Damoh Birthday Party Dispute: बर्थडे पार्टी का वादा पूरा नहीं करने पर दोस्त ने वकील को भेजा लीगल नोटिस, ₹41,250 की मांगी क्षतिपूर्ति
10 अगस्त के जन्मदिन से शुरू हुआ दोस्तों के बीच मामला कानूनी नोटिस तक पहुंचा; आर्थिक, मानसिक और शारीरिक परेशानी का दावा
दमोह। दोस्तों के बीच जन्मदिन की पार्टी मांगना आम बात है। कई बार पार्टी को लेकर हंसी-मजाक और नोकझोंक भी होती है, लेकिन मध्यप्रदेश के दमोह में जन्मदिन की पार्टी से जुड़ा एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां एक दोस्त ने कथित तौर पर पार्टी देने का वादा पूरा नहीं होने पर अपने अधिवक्ता मित्र को कानूनी नोटिस भिजवा दिया। नोटिस में 41 हजार 250 रुपए की क्षतिपूर्ति की मांग की गई है।
मामला दमोह जिला न्यायालय से जुड़े अधिवक्ता गोविंद तिवारी और उनके मित्र विशाल सिंह राजपूत से जुड़ा बताया जा रहा है। विशाल सिंह का आरोप है कि गोविंद तिवारी ने अपने जन्मदिन के अवसर पर दोस्तों को पार्टी देने की बात कही थी, लेकिन बाद में कथित तौर पर वादा पूरा नहीं किया।
इसके बाद विशाल सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कमल सिंह ठाकुर के माध्यम से गोविंद तिवारी को कानूनी नोटिस भेजा गया। नोटिस में पार्टी नहीं मिलने के कारण कथित आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक और शारीरिक परेशानी होने का दावा करते हुए कुल 41,250 रुपए की क्षतिपूर्ति मांगी गई है।
10 अगस्त के जन्मदिन से शुरू हुआ मामला
जानकारी के मुताबिक गोविंद तिवारी का जन्मदिन 10 अगस्त को था। जन्मदिन के बाद उनके परिचित अधिवक्ताओं और कानून के छात्रों ने उनसे पार्टी की मांग की।
विशाल सिंह राजपूत का दावा है कि इस दौरान गोविंद तिवारी ने दोस्तों से अगले रविवार पार्टी देने की बात कही थी। दोस्तों ने कथित तौर पर इस आश्वासन को गंभीरता से लिया और निर्धारित दिन पार्टी की उम्मीद की।
इसके बाद पार्टी को लेकर बातचीत होती रही, लेकिन दावा है कि तय समय पर पार्टी नहीं दी गई। दोस्तों के बीच शुरू हुआ यही मामला बाद में कानूनी नोटिस तक पहुंच गया।
वरिष्ठ अधिवक्ता के माध्यम से भेजा नोटिस
विशाल सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कमल सिंह ठाकुर के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजे जाने की बात सामने आई है।
नोटिस में जन्मदिन की पार्टी के कथित वादे और उसके पूरा नहीं होने से जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख किया गया है। इसके साथ अलग-अलग मदों में नुकसान और परेशानी का दावा करते हुए क्षतिपूर्ति की मांग की गई है।
कुल दावा ₹41,250 का बताया गया है। मामला सामने आने के बाद यह चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि सामान्य तौर पर दोस्तों के बीच मजाक में होने वाली पार्टी की मांग यहां कानूनी नोटिस तक पहुंच गई।
आर्थिक, मानसिक और शारीरिक परेशानी का दावा
नोटिस में पार्टी नहीं मिलने के कारण कथित तौर पर आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक और शारीरिक परेशानी होने की बात कही गई है।
इन्हीं आधारों पर क्षतिपूर्ति की राशि तय किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि कानूनी नोटिस भेजा जाना अपने आप में किसी दावे को न्यायालय द्वारा सही ठहराया जाना नहीं होता। नोटिस में लगाए गए दावे संबंधित पक्ष की ओर से किए गए आरोप हैं।
यदि मामला आगे न्यायालय तक पहुंचता है तो दावों की कानूनी वैधता और उपलब्ध तथ्यों पर संबंधित अदालत ही निर्णय करेगी।
दोस्तों की नोकझोंक बनी चर्चा का विषय
दमोह में सामने आया यह मामला अपने अनोखे स्वरूप के कारण चर्चा में है। आम तौर पर जन्मदिन की पार्टी को लेकर दोस्त एक-दूसरे से मजाक करते हैं और कुछ समय बाद मामला खत्म हो जाता है, लेकिन यहां मामला औपचारिक कानूनी नोटिस तक पहुंच गया।
विशेष बात यह भी है कि मामला कानून से जुड़े लोगों के बीच का बताया जा रहा है। यही वजह है कि सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर भी इसकी चर्चा हो रही है।
लीगल नोटिस का मतलब मुकदमा नहीं
इस पूरे घटनाक्रम में यह समझना भी जरूरी है कि किसी व्यक्ति को कानूनी नोटिस भेजे जाने का अर्थ यह नहीं है कि उसके खिलाफ अदालत ने कोई फैसला दे दिया है।
कानूनी नोटिस आम तौर पर किसी मांग, विवाद अथवा दावे के संबंध में दूसरे पक्ष को औपचारिक रूप से अपना पक्ष बताने और जवाब देने का अवसर देने की प्रक्रिया होती है।
इस मामले में भी ₹41,250 की राशि नोटिस भेजने वाले पक्ष की ओर से मांगी गई क्षतिपूर्ति बताई जा रही है। यह राशि न्यायालय द्वारा निर्धारित अथवा आदेशित मुआवजा नहीं है।
अब जवाब पर रहेंगी निगाहें
बर्थडे पार्टी को लेकर शुरू हुआ यह मामला अब कानूनी नोटिस तक पहुंच चुका है। ऐसे में आगे संबंधित अधिवक्ता की ओर से क्या जवाब दिया जाता है, इस पर नजर रहेगी।
फिलहाल सामने आई जानकारी के आधार पर विशाल सिंह राजपूत की ओर से गोविंद तिवारी को नोटिस भेजकर ₹41,250 की क्षतिपूर्ति मांगी गई है। मामले में गोविंद तिवारी का विस्तृत पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना उचित होगा।
जन्मदिन की एक पार्टी को लेकर शुरू हुआ दोस्तों का यह विवाद अपने असामान्य स्वरूप के कारण दमोह में चर्चा का विषय बना हुआ है।
