नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला के पास हुए कार धमाके की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी (NIA) लगातार कर रही है। जांच में सातों आरोपितों से पूछताछ के बाद एजेंसी ने दायरा और बड़ा कर दिया है। अब लखनऊ, कानपुर, सहारनपुर, फरीदाबाद और जम्मू-कश्मीर को कोर जोन (Core Zone) घोषित कर जांच तेज कर दी गई है।
NIA की जांच का फोकस :
- इन शहरों को आतंकियों के पुराने संपर्क, सपोर्ट सिस्टम और संदिग्ध ठिकानों के आधार पर महत्वपूर्ण माना गया है।
- सातों आरोपितों को इन शहरों में लेकर उनके पुराने नेटवर्क, मुलाक़ातों, वित्तीय स्रोतों और लोकल सपोर्ट की परत-दर-परत जांच की जाएगी।
- विशेष ध्यान उच्च-शिक्षित डॉक्टरों के नेटवर्क पर है, जो कवर प्रोफेशन के तहत आतंकियों को मदद उपलब्ध कराते थे। ये लोग अस्पतालों और क्लिनिक जैसे सुरक्षित दिखने वाले स्थानों में छिपकर ऑपरेशन का हिस्सा बने।

फरीदाबाद और यूपी के शहरों में जांच :
- NIA आरोपी शाहीन को पहले फरीदाबाद लेकर गई, जहाँ पता लगाया गया कि उसने किन लोगों से संपर्क किया, किसने उसे शेल्टर, लॉजिस्टिक्स और पैसे दिए।
- इसके बाद शाहीन को लखनऊ और कानपुर ले जाया गया, जहाँ स्थानीय मददगारों (OGW – Over Ground Workers) की पहचान की जा रही है।
- सहारनपुर में वाहनों की फोरेंसिक और तकनीकी जांच पूरी हो चुकी है।
- कानपुर में संभावित सेफ-हाउस और किराए के ठिकानों की तलाशी जारी है।
- डिजिटल फुटप्रिंट, फोन चैट और डेटा रिकवरी से संकेत मिले हैं कि UP के कई शहर इस नेटवर्क की गतिविधियों से प्रभावित रहे हैं।
जांच एजेंसी का मकसद
NIA का उद्देश्य दिल्ली धमाके और उससे जुड़े जैश के टेरर मॉड्यूल को ध्वस्त करना है और इसका नेटवर्क पूरी तरह उजागर करना है।
