इंदौर: देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) ने परीक्षा परिणामों की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रमों की उत्तर पुस्तिकाओं के लिए दो-स्तरीय मूल्यांकन प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। इस नई व्यवस्था के तहत शिक्षक द्वारा मूल्यांकन के बाद विषय विशेषज्ञ भी उत्तर पुस्तिकाओं की समीक्षा करेंगे, ताकि परिणाम पूरी तरह से त्रुटिहीन हों।
दो-स्तरीय मूल्यांकन प्रणाली क्या है?
नई व्यवस्था के अनुसार, उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन दो चरणों में होगा:
- प्रथम चरण: शिक्षक और परीक्षक सामान्य प्रक्रिया के तहत उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करेंगे और अंक देंगे।
- द्वितीय चरण: मूल्यांकन के बाद प्रत्येक बंडल में से 10 प्रतिशत कॉपियों को रैंडम तरीके से चुना जाएगा और संबंधित विषय के विशेषज्ञों के पास भेजा जाएगा। विशेषज्ञ यह सुनिश्चित करेंगे कि मूल्यांकन सही तरीके से हुआ है।
यदि विशेषज्ञ जांच में शिक्षक द्वारा दिए गए अंकों में 10 से 15 प्रतिशत से अधिक का अंतर पाएंगे, तो उस पूरे बंडल की सभी कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा। परिणाम केवल इस प्रक्रिया के बाद ऑनलाइन घोषित किए जाएंगे।

इस बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?
पिछले कुछ वर्षों में DAVV में कई परिणामों में मूल्यांकन संबंधी शिकायतें सामने आई थीं। बी.कॉम और बी.एससी. जैसे पाठ्यक्रमों में कई छात्रों ने आरोप लगाया था कि उन्हें उम्मीद से कम अंक मिले। बाद में पुनर्मूल्यांकन में कई छात्रों के अंकों में 15-20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई। इस कदम का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता लाना है।
किस पाठ्यक्रम पर लागू होगी नई व्यवस्था?
यह नई प्रणाली यूजी प्रथम, तृतीय और पंचम सेमेस्टर तथा पीजी प्रथम और तृतीय सेमेस्टर की परीक्षाओं से लागू होगी। इसके अंतर्गत बीए, बी.कॉम, बी.एससी, बीबीए, बीसीए, एमए, एम.कॉम और एम.एससी. सहित सभी पारंपरिक पाठ्यक्रम शामिल होंगे। इस प्रक्रिया से करीब चार से पांच लाख उत्तर पुस्तिकाओं की जांच प्रभावित होगी।
“हमारा उद्देश्य छात्रों को सटीक और निष्पक्ष परिणाम देना है। इस दो-स्तरीय जांच से मानवीय त्रुटि की गुंजाइश कम हो जाएगी। परिणाम घोषित होने में कुछ दिनों की देरी हो सकती है, लेकिन वे पहले से कहीं ज्यादा विश्वसनीय होंगे।” — डॉ. अशेष तिवारी, परीक्षा नियंत्रक, DAVV
