Dehli -Bhopal शताब्दी एक्सप्रेस में एक्सपायरी ब्रेड परोसने का आरोप, यात्रियों में फूड पॉयजनिंग का डर; रेल मदद पर शिकायत दर्ज
C-4 कोच के यात्रियों ने की शिकायत, बच्चों समेत कई यात्रियों ने खाया था नाश्ता
Dehli -Bhopal : नई Dehli से भोपाल के बीच चलने वाली देश की प्रतिष्ठित ट्रेनों में शामिल शताब्दी एक्सप्रेस (12002) में यात्रियों को कथित तौर पर एक्सपायरी डेट वाली ब्रेड परोसे जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों में स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई। यात्रियों का कहना है कि नाश्ते में दी गई ब्रेड की उपयोग अवधि (Use By Date) समाप्त हो चुकी थी, जिसे खाने के बाद कई लोगों को फूड पॉयजनिंग का डर सताने लगा।
जानकारी के अनुसार, यह मामला 11 जुलाई 2026 को नई Dehli से रानी कमलापति स्टेशन (भोपाल) की ओर आ रही शताब्दी एक्सप्रेस का है। ट्रेन के C-4 कोच में सफर कर रहे करीब 74 यात्रियों को सुबह के नाश्ते में ब्रेड परोसी गई थी। यात्रियों का आरोप है कि ब्रेड की पैकिंग पर 10 जुलाई 2026 तक उपयोग करने की तारीख दर्ज थी, जबकि उसे अगले दिन यात्रियों को नाश्ते में दिया गया।
बिना डेट देखे यात्रियों ने खा ली ब्रेड, बाद में बढ़ी चिंता
यात्रियों के अनुसार, सुबह नाश्ते के समय अधिकतर लोगों ने ब्रेड की पैकिंग पर लिखी तारीख को ध्यान से नहीं देखा और सामान्य रूप से उसे खा लिया। ट्रेन में कई छोटे बच्चे भी यात्रा कर रहे थे, जिन्होंने भी नाश्ते का सेवन किया।
कुछ यात्रियों ने जब बाद में ब्रेड के पैकेट पर लिखी उपयोग की अंतिम तारीख देखी तो उनके बीच चिंता का माहौल बन गया। यात्रियों को डर था कि एक्सपायरी खाद्य सामग्री खाने से पेट दर्द, उल्टी, दस्त या अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं।
हालांकि शुरुआती जानकारी में किसी यात्री के गंभीर रूप से बीमार होने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यात्रियों ने एहतियात के तौर पर रेलवे से शिकायत की और मामले की जांच की मांग की।
रेल मदद पर दर्ज कराई गई शिकायत
घटना के बाद यात्रियों ने रेलवे की शिकायत सेवा रेल मदद के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई। यात्रियों ने शिकायत में बताया कि ट्रेन में परोसी गई खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि एक्सपायरी डेट वाली ब्रेड ट्रेन में कैसे पहुंची। साथ ही यात्रियों ने खानपान सेवा उपलब्ध कराने वाले वेंडर या एजेंसी की जिम्मेदारी तय करने की मांग भी की है।
रेलवे से जुड़े मामलों में खानपान व्यवस्था की निगरानी के लिए समय-समय पर जांच की जाती है। ऐसे मामलों में रेलवे द्वारा संबंधित कैटरिंग एजेंसी से जवाब मांगा जाता है और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान है।
शताब्दी एक्सप्रेस में खानपान व्यवस्था पर उठे सवाल
शताब्दी एक्सप्रेस भारतीय रेलवे की प्रीमियम ट्रेनों में गिनी जाती है। इन ट्रेनों में यात्रियों को टिकट श्रेणी के अनुसार भोजन और नाश्ते की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर शिकायत सामने आने से रेलवे की खानपान व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
यात्रियों का कहना है कि प्रीमियम ट्रेन होने के कारण उनसे बेहतर गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की उम्मीद की जाती है। खाने-पीने की चीजों में थोड़ी भी लापरवाही यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है, खासकर तब जब उसमें बच्चे, बुजुर्ग और अन्य संवेदनशील यात्री शामिल हों।
यात्रियों ने की खाद्य सामग्री की जांच की मांग
यात्रियों ने मांग की है कि ट्रेन में उपलब्ध कराई जाने वाली खाद्य सामग्री की नियमित जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि पैक्ड फूड आइटम देने से पहले उनकी एक्सपायरी डेट और गुणवत्ता की जांच करना जरूरी है।
यात्रियों के मुताबिक, यदि किसी यात्री ने समय रहते ब्रेड की तारीख नहीं देखी होती तो बड़ी संख्या में लोग खराब खाद्य सामग्री का सेवन कर सकते थे। इसलिए रेलवे को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए खानपान व्यवस्था की निगरानी और मजबूत करनी चाहिए।
फूड पॉयजनिंग के संभावित खतरे को लेकर यात्रियों में डर
एक्सपायरी खाद्य पदार्थ खाने के बाद फूड पॉयजनिंग का खतरा बना रहता है। खराब भोजन के सेवन से पेट में संक्रमण, उल्टी, दस्त, पेट दर्द और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि हर एक्सपायरी खाद्य सामग्री खाने से बीमारी होना निश्चित नहीं होता, लेकिन खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञ हमेशा ऐसी सामग्री के सेवन से बचने की सलाह देते हैं।
यात्रियों ने बताया कि शिकायत करने का मुख्य उद्देश्य डर फैलाना नहीं बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है, ताकि ट्रेन में सफर करने वाले लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिल सके।
रेलवे की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस मामले में रेलवे की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। यात्रियों की शिकायत के आधार पर संबंधित विभाग मामले की जांच कर सकता है और यह पता लगाया जा सकता है कि ब्रेड की सप्लाई कहां से हुई थी।
रेलवे द्वारा जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि एक्सपायरी डेट वाली ब्रेड वास्तव में यात्रियों को परोसी गई थी या पैकिंग और तारीख को लेकर कोई अन्य स्थिति थी।
यात्रियों की सुरक्षा और खानपान गुणवत्ता बनी बड़ी चुनौती
रेलवे में हर दिन लाखों यात्री सफर करते हैं और बड़ी संख्या में लोग ट्रेन में मिलने वाले भोजन पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
दिल्ली-भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस में सामने आए इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ट्रेनों में यात्रियों को दिए जाने वाले भोजन की जांच प्रक्रिया कितनी प्रभावी है। यात्रियों को उम्मीद है कि रेलवे इस शिकायत को गंभीरता से लेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएगा।
