Dewas : शासकीय प्राथमिक विद्यालय बघेरा में अव्यवस्थाओं पर भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने जताई चिंता
Dewas जिले के ग्राम बघेरा स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने अपनी आवाज उठाई है। इस ट्रस्ट के जिला अध्यक्ष श्री राकेश जी खंडेलवाल के नेतृत्व में संगठन ने न केवल प्रशासन का ध्यान इन समस्याओं की ओर आकर्षित किया है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को लेकर गंभीर चेतावनी भी दी है।
बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को खतरा
संगठन के अनुसार, बघेरा प्राथमिक विद्यालय में कई वर्षों से बुनियादी ढांचे के काम अधूरे पड़े हैं। विद्यालय के मुख्य गेट, बाउंड्रीवाल, शौचालय और अन्य निर्माण कार्य लंबित हैं, जिससे बच्चों और शिक्षकों को प्रतिदिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय भवन के आसपास गंदगी, कचरे का ढेर और साफ-सफाई की अनुपस्थिति बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल रही है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि वर्षो से यह समस्या बनी हुई है। बच्चों और शिक्षकों को खुले वातावरण में ही पढ़ाई करनी पड़ती है, जिससे गर्मियों में धूप और बारिश के समय असुविधा झेलनी पड़ती है। साथ ही, शौचालय न होने या अधूरे निर्माण के कारण विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और स्वच्छता पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
ग्राम पंचायत और जनपद कार्यालय को सूचित
स्थानीय नागरिकों ने इस समस्या के बारे में पहले भी ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालय को सूचित किया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस निराशाजनक स्थिति ने ट्रस्ट को सक्रिय होकर प्रशासनिक अधिकारियों से उचित कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।
ट्रस्ट की कार्रवाई
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने इस गंभीर मामले को लेकर संबंधित विभाग को लिखित आवेदन सौंपा है। इसमें संगठन ने स्पष्ट किया है कि बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और गरिमामय शैक्षणिक वातावरण मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी जोर दिया कि यदि शीघ्र सुधारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन इस मुद्दे को आगे बढ़ाकर उच्च अधिकारियों और मीडिया तक ले जाएगा।
राकेश खंडेलवाल, अध्यक्ष ट्रस्ट ने कहा, “हम बच्चों के अधिकारों और उनके स्वास्थ्य को लेकर कोई समझौता नहीं कर सकते। यह केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं है, बल्कि बच्चों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़ा गंभीर मामला है। हम प्रशासन से अनुरोध करते हैं कि जल्द से जल्द निर्माण कार्य पूरे कराए जाएँ और विद्यालय परिसर को साफ-सुथरा बनाया जाए।”
निर्माण कार्य की वर्तमान स्थिति
विद्यालय परिसर का निरीक्षण करने पर यह स्पष्ट हुआ कि गेट अधूरा पड़ा है, जिससे बच्चों का प्रवेश और निकास असुरक्षित है। बाउंड्रीवाल अधूरी होने के कारण बाहरी तत्व और जानवर विद्यालय परिसर में आसानी से प्रवेश कर सकते हैं। वहीं, शौचालय अधूरे होने के कारण छात्र और छात्राएं अपने स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर जोखिम में हैं।
विद्यालय परिसर में गंदगी, कचरे का अंबार और पानी की निकासी की व्यवस्था का अभाव साफ तौर पर दिखाई देता है। इन परिस्थितियों में पढ़ाई करना न केवल बच्चों के लिए असुविधाजनक है, बल्कि उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
स्थानीय नागरिकों की चिंता
ग्राम बघेरा के स्थानीय नागरिकों ने बताया कि बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। वे यह भी कहते हैं कि यदि तुरंत कार्रवाई नहीं हुई, तो बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर संकट पैदा हो सकता है।
स्थानीय माता-पिता ने संगठन की कार्रवाई की सराहना की और प्रशासन से तत्काल निर्माण कार्य पूरा कराने की मांग की। उनका कहना है कि बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित शैक्षणिक वातावरण देना न केवल राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, बल्कि यह हर नागरिक का कर्तव्य भी है।
ट्रस्ट के सुझाव
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने प्रशासन को निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:
- निर्माण कार्य तुरंत पूरा किया जाए – गेट, बाउंड्रीवाल और शौचालय का निर्माण जल्द पूर्ण किया जाए।
- विद्यालय परिसर की सफाई – नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और कचरे का उचित निपटान किया जाए।
- स्वच्छता और स्वास्थ्य की निगरानी – बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए नियमित जांच और स्वच्छता अभियान चलाया जाए।
- स्थानीय प्रशासन का सक्रिय निगरानी – ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत को इस मुद्दे की मॉनिटरिंग करने और समय पर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए जाएँ।
- सुरक्षा उपायों की स्थापना – बच्चों की सुरक्षा के लिए उचित बैरिकेडिंग और गेट की मरम्मत आवश्यक है।
शिक्षा का अधिकार और बच्चों का भविष्य
ट्रस्ट के अनुसार, यह मुद्दा केवल अधूरे निर्माण का नहीं है, बल्कि बच्चों के सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकार से जुड़ा हुआ है। सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण के बिना बच्चे अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाएंगे।
राकेश खंडेलवाल ने कहा, “यदि बच्चों को स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण नहीं मिला, तो उनका शैक्षणिक और मानसिक विकास प्रभावित होगा। शिक्षा केवल किताबें पढ़ने तक सीमित नहीं है; यह बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और विकास से भी जुड़ा है। हम प्रशासन से अपील करते हैं कि इस मामले में तत्काल कार्रवाई करें।”
मीडिया और उच्च अधिकारियों की ओर ध्यान
ट्रस्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि निर्माण कार्य शीघ्र पूर्ण नहीं हुए, तो संगठन इस मामले को उच्च अधिकारियों, जिला कलेक्टर और मीडिया तक ले जाएगा। उनका उद्देश्य केवल समस्या उजागर करना और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा करना है।
संगठन ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जा सकता। यह केवल बघेरा प्राथमिक विद्यालय तक सीमित मुद्दा नहीं है; ऐसे मामलों को राज्य और जिला स्तर पर गंभीरता से लिया जाना चाहिए, ताकि सभी बच्चों को समान और सुरक्षित शिक्षा मिल सके।
निष्कर्ष
शासकीय प्राथमिक विद्यालय बघेरा में अधूरे निर्माण और अव्यवस्थाओं के कारण बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों की शिकायतों के बावजूद प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाई है और प्रशासन से निर्माण कार्य शीघ्र पूर्ण करने, विद्यालय परिसर की सफाई सुनिश्चित करने, और बच्चों के स्वास्थ्य व सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की मांग की है। यदि तुरंत सुधार नहीं हुआ, तो ट्रस्ट इस मुद्दे को उच्च अधिकारियों और मीडिया तक ले जाने की चेतावनी दे चुका है।
यह मामला न केवल ग्राम बघेरा के बच्चों के भविष्य से जुड़ा है, बल्कि पूरे जिले के शैक्षणिक ढांचे और बच्चों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी है।
