Ram Rahim को फिर पैरोल: 20 साल की सजा काट रहा रेप और हत्या का दोषी फिर जेल से बाहर, 40 दिन की पैरोल मंजूर
रेप और हत्या जैसे संगीन मामलों में 20 साल की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत सिंह Ram Rahim को एक बार फिर जेल से बाहर आने की अनुमति मिल गई है। हरियाणा सरकार ने राम रहीम को 40 दिन की पैरोल प्रदान की है। वह सोमवार तड़के कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रोहतक स्थित सुनारिया जेल से बाहर आ सकता है। पैरोल की अवधि के दौरान राम रहीम सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम में ही रहेगा। यह पैरोल ऐसे समय में मिली है जब राम रहीम को सजा काटते हुए करीब 8 साल से अधिक का समय हो चुका है। 28 अगस्त 2017 को सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद से वह लगातार जेल में बंद है। हालांकि, इस दौरान उसे कई बार पैरोल और फरलो के जरिए जेल से बाहर आने का मौका मिला है।
15वीं बार जेल से बाहर आएगा Ram Rahim
Ram Rahim को यह 15वीं बार जेल से बाहर आने की अनुमति मिली है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अब तक वह करीब 387 दिन जेल से बाहर बिता चुका है। यानी सजा के कुल समय का एक बड़ा हिस्सा उसने पैरोल और फरलो के दौरान जेल से बाहर रहकर पूरा किया है। राम रहीम को इससे पहले भी विभिन्न मौकों पर पैरोल और फरलो दी जा चुकी है। कभी धार्मिक कार्यक्रमों का हवाला दिया गया, तो कभी पारिवारिक कारणों का। हर बार उसकी रिहाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज होती रही है।

पैरोल के दौरान सिरसा डेरा में रहेगा
इस बार भी पैरोल की शर्तों के तहत Ram Rahim को सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम में ही रहने की अनुमति दी गई है। वह पैरोल अवधि के दौरान किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्सा नहीं ले सकेगा और न ही राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होगा। प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि उसके हर कदम पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। हरियाणा पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर विशेष इंतजाम किए हैं। सिरसा और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या न हो।
2017 में सुनाई गई थी सजा
Ram Rahim को 28 अगस्त 2017 को पंचकूला की सीबीआई अदालत ने साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में दोषी करार दिया था। अदालत ने उसे 20 साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद वर्ष 2019 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में भी उसे दोषी ठहराया गया। इन मामलों ने पूरे देश में भारी हलचल मचा दी थी। Ram Rahim को सजा सुनाए जाने के बाद पंचकूला और सिरसा में बड़े पैमाने पर हिंसा और आगजनी की घटनाएं हुई थीं, जिनमें कई लोगों की जान चली गई थी और करोड़ों की संपत्ति को नुकसान पहुंचा था।
बार-बार पैरोल मिलने पर उठते रहे हैं सवाल
Ram Rahim को बार-बार मिलने वाली पैरोल को लेकर विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और पीड़ित पक्ष की ओर से लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इतने गंभीर अपराधों में सजा काट रहे कैदी को बार-बार जेल से बाहर आने की अनुमति देना न्याय व्यवस्था की भावना के विपरीत है। वहीं, सरकार का तर्क है कि पैरोल एक कानूनी प्रक्रिया है और नियमों के तहत ही यह अनुमति दी जाती है। प्रशासन का कहना है कि राम रहीम को भी अन्य कैदियों की तरह कानूनी अधिकार प्राप्त हैं।
चुनावी समय में पैरोल पर बढ़ता विवाद
गौर करने वाली बात यह भी है कि Ram Rahim को कई बार चुनावी समय के आसपास पैरोल मिली है। ऐसे में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी लगते रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों के प्रभाव को देखते हुए सरकारें राम रहीम के प्रति नरम रुख अपनाती रही हैं। हालांकि, सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पैरोल का चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है और यह पूरी तरह नियमों के तहत दी जाती है।
डेरा समर्थकों में खुशी, विरोधियों में नाराजगी
Ram Rahim को पैरोल मिलने की खबर सामने आते ही डेरा समर्थकों में खुशी का माहौल देखा गया। सोशल मीडिया पर उसके समर्थकों ने शुभकामनाएं दीं और इसे न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया। वहीं, पीड़ित पक्ष और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि इससे पीड़ितों को मानसिक आघात पहुंचता है और समाज में गलत संदेश जाता है।
सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
हरियाणा पुलिस ने स्पष्ट किया है कि Ram Rahim की पैरोल के दौरान किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी। सिरसा आश्रम और आसपास के क्षेत्रों में सीसीटीवी निगरानी, पुलिस पिकेट और अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, Ram Rahim को मीडिया से दूरी बनाए रखने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले किसी भी कदम से बचने के निर्देश दिए गए हैं।
