Chhattisgarh में आईपीएस प्रमोशन: 2002 बैच के अधिकारियों को 23 साल बाद मिली पदोन्नति
Chhattisgarh में आईपीएस प्रमोशन प्रक्रिया अन्य राज्यों की तुलना में काफी धीमी गति से चल रही है। राज्य के 2002 बैच के अधिकारियों को लगभग 23 साल के लंबे इंतजार के बाद ही आईपीएस पदोन्नति मिली है। वहीं, कई अन्य राज्यों में अधिकारी केवल 14 साल के अंदर ही इस पद तक पहुँच जाते हैं। इस देरी के कारण छत्तीसगढ़ देश में आईपीएस प्रमोशन में 19वें स्थान पर है। यह स्थिति पुलिस विभाग के लिए चिंता का विषय बन गई है क्योंकि अफसर लंबे समय तक अपनी मेहनत और अनुभव के बावजूद पदोन्नति के लिए इंतजार कर रहे हैं।
दूसरी राज्यों की तुलना
अन्य राज्यों में प्रमोशन प्रक्रिया काफी तेज़ है। कर्नाटक ने 2012 बैच के अधिकारियों को प्रमोट कर दिया है, गुजरात और केरल में 2011 बैच को प्रमोशन मिल चुकी है। आंध्र प्रदेश, सिक्किम और तेलंगाना में तो 2010 बैच के अधिकारी भी आईपीएस पद पर पहुँच चुके हैं। इसके विपरीत, छत्तीसगढ़ में पुराने बैचों की प्रमोशन प्रक्रिया में लगातार देरी हो रही है। यही कारण है कि राज्य के पुलिस अधिकारियों में नाराजगी बढ़ रही है और वे सरकार से जल्द सुधार की मांग कर रहे हैं।
अफसरों की नाराजगी और मांगें
लंबे इंतजार से नाराज पुलिस अधिकारियों ने सरकार को पत्र लिखकर अपनी चिंता जाहिर की है। अफसरों का कहना है कि कैडर रिव्यू जल्दी किया जाए और कम से कम 60 नए आईपीएस पद बढ़ाए जाएँ। फिलहाल राज्य में 153 आईपीएस पद स्वीकृत हैं, लेकिन कई पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। अधिकारियों का यह भी मानना है कि खाली पदों और प्रमोशन में देरी से पुलिस प्रशासन की कार्यकुशलता पर असर पड़ता है और वरिष्ठ अफसरों का मनोबल भी गिरता है।
नए जिले और पदों की कमी
मोहला-मानपुर और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जैसे नए जिले कई साल पहले बन चुके हैं, लेकिन यहां SP के लिए आईपीएस पद अब तक स्वीकृत नहीं किए गए हैं। इसके अलावा, रेलवे SP की पोस्टिंग लंबे समय से हो रही है, लेकिन इसे भी आधिकारिक मंजूरी नहीं मिली। नए जिलों में पद स्वीकृत न होने से स्थानीय पुलिस प्रशासन प्रभावित हो रहा है और अफसरों में असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
कैडर रिव्यू में देरी
नियम के अनुसार हर 5 साल में कैडर रिव्यू होना चाहिए, यानी 25 साल में कम से कम 5 बार रिव्यू होना था। छत्तीसगढ़ में अब तक केवल 4 बार ही कैडर रिव्यू हुआ है। 2017 में 22 पदों के लिए प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन केवल 11 पद ही मंजूर हुए। हर बार प्रस्ताव जाते रहते हैं, लेकिन कई पद अधिसूचित नहीं हो पाते। यही प्रमोशन में सबसे बड़ी बाधा बन रही है और अधिकारियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है।
अन्य विभागों में स्थिति बेहतर
जहां पुलिस विभाग में प्रमोशन धीमा है, वहीं राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS), तहसीलदार और वन विभाग में समय पर पदोन्नति हो रही है। SAS के अफसर केवल 13 साल में IAS पद तक पहुँच रहे हैं। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि सिर्फ पुलिस विभाग ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुधार के लिए विशेष ध्यान और कदम उठाने की आवश्यकता है।
प्रमोशन की देरी का प्रभाव
लंबे समय तक प्रमोशन न मिलने से पुलिस अधिकारियों में मनोबल घटता है और कार्यक्षमता पर असर पड़ता है। अफसरों को अनुभव और सेवा के बावजूद लंबा इंतजार करना पड़ता है। कई वरिष्ठ अधिकारी अपनी योग्यता और कार्य अनुभव के बावजूद पदोन्नति के लिए इंतजार कर रहे हैं। इससे पुलिस विभाग में असंतोष फैलता है और युवाओं में भी प्रेरणा कम होती है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में लंबित प्रमोशन और खाली पदों की समस्या अब गंभीर स्थिति में है। जल्द कैडर रिव्यू कराना और खाली पद भरना राज्य के पुलिस प्रशासन को मजबूत करने के लिए जरूरी है। यदि सरकार समय पर कदम उठाए, तो प्रमोशन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और पुलिस अफसरों का मनोबल बढ़ेगा। इसके अलावा, नए जिलों में पद स्वीकृत करने और रेलवे SP पोस्टिंग को नियमित करने से स्थानीय प्रशासन भी सुदृढ़ होगा।
इस पूरी प्रक्रिया में देरी न केवल पुलिस अधिकारियों के लिए चिंता का कारण है, बल्कि राज्य में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यकुशलता पर भी असर डाल रही है। अतः आवश्यक है कि राज्य सरकार जल्द प्रभावी कदम उठाकर प्रमोशन प्रक्रिया को सुचारू बनाए और खाली पदों को भरकर पुलिस प्रशासन को मजबूत करे।
