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Datia By-Election Result 2026: हार के बाद बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी का बड़ा बयान, बोले- ‘राजनीति करते-करते व्यक्ति कुछ ज्यादा ही राजनीतिक हो जाता है’

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Published On: 3 August 2026
BJP candidate Ashutosh Tiwari addresses the media after the Datia Assembly by-election result, reacting to his defeat and calling for a review while making remarks that sparked political discussion in Madhya Pradesh
— BJP candidate Ashutosh Tiwari addresses the media after the Datia Assembly by-election result, reacting to his defeat and calling for a review while making remarks that sparked political discussion in Madhya Pradesh

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Datia By-Election Result 2026: हार के बाद बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी का बड़ा बयान, बोले- ‘राजनीति करते-करते व्यक्ति कुछ ज्यादा ही राजनीतिक हो जाता है’

दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव का परिणाम सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह से हार का सामना करना पड़ा। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद आशुतोष तिवारी का पहला सार्वजनिक बयान चर्चा का विषय बन गया। उन्होंने सीधे तौर पर किसी का नाम लिए बिना ऐसे संकेत दिए, जिन्हें राजनीतिक गलियारों में पार्टी के भीतर कथित भितरघात से जोड़कर देखा जा रहा है।

आशुतोष तिवारी ने अपने बयान में संत कबीरदास का प्रसिद्ध दोहा उद्धृत करते हुए कहा—

“राम न मारे काहू को, ऐसे नौने राम,
आपहि ते मर जात है, कर-कर खोटे काम।”

उनके इस बयान के बाद दतिया की राजनीति में नई चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टिप्पणी केवल चुनावी हार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे पार्टी के अंदरूनी समीकरणों की ओर भी संकेत हो सकता है।

दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत, बीजेपी को मिली हार

दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 6,029 वोटों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की।

मतगणना के अनुसार—

  • कांग्रेस प्रत्याशी को 61 हजार से अधिक वोट मिले।
  • भाजपा प्रत्याशी को 50 हजार से अधिक वोट प्राप्त हुए।
  • जीत का अंतर 6,029 वोट रहा।

यह परिणाम कांग्रेस के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है, जबकि भाजपा के लिए आत्ममंथन का विषय बन गया है।

परिणाम के बाद आशुतोष तिवारी का पहला बयान

चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद मीडिया से बातचीत में आशुतोष तिवारी ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है और वे जनादेश का सम्मान करते हैं।

उन्होंने कहा कि—

“जो भी जनादेश आएगा, उसे हाथ जोड़कर और सिर झुकाकर स्वीकार करूंगा। चुनाव के बाद समीक्षा होगी और जो भी कमियां सामने आएंगी, उन्हें सुधारने का प्रयास किया जाएगा।”

हालांकि, इसके बाद उन्होंने जो टिप्पणी की, वही सबसे ज्यादा चर्चा में आ गई।

“राजनीति करते-करते व्यक्ति कुछ ज्यादा ही राजनीतिक हो जाता है”

जब उनसे चुनाव में कथित भितरघात को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने सीधे आरोप लगाने से बचते हुए कहा—

“राजनीति करते-करते व्यक्ति कुछ ज्यादा ही राजनीतिक हो जाता है।”

इसके तुरंत बाद उन्होंने संत कबीरदास का दोहा सुनाया—

“राम न मारे काहू को, ऐसे नौने राम,
आपहि ते मर जात है, कर-कर खोटे काम।”

हालांकि उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह की व्याख्याएं की जा रही हैं।

कबीरदास के दोहे का क्या है अर्थ?

आशुतोष तिवारी द्वारा उद्धृत कबीरदास का दोहा नैतिकता और कर्म पर आधारित संदेश देता है।

इसका आशय यह है कि किसी व्यक्ति के पतन का कारण कोई दूसरा नहीं होता, बल्कि उसके अपने कर्म ही उसे नुकसान पहुंचाते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी हार के तुरंत बाद इस दोहे का प्रयोग करना कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या इशारों में साधा गया निशाना?

आशुतोष तिवारी ने अपने बयान में किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने कहा—

“जो लोग भाजपा को अपनी मां कहते हैं, उन्होंने ही धोखा दिया।”

उनकी इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

कई लोगों का मानना है कि यह बयान भाजपा के भीतर उन नेताओं की ओर इशारा हो सकता है, जिन पर चुनाव के दौरान अंदरूनी असंतोष या निष्क्रियता के आरोप लगाए जाते रहे।

हालांकि इस संबंध में किसी व्यक्ति का नाम उन्होंने सार्वजनिक रूप से नहीं लिया।

नरोत्तम मिश्रा का नाम क्यों हो रहा चर्चा में?

दतिया उपचुनाव के दौरान पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम लगातार राजनीतिक चर्चाओं में बना रहा।

टिकट वितरण के समय उनके समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया था।

बताया जाता है कि टिकट बदलने के फैसले के बाद समर्थकों ने कई घंटों तक प्रदर्शन किया और हाईवे जाम कर दिया था।

बाद में स्थिति सामान्य हुई, लेकिन चुनावी माहौल में यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना रहा।

प्रचार के दौरान भावुक हुए थे नरोत्तम मिश्रा

13 जुलाई 2026 को आयोजित एक चुनावी सभा के दौरान डॉ. नरोत्तम मिश्रा मंच पर भावुक हो गए थे।

उस दौरान उन्होंने भाजपा को अपनी “मां” बताते हुए कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने की अपील की थी।

अब चुनाव परिणाम आने के बाद आशुतोष तिवारी के बयान—

“जो लोग बीजेपी को अपनी मां कहते हैं, उन्होंने धोखा दिया।”

—को उसी संदर्भ से जोड़कर देखा जा रहा है।

हालांकि आशुतोष तिवारी ने स्पष्ट रूप से किसी नेता का नाम नहीं लिया और न ही किसी पर प्रत्यक्ष आरोप लगाया।

भितरघात के सवाल पर क्या बोले आशुतोष?

मीडिया ने जब उनसे पूछा कि क्या वे पार्टी नेतृत्व से भितरघात की शिकायत करेंगे, तो उन्होंने कहा—

“अभी मेरे संज्ञान में ऐसी कोई बात नहीं आई है। यदि भविष्य में कोई तथ्य सामने आएंगे तो निश्चित रूप से पार्टी नेतृत्व से चर्चा करूंगा।”

उन्होंने कहा कि फिलहाल पूरा ध्यान चुनाव परिणाम की समीक्षा पर रहेगा।

हार के कारणों की होगी समीक्षा

आशुतोष तिवारी ने कहा कि चुनाव में जहां-जहां कमियां रह गई हैं, उनकी समीक्षा की जाएगी।

उन्होंने कहा—

“जो भी रिक्तताएं सामने आएंगी, उन्हें सुधार की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संगठन के साथ मिलकर चुनावी प्रदर्शन का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा ताकि भविष्य में बेहतर रणनीति बनाई जा सके।

नरोत्तम मिश्रा के बूथ पर भी पीछे रही बीजेपी

चुनाव परिणाम में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि भाजपा उस पोलिंग क्षेत्र में भी पीछे रही जिसे पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है।

इस पर सवाल पूछे जाने पर आशुतोष तिवारी ने कहा—

“कई बार चुनाव में ऐसी परिस्थितियां बन जाती हैं। पार्टी नेतृत्व सभी पहलुओं पर विचार करेगा और समीक्षा के बाद आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।”

चुनाव परिणाम के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल

दतिया उपचुनाव का परिणाम केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं माना जा रहा है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस परिणाम का असर आने वाले चुनावों की रणनीति पर भी पड़ सकता है।

भाजपा जहां संगठनात्मक स्तर पर समीक्षा की तैयारी कर रही है, वहीं कांग्रेस इस जीत को अपने लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश के रूप में देख रही है।

भाजपा के सामने संगठनात्मक चुनौती

दतिया उपचुनाव के बाद भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट बनाए रखने की मानी जा रही है।

यदि चुनाव के दौरान अंदरूनी मतभेद या असंतोष की बातें सामने आती हैं तो पार्टी नेतृत्व को उन पर गंभीरता से विचार करना होगा।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उपचुनाव अक्सर स्थानीय समीकरणों पर आधारित होते हैं, लेकिन उनके परिणाम भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

कांग्रेस के लिए बढ़ा मनोबल

दूसरी ओर कांग्रेस इस जीत को संगठन की मजबूती और स्थानीय स्तर पर जनता के समर्थन का संकेत मान रही है।

घनश्याम सिंह की जीत से पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा है और आगामी चुनावों के लिए कांग्रेस को नई ऊर्जा मिली है।

निष्कर्ष

दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद आशुतोष तिवारी का बयान राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। उन्होंने जनता के फैसले को स्वीकार करने की बात कही, लेकिन साथ ही संत कबीरदास के दोहे और “राजनीति करते-करते व्यक्ति कुछ ज्यादा ही राजनीतिक हो जाता है” जैसी टिप्पणी के जरिए कई संकेत भी दिए। हालांकि उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में विभिन्न तरह की चर्चाएं जारी हैं। अब सभी की नजर भाजपा की आंतरिक समीक्षा और आगे की रणनीति पर रहेगी, जबकि कांग्रेस इस जीत को अपनी राजनीतिक मजबूती के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

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