MP में कर्मचारियों की कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना अटकी, 10 महीने बाद भी तैयार नहीं हुआ ड्राफ्ट
MP में शासकीय कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना अब तक अमल में नहीं आ सकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा लगभग एक वर्ष पहले इस योजना की घोषणा की गई थी, लेकिन दस महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इसका ड्राफ्ट पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया है। योजना की फाइल अभी भी विभागीय प्रक्रिया में ही अटकी हुई है और कैबिनेट तक प्रस्ताव नहीं पहुंच पाया है।
घोषणा के बाद भी प्रक्रिया में देरी
पिछले वर्ष मई में मध्यप्रदेश स्टेट इम्प्लाइज एसोसिएशन के एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शासकीय कर्मचारियों के लिए कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करने की घोषणा की थी। उस समय इसे कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा गया था। आमतौर पर किसी भी ऐसी घोषणा के बाद एक महीने के भीतर योजना का प्रारूप तैयार कर उसे कैबिनेट के सामने रखा जाता है, लेकिन इस मामले में प्रक्रिया काफी धीमी रही है।
जानकारों के अनुसार करीब दस महीने बीत जाने के बावजूद योजना का अंतिम मसौदा तैयार नहीं हो पाया है। यही कारण है कि यह प्रस्ताव अभी तक मंत्री परिषद की बैठक में पेश नहीं किया जा सका है।
कलेक्टर कार्यालय से सचिवालय तक पहुंचने में लगा लंबा समय
जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री ने 18 मई 2025 को भोपाल के रविंद्र भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इस योजना की घोषणा की थी। सरकारी नियमों के अनुसार जिस जिले में मुख्यमंत्री कोई घोषणा करते हैं, उस जिले का कलेक्टर कार्यालय उससे संबंधित बिंदुओं का प्रतिवेदन तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय को भेजता है।
बताया जा रहा है कि भोपाल कलेक्टर कार्यालय से यह प्रतिवेदन मुख्यमंत्री सचिवालय तक पहुंचने में ही लगभग छह महीने का समय लग गया। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि घोषणा से संबंधित प्रतिवेदन सचिवालय तक पहुंचने में लगभग 11 महीने लग गए, जिसके कारण योजना की पूरी प्रक्रिया में काफी देरी हो गई।
एक हजार से अधिक कर्मचारी हो चुके सेवानिवृत्त
योजना की घोषणा के बाद से अब तक प्रदेश में एक हजार से अधिक शासकीय कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि यह योजना समय पर लागू हो जाती तो इन कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिल सकता था।
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार को कर्मचारियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस योजना को जल्द लागू करना चाहिए, ताकि वर्तमान कर्मचारियों के साथ-साथ सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी राहत मिल सके।
महंगे इलाज से परेशान कर्मचारी
मध्यप्रदेश के शासकीय कर्मचारियों का कहना है कि निजी अस्पतालों में इलाज कराना लगातार महंगा होता जा रहा है। कई बार इलाज के बाद मेडिकल बिलों का भुगतान या रिइम्बर्समेंट समय पर नहीं हो पाता, जिससे कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
ऐसी स्थिति में यदि कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना लागू हो जाती है तो कर्मचारियों को निजी और सरकारी अस्पतालों में बिना तत्काल भुगतान के इलाज की सुविधा मिल सकेगी। इससे उन्हें बड़ी आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
10 लाख कर्मचारियों को मिलना है लाभ
प्रस्तावित योजना के तहत प्रदेश के करीब 10 लाख कर्मचारियों को लाभ मिलना है। योजना के अंतर्गत कुछ निजी और सरकारी अस्पतालों को सूचीबद्ध करने की योजना है, जहां कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाएगी।
सरकार का उद्देश्य यह है कि कर्मचारियों और उनके परिवारों को गंभीर बीमारियों या आपात स्थिति में आर्थिक बोझ का सामना न करना पड़े। इसके लिए स्वास्थ्य बीमा के माध्यम से इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
विभागों ने कर्मचारी संघों से मांगे सुझाव
इस योजना को अंतिम रूप देने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) द्वारा कर्मचारी संगठनों से सुझाव भी मांगे गए थे। अधिकारियों का कहना है कि योजना से जुड़े कई पहलुओं पर विचार किया जा चुका है। इसमें प्रदेश में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या, सेवानिवृत्त कर्मचारियों का आंकड़ा और संभावित वित्तीय व्यय का आकलन भी किया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक दस्तावेजी प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और जल्द ही प्रस्ताव मंत्री परिषद की बैठक में प्रस्तुत किया जा सकता है।
कर्मचारी संघों ने जताई नाराजगी
मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के महामंत्री जितेंद्र सिंह का कहना है कि इस योजना को शुरू कराने में कर्मचारी संघों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। संघ ने सरकार को कई सुझाव भी दिए थे, लेकिन घोषणा के बाद प्रशासनिक स्तर पर ही प्रक्रिया धीमी रही।
वहीं संघ के प्रांताध्यक्ष संतोष गांधी का कहना है कि प्रदेश में कर्मचारियों का लगातार रिटायरमेंट हो रहा है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। ऐसे में सरकार को जल्द से जल्द इस योजना को लागू करना चाहिए, ताकि कर्मचारियों को समय पर स्वास्थ्य सुरक्षा मिल सके।
जल्द लागू होने की उम्मीद
सरकारी सूत्रों के अनुसार योजना से जुड़ी अधिकांश औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और जल्द ही इसे कैबिनेट के सामने पेश किया जा सकता है। यदि कैबिनेट से मंजूरी मिल जाती है तो प्रदेश के लाखों कर्मचारियों को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिल सकेगा।
हालांकि कर्मचारियों और उनके संगठनों का कहना है कि सरकार को इस प्रक्रिया में तेजी लानी चाहिए, ताकि लंबे समय से लंबित इस योजना को जल्द लागू किया जा सके और कर्मचारियों को स्वास्थ्य संबंधी खर्चों से राहत मिल सके।
