Kotma नगर पालिका में भ्रष्टाचार के आरोप, जल संसाधन सभापति पर लाखों के फर्जीवाड़े का दावा
सवांददाता : अभिषेक द्विवेदी
Kotma /अनूपपुर। Kotma नगर पालिका परिषद में जल संसाधन विभाग से जुड़े कार्यों को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। जल संसाधन विभाग के सभापति पर पाइपलाइन मरम्मत, वाहनों की वेल्डिंग और अन्य कार्यों के नाम पर कथित तौर पर फर्जी बिल लगाकर लाखों रुपये के भुगतान कराने का आरोप लगाया गया है। मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों में नाराजगी बताई जा रही है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की अभी आधिकारिक या स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका में विकास और जनसुविधाओं से जुड़े कार्यों के नाम पर सरकारी राशि खर्च की जा रही है, लेकिन कई मामलों में जमीन पर काम की स्थिति और दस्तावेजों में दर्ज कार्यों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कुछ मरम्मत कार्यों के नाम पर बिल तैयार कर भुगतान कराया गया, जबकि संबंधित कार्यों की गुणवत्ता और वास्तविकता की जांच जरूरी है।
पाइपलाइन मरम्मत और वेल्डिंग के बिलों पर सवाल
जल संसाधन विभाग से जुड़े पाइपलाइन सुधार और वाहनों की वेल्डिंग जैसे कार्यों को लेकर विशेष रूप से सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जिन कार्यों के लिए नगर पालिका की राशि खर्च की गई, उनका भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। इसके साथ ही बिलों, वाउचरों, कार्यादेशों और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की जांच भी जरूरी है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जलप्रदाय व्यवस्था सीधे आम लोगों से जुड़ी हुई है। ऐसे में इस विभाग में होने वाले प्रत्येक खर्च में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। यदि किसी कार्य के नाम पर राशि जारी की गई है तो मौके पर उसका वास्तविक मूल्यांकन भी कराया जाना चाहिए।
लंबे कार्यकाल को लेकर भी उठे सवाल
मामले में जल संसाधन विभाग के सभापति के लंबे समय से पद पर बने रहने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि पिछले कई वर्षों के दौरान विभाग में हुए कार्यों और भुगतान की एक साथ समीक्षा की जाए। उन्होंने पिछले करीब 15 वर्षों के वित्तीय लेन-देन, टेंडर प्रक्रिया, कार्यादेश, बिल भुगतान और संबंधित ठेकेदारों की जानकारी की जांच कराने की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि पुराने रिकॉर्ड की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाती है तो यह पता लगाया जा सकता है कि किन कार्यों के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई, कितना भुगतान किया गया और वास्तव में कितना काम हुआ।
एसआईटी या स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों और जागरूक जनप्रतिनिधियों ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी या किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी को जिम्मेदारी देने की मांग की है। उनका कहना है कि नगर पालिका के स्तर पर होने वाली जांच के बजाय उच्चस्तरीय जांच होने से निष्पक्षता बनी रहेगी और दस्तावेजों की सही तरीके से जांच हो सकेगी।
जांच के दौरान टेंडर प्रक्रिया, निविदा दस्तावेज, संबंधित फर्मों की जानकारी, कार्यादेश, माप पुस्तिका, भुगतान वाउचर और बैंक भुगतान सहित अन्य रिकॉर्ड की जांच किए जाने की मांग की गई है। साथ ही जिन कार्यों के लिए भुगतान किया गया, उनका मौके पर भौतिक सत्यापन कराने की बात भी कही गई है।
जनता के पैसों के इस्तेमाल पर जवाबदेही जरूरी
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका को मिलने वाली राशि जनता से जुड़ी सुविधाओं और विकास कार्यों पर खर्च होती है। इसलिए सरकारी धन के प्रत्येक भुगतान में पारदर्शिता आवश्यक है। यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
वहीं, यदि जांच में लगाए गए आरोप निराधार पाए जाते हैं तो संबंधित दस्तावेजों के आधार पर स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच को ही सबसे उचित रास्ता माना जा रहा है।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
Kotma नगर पालिका में लगाए गए इन आरोपों के बाद अब स्थानीय प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। नागरिकों की मांग है कि शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए रिकॉर्ड की जांच कराई जाए और जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि आरोपों को लेकर संबंधित सभापति या नगर पालिका प्रशासन की ओर से क्या आधिकारिक जवाब दिया गया है। इसलिए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है और क्या नगर पालिका के जल संसाधन विभाग से जुड़े पुराने कार्यों एवं भुगतानों की उच्चस्तरीय जांच शुरू की जाती है।
