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मंडी विवाद गहराया: किसानों के बाद व्यापारियों का बड़ा फैसला, कार्रवाई तक डांक प्रक्रिया बंद; प्रशासन पर बढ़ा समाधान का दबाव

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Published On: 1 August 2026
Officials interact with farmers and traders at Damoh Mandi during efforts to resolve the ongoing market dispute in Madhya Pradesh
— Officials interact with farmers and traders at Damoh Mandi during efforts to resolve the ongoing market dispute in Madhya Pradesh

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मंडी विवाद गहराया: किसानों के बाद व्यापारियों का बड़ा फैसला, कार्रवाई तक डांक प्रक्रिया बंद; प्रशासन पर बढ़ा समाधान का दबाव

संवाददाता: सोनू अठया
दमोह।
दमोह कृषि उपज मंडी में शुरू हुआ विवाद अब लगातार गहराता जा रहा है। शनिवार को किसानों के आंदोलन, मंडी गेट पर तालाबंदी और चक्का जाम के बाद अब व्यापारियों ने भी मोर्चा खोल दिया है। व्यापारियों ने मंडी समिति को लिखित पत्र सौंपते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पूरे मामले में उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक मंडी में डांक (नीलामी) प्रक्रिया शुरू नहीं की जाएगी। इससे मंडी की नियमित गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है और किसान, व्यापारी तथा प्रशासन तीनों के सामने चुनौतीपूर्ण स्थिति बन गई है।

मंडी में उपज की खरीदी और नीलामी व्यवस्था को लेकर उत्पन्न विवाद अब केवल किसानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापारियों के आंदोलन में शामिल होने से यह मामला और गंभीर हो गया है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जबकि प्रशासन स्थिति को सामान्य बनाने के प्रयासों में जुटा हुआ है।

किसानों के आंदोलन के बाद व्यापारियों ने भी उठाया बड़ा कदम

शनिवार को कृषि उपज मंडी में किसानों ने अपनी उपज की खरीदी और नीलामी प्रक्रिया को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। किसानों का आरोप था कि पहले उनकी उपज की ढेरी लगवाई गई, लेकिन बाद में कई व्यापारियों ने खरीदी से इनकार कर दिया, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

इसी नाराजगी के चलते किसानों ने मंडी गेट पर ताला लगाकर चक्का जाम किया और प्रशासन के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। किसानों ने मांग की कि जिन व्यापारियों ने नियमों का पालन नहीं किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए तथा मंडी की व्यवस्था पारदर्शी बनाई जाए।

किसानों के प्रदर्शन के बाद मामला शांत होने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन कुछ ही घंटों बाद व्यापारियों ने भी अपनी अलग बैठक बुलाकर आंदोलन की रणनीति तैयार कर ली।

व्यापारियों ने मंडी समिति को सौंपा पत्र

दमोह दाल एंड ऑयल मिल ओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र बजाज (अन्नपूर्णा दाल मिल) एवं उपाध्यक्ष राकेश अग्रवाल (बजरंग ट्रेडर्स) के नेतृत्व में व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल कृषि उपज मंडी समिति के भारसाधक अधिकारी एवं सचिव से मिला।

प्रतिनिधिमंडल ने मंडी प्रशासन को लिखित पत्र सौंपते हुए कहा कि जब तक पूरे मामले में उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक मंडी परिसर में डांक (नीलामी) प्रक्रिया संचालित नहीं की जाएगी।

व्यापारियों का कहना है कि यह निर्णय किसी किसान के विरोध में नहीं बल्कि अपनी सुरक्षा, सम्मान और निष्पक्ष व्यवस्था की मांग को लेकर लिया गया है।

अभद्र व्यवहार का लगाया आरोप

व्यापारियों द्वारा दिए गए पत्र में आरोप लगाया गया कि रामेश्वर चौधरी द्वारा व्यापारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। व्यापारियों ने इस घटना को गंभीर बताते हुए संबंधित व्यक्ति के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की मांग रखी है।

व्यापारियों का कहना है कि मंडी में किसी भी प्रकार का विवाद संवाद और नियमों के तहत सुलझाया जाना चाहिए। यदि व्यापारियों के साथ अभद्रता या दबाव की स्थिति बनेगी तो सामान्य व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होना स्वाभाविक है।

उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर उचित कार्रवाई करने की मांग भी की है।

निजी होटल में हुई व्यापारियों की महत्वपूर्ण बैठक

मंडी में उत्पन्न हालात को देखते हुए शहर के एक निजी होटल में व्यापारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में व्यापारी शामिल हुए और वर्तमान परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में यह तय किया गया कि जब तक विवाद का समाधान नहीं होता, तब तक मंडी में डांक प्रक्रिया शुरू नहीं की जाएगी। व्यापारियों ने सामूहिक रूप से अपने निर्णय पर सहमति जताई और भविष्य की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया।

बैठक में यह भी कहा गया कि यदि प्रशासन शीघ्र समाधान नहीं करता है तो आगे और भी कदम उठाए जा सकते हैं।

किसानों को नहीं करना चाहते परेशान: व्यापारी

व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी भी किसान को परेशान करना नहीं है। उनका कहना है कि किसान और व्यापारी दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं तथा दोनों के सहयोग से ही मंडी व्यवस्था सुचारू रूप से चलती है।

व्यापारियों ने अपील की कि विवाद को किसान बनाम व्यापारी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि वे केवल निष्पक्ष वातावरण और सम्मानजनक कार्य व्यवस्था चाहते हैं।

व्यापारियों के अनुसार यदि मंडी में विवाद लगातार बढ़ते रहेंगे तो इसका सबसे अधिक नुकसान किसानों को ही उठाना पड़ेगा, क्योंकि उनकी उपज की बिक्री प्रभावित होगी।

डांक प्रक्रिया बंद होने से बढ़ सकती हैं किसानों की मुश्किलें

मंडी में डांक प्रक्रिया बंद रहने की स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो किसानों के सामने कई प्रकार की समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।

सबसे पहले किसानों की उपज मंडी परिसर में ही रुकी रह सकती है, जिससे समय पर भुगतान मिलने में देरी होगी। दूसरी ओर नीलामी नहीं होने से उपज की गुणवत्ता प्रभावित होने की संभावना भी बनी रहती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्दी समाधान नहीं निकाला गया तो आसपास के क्षेत्रों से आने वाले किसानों को वैकल्पिक मंडियों का रुख करना पड़ सकता है, जिससे परिवहन खर्च बढ़ेगा और आर्थिक नुकसान भी होगा।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

अब पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासन की जिम्मेदारी पहले से अधिक बढ़ गई है। एक ओर किसानों की मांगें हैं तो दूसरी ओर व्यापारी भी कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।

यदि प्रशासन किसी एक पक्ष की बात सुनकर निर्णय लेता है तो दूसरे पक्ष में असंतोष की स्थिति बन सकती है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती दोनों पक्षों के बीच विश्वास कायम करते हुए निष्पक्ष समाधान निकालने की है।

मंडी समिति के अधिकारियों से उम्मीद की जा रही है कि वे दोनों पक्षों से अलग-अलग और संयुक्त रूप से चर्चा कर विवाद का समाधान निकालेंगे।

मंडी व्यवस्था पर पड़ सकता है व्यापक असर

कृषि उपज मंडी किसी भी जिले की कृषि अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र होती है। यहां प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कृषि उपज की आवक होती है और किसान अपनी फसल बेचकर भुगतान प्राप्त करते हैं।

यदि नीलामी प्रक्रिया बाधित होती है तो इसका सीधा असर कृषि व्यापार, परिवहन, मजदूरों, हम्मालों और अन्य संबंधित व्यवसायों पर भी पड़ता है।

मंडी में लंबे समय तक गतिरोध बना रहने से स्थानीय बाजार की आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं।

दोनों पक्ष समाधान चाहते हैं, लेकिन अपने-अपने रुख पर कायम

वर्तमान स्थिति में किसानों और व्यापारियों दोनों का कहना है कि वे विवाद का स्थायी समाधान चाहते हैं। हालांकि दोनों पक्ष अपने-अपने आरोपों और मांगों पर कायम हैं।

किसान चाहते हैं कि नियमों के अनुसार खरीदी सुनिश्चित हो और उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो, जबकि व्यापारी सम्मानजनक वातावरण और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

यही कारण है कि अब पूरा मामला प्रशासन की मध्यस्थता पर आकर टिक गया है।

जल्द समाधान नहीं हुआ तो बढ़ सकता है विवाद

मंडी से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में प्रशासन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बना पाया तो विवाद और अधिक गहरा सकता है।

डांक प्रक्रिया बंद रहने से किसानों की उपज की बिक्री प्रभावित होगी, वहीं व्यापारिक गतिविधियां भी ठप पड़ सकती हैं। इससे जिले की कृषि अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ने की संभावना है।

ऐसे में प्रशासन, मंडी समिति, किसान संगठनों और व्यापारी संगठनों के बीच शीघ्र संवाद स्थापित कर समाधान निकालना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है।

फिलहाल स्थिति पर सभी की नजर

फिलहाल दमोह कृषि उपज मंडी में किसान और व्यापारी दोनों अपने-अपने निर्णय पर कायम हैं। किसानों के आंदोलन के बाद व्यापारियों द्वारा डांक प्रक्रिया बंद रखने के निर्णय ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन दोनों पक्षों के बीच किस प्रकार सहमति बनाता है और मंडी की नियमित व्यवस्था कब तक बहाल हो पाती है। जब तक विवाद का समाधान नहीं निकलता, तब तक मंडी की गतिविधियों पर अनिश्चितता बनी रहने की संभावना है।

 

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