मरीजों के लिए उपयुक्त नहीं माने जाते।
विशेषज्ञों का कहना है कि कूलर से निकलने वाली नमी और हवा का तेज प्रवाह गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के घावों को नुकसान पहुंचा सकता है और संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है।
अस्पताल प्रशासन और तकनीकी खामियां
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि बर्न यूनिट का निर्माण पीआईयू (लोक निर्माण विभाग) द्वारा किया गया है, लेकिन अभी तक इसे औपचारिक रूप से हैंडओवर नहीं किया गया है। इसी कारण एसी सिस्टम का वार्षिक रखरखाव अनुबंध भी नहीं हो सका है।
प्रबंधन के अनुसार, कई बार पीआईयू को पत्राचार कर एसी सिस्टम को ठीक करने की मांग की गई, लेकिन आवश्यक दस्तावेज और तकनीकी जानकारी उपलब्ध न होने के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है।
जनप्रतिनिधियों का दौरा
हादसे के बाद उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, मंत्री तुलसी सिलावट और विधायक राजेश सोनकर समेत कई जनप्रतिनिधि अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घायलों की स्थिति का जायजा लिया और इलाज की व्यवस्था को लेकर अधिकारियों से जानकारी ली।
मरीजों की पहचान और हालत
एमवाय अस्पताल में भर्ती गंभीर मरीजों में बिहार के अरेरिया जिले के तीन लोग शामिल हैं, जिनमें राम (20), निरंजन (30) और अजय (27) शामिल हैं, जो 75 से 90 प्रतिशत तक झुलसे हुए हैं।
चोइथराम अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों में अमित देव (19), अमित कुमार मंडल (19), लालटू (22) और रोशन (19) शामिल हैं, जिनकी हालत 8 से 20 प्रतिशत तक बर्न की बताई जा रही है।
फैक्ट्री में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
घायलों के परिजनों ने पटाखा फैक्ट्री में सुरक्षा व्यवस्था की कमी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। एक घायल के भाई ने बताया कि मजदूरों को धूल-मिट्टी वाले काम का झांसा देकर बुलाया गया था, लेकिन वहां बारूद और विस्फोटक सामग्री के बीच काम कराया जा रहा था।
उनका कहना है कि फैक्ट्री में न तो सुरक्षा उपकरण थे और न ही कोई पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम, जिसके चलते इतना बड़ा हादसा हुआ।
संक्रमण का बढ़ता खतरा
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि गंभीर रूप से झुलसे मरीजों में संक्रमण फैलने का खतरा सबसे अधिक होता है। ऐसे में बर्न यूनिट में उचित तापमान, स्वच्छता और विशेष देखभाल अत्यंत आवश्यक है।
निष्कर्ष
Dewas पटाखा फैक्ट्री हादसा जहां एक ओर गंभीर मानवीय त्रासदी बन गया है, वहीं दूसरी ओर इंदौर एमवाय अस्पताल की बर्न यूनिट की व्यवस्थाओं ने स्वास्थ्य प्रणाली की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही उनकी जान के लिए खतरा बन सकती है, ऐसे में तत्काल सुधार और बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता है।
