दिल्ली जल बोर्ड मामले में सियासत तेज: राघव चड्ढा पर AAP के सवाल, जवाब में सामने आई कार्यकाल की टाइमलाइन
Delhi Jal Board Case: दिल्ली जल बोर्ड (DJB) से जुड़े कथित घोटाले के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) नेता सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली की राजनीति गरमा गई है। मामले को लेकर AAP और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। इसी बीच AAP की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने राघव चड्ढा को लेकर सवाल उठाए हैं। इसके बाद चड्ढा की ओर से भी उनके दिल्ली जल बोर्ड में कार्यकाल की समय-सीमा का हवाला देते हुए जवाब सामने आया है।
AAP की ओर से सवाल किया गया कि जब इस मामले में दूसरे नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है तो राघव चड्ढा से पूछताछ क्यों नहीं की गई। वहीं चड्ढा के करीबी सूत्रों का दावा है कि जिस अवधि से कथित अनियमितताओं को जोड़ा जा रहा है, उस समय तक उनका दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष के रूप में कार्यकाल समाप्त हो चुका था।
सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद
दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े मामले में सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी के बाद AAP ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। पार्टी का कहना है कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई के जरिए उसके नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए AAP की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने राघव चड्ढा का नाम लेते हुए जांच एजेंसी की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि कथित गड़बड़ियों को लेकर पहले राघव चड्ढा का नाम सामने लाया गया था, तो अब उनसे पूछताछ क्यों नहीं की जा रही है।
प्रियंका कक्कड़ ने दावा किया कि सत्येंद्र जैन के खिलाफ बनाया गया मामला भी पहले के मामलों की तरह अंततः गलत साबित होगा। उन्होंने यह तर्क भी दिया कि जिन कथित अनियमितताओं की बात की जा रही है, उस दौरान सत्येंद्र जैन जेल में थे।
AAP ने राघव चड्ढा को लेकर उठाए सवाल
प्रियंका कक्कड़ ने सवाल किया कि राघव चड्ढा से इस मामले में पूछताछ क्यों नहीं की गई। उनका आरोप था कि पहले BJP की ओर से भी कथित अनियमितताओं को लेकर चड्ढा पर सवाल उठाए गए थे।
कक्कड़ ने जांच एजेंसी की कार्रवाई को लेकर कहा कि अगर किसी व्यक्ति की भूमिका पर पहले सवाल उठाए गए थे, तो जांच के दौरान उससे पूछताछ क्यों नहीं की जा रही है। उन्होंने BJP पर बदले की राजनीति करने और AAP नेताओं पर दबाव बनाने का भी आरोप लगाया।
हालांकि ये सभी राजनीतिक आरोप हैं और मामले में किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय हो सकती है।
राघव चड्ढा की ओर से सामने आया जवाब
AAP की प्रवक्ता द्वारा नाम लिए जाने के बाद राघव चड्ढा की ओर से उनके करीबी सूत्रों के हवाले से जवाब सामने आया। इसमें मुख्य रूप से दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष के तौर पर उनके कार्यकाल की टाइमलाइन का उल्लेख किया गया।
सूत्रों के मुताबिक, राघव चड्ढा ने 2 मार्च 2020 को दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। उनका कार्यकाल 3 मार्च 2022 को समाप्त हो गया था। दावा किया गया कि नियमों के अनुसार इस पद पर नियुक्ति दो साल के लिए होती है।
मार्च 2022 में चड्ढा ने दिल्ली विधानसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वह पंजाब से राज्यसभा के लिए चुने गए थे।
अक्टूबर 2022 से जुड़े मामले का दिया हवाला
राघव चड्ढा के करीबी सूत्रों की ओर से दावा किया गया कि जिस कथित दिल्ली जल बोर्ड एसटीपी टेंडर मामले को लेकर विवाद हो रहा है, वह अक्टूबर 2022 से संबंधित है।
इस आधार पर उनकी ओर से तर्क दिया गया कि अक्टूबर 2022 तक चड्ढा को दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष का पद छोड़े करीब सात महीने हो चुके थे। इसलिए उन्हें इस मामले से जोड़ना उचित नहीं है।
चड्ढा के पक्ष से यह भी आरोप लगाया गया कि उनका नाम मामले में लाना राजनीतिक रूप से ध्यान भटकाने की कोशिश है। उनकी ओर से AAP नेतृत्व पर लगे आरोपों से जनता का ध्यान हटाने के लिए ऐसा किए जाने का दावा किया गया।
दिल्ली जल बोर्ड में राघव चड्ढा की भूमिका कब तक रही?
इस पूरे राजनीतिक विवाद में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा टाइमलाइन बन गई है। उपलब्ध दावों के अनुसार राघव चड्ढा मार्च 2020 से मार्च 2022 तक दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष रहे।
वहीं जिस एसटीपी टेंडर मामले को लेकर मौजूदा विवाद सामने आया है, उसे अक्टूबर 2022 की अवधि से जोड़ा जा रहा है। ऐसे में चड्ढा की ओर से इसी समय अंतर को अपने बचाव का प्रमुख आधार बनाया गया है।
हालांकि जांच एजेंसियां किसी मामले में किस व्यक्ति से पूछताछ करती हैं और किस आधार पर करती हैं, यह जांच में सामने आए दस्तावेजों, निर्णय प्रक्रिया और अन्य साक्ष्यों पर निर्भर करता है।
BJP पर ‘बदले की राजनीति’ का आरोप
AAP ने इस पूरे मामले में BJP पर राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई करवाने का आरोप लगाया है। प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि पार्टी नेताओं के खिलाफ मामले बनाकर उन्हें डराने की कोशिश की जा रही है।
AAP लंबे समय से केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार और BJP पर सवाल उठाती रही है। दूसरी ओर BJP समय-समय पर AAP सरकार के कार्यकाल में कथित भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर पार्टी नेतृत्व पर हमलावर रही है।
दिल्ली जल बोर्ड से जुड़ा यह मामला अब इसी राजनीतिक टकराव का नया केंद्र बनता दिखाई दे रहा है।
सत्येंद्र जैन को अदालत से भी लगा झटका
दिल्ली जल बोर्ड मामले में गिरफ्तार सत्येंद्र जैन को अदालत से भी राहत नहीं मिली। उनकी ओर से दाखिल अर्जी खारिज होने के बाद उन्हें जेल भेजे जाने की कार्रवाई हुई। इसके बाद से ही AAP नेताओं ने मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज कर दी है।
AAP का दावा है कि जैन को गलत तरीके से मामले में फंसाया जा रहा है, जबकि जांच एजेंसी अपनी कार्रवाई को मामले से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित बता रही है। आरोपों की अंतिम सत्यता अदालत में कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
DJB मामला बना दिल्ली की राजनीति का नया मुद्दा
दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े कथित घोटाले ने अब एक नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी के बाद AAP द्वारा राघव चड्ढा का नाम उठाए जाने और फिर चड्ढा की तरफ से कार्यकाल की टाइमलाइन पेश किए जाने से विवाद और बढ़ गया है।
फिलहाल राघव चड्ढा की ओर से प्रमुख तर्क यही है कि कथित अनियमितताओं से संबंधित अवधि से कई महीने पहले उनका दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष के रूप में कार्यकाल समाप्त हो चुका था। वहीं AAP जांच एजेंसियों की कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठा रही है।
आने वाले दिनों में जांच आगे बढ़ने के साथ यह साफ हो सकता है कि दिल्ली जल बोर्ड के कथित एसटीपी टेंडर मामले में किन अधिकारियों, नेताओं या अन्य व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जाती है। फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से किए जा रहे दावे और आरोप राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं।
