आंध्र प्रदेश में फिर बढ़ी Corona की चिंता: कडप्पा में मिले नए केस, दो मरीजों की मौत, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
देश में एक बार फिर Corona वायरस को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले से कोविड-19 के नए मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी तेज कर दी है। जिले में चार लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, जबकि दो संक्रमित मरीजों की मौत होने से प्रशासन और स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी और समय पर जांच बेहद जरूरी है।
सबसे अहम बात यह है कि संक्रमित पाए गए सभी लोगों ने कोविड-19 वैक्सीन की दोनों डोज ले रखी थीं और उनमें से एक व्यक्ति को बूस्टर डोज भी लग चुकी थी। इसके बावजूद संक्रमण की पुष्टि होने से यह सवाल फिर उठने लगा है कि कोरोना वायरस के नए स्वरूप कितने प्रभावी तरीके से फैल रहे हैं।
कडप्पा जिले में मिले चार नए कोरोना संक्रमित
आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले की वायरोलॉजी लैब में किए गए RT-PCR परीक्षण के दौरान चार लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, संक्रमितों की पहचान होने के तुरंत बाद उन्हें आइसोलेट कर दिया गया।
चार संक्रमितों में से तीन मरीजों में हल्के लक्षण पाए गए, इसलिए उन्हें होम आइसोलेशन में रहने की सलाह दी गई है। वहीं एक मरीज की तबीयत अधिक खराब होने के कारण उसे अस्पताल के विशेष कोविड-19 वार्ड में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टर लगातार उसकी निगरानी कर रहे हैं।
प्रशासन का कहना है कि संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की पहचान कर उनका भी कोविड टेस्ट कराया जा रहा है ताकि संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके।
दो मरीजों की मौत से बढ़ी चिंता
कडप्पा जिले में कोरोना संक्रमण से दो लोगों की मौत ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। जानकारी के अनुसार, पहली मौत 60 वर्षीय बुजुर्ग की हुई, जिन्हें पहले तिरुपति के SVIMS अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत गंभीर होने के बाद उन्हें CMC वेल्लोर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।
अस्पताल में किए गए RT-PCR टेस्ट में बुजुर्ग कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। बताया गया कि उन्हें पहले से कई गंभीर बीमारियां थीं। वे डायबिटीज, किडनी संबंधी बीमारी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से भी जूझ रहे थे, जिसके कारण संक्रमण उनके लिए अधिक घातक साबित हुआ।
दूसरी मौत 43 वर्षीय व्यक्ति की हुई। डॉक्टरों के अनुसार, उसके सीने के CT स्कैन और अन्य चिकित्सकीय जांच में कोविड संक्रमण की पुष्टि हुई। दोनों मरीजों के संपर्क में आए लोगों की जांच के दौरान चार नए संक्रमितों की पहचान हुई।
चार साल बाद कोरोना से मौत का मामला
आंध्र प्रदेश में कोरोना संक्रमण से मौत का यह मामला लंबे समय बाद सामने आया है। राज्य में कोविड संक्रमण से पिछली बड़ी मृत्यु की घटनाएं लगभग चार वर्ष पहले दर्ज की गई थीं। इसके बाद लंबे समय तक स्थिति सामान्य बनी रही।
अब जुलाई में सामने आए इन मामलों ने स्वास्थ्य विभाग को फिर से सतर्क कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि कोरोना पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और समय-समय पर इसके नए मामले सामने आ सकते हैं।
वैक्सीन लेने के बावजूद संक्रमित हुए मरीज
इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चारों संक्रमितों ने कोविड-19 वैक्सीन की दोनों डोज ली हुई थीं। इतना ही नहीं, एक व्यक्ति को बूस्टर डोज भी लग चुकी थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड वैक्सीन का उद्देश्य संक्रमण को पूरी तरह रोकना नहीं बल्कि गंभीर बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु के खतरे को कम करना है। वायरस समय के साथ लगातार बदलता रहता है, इसलिए नए वेरिएंट वैक्सीन लगवा चुके लोगों को भी संक्रमित कर सकते हैं।
हालांकि अधिकांश मामलों में वैक्सीन लेने वाले मरीजों में बीमारी गंभीर रूप नहीं लेती और वे जल्दी ठीक हो जाते हैं।
ओमिक्रॉन वेरिएंट की आशंका
डॉक्टरों के अनुसार, संक्रमित मरीजों में दिखाई दिए लक्षणों के आधार पर प्रारंभिक रूप से ओमिक्रॉन वेरिएंट या उसके किसी सब-वेरिएंट से संक्रमण फैलने की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों ने मृतकों के सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) भेजे हैं।
जीनोम सीक्वेंसिंग रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संक्रमण किस वेरिएंट के कारण हुआ है और क्या उसमें कोई नया म्यूटेशन मौजूद है।
जीनोम सीक्वेंसिंग क्यों होती है?
जब किसी मरीज में कोरोना संक्रमण की पुष्टि होती है और डॉक्टरों को किसी नए वेरिएंट का संदेह होता है, तब वायरस के सैंपल को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजा जाता है।
इस प्रक्रिया में वायरस के पूरे आनुवंशिक ढांचे (Genome) का अध्ययन किया जाता है। इससे यह पता चलता है कि वायरस का कौन-सा वेरिएंट मरीज को संक्रमित कर रहा है और उसमें पहले की तुलना में कौन-कौन से बदलाव हुए हैं।
यदि कोई नया वेरिएंट मिलता है तो उसके आधार पर स्वास्थ्य विभाग आगे की रणनीति तैयार करता है।
स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई निगरानी
कडप्पा में नए मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे इलाके में निगरानी तेज कर दी है।
प्रशासन की ओर से निम्न कदम उठाए जा रहे हैं—
- संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की पहचान।
- RT-PCR जांच में तेजी।
- अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रखना।
- कोविड वार्ड की व्यवस्था सक्रिय करना।
- जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त जांच अभियान चलाना।
- बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों की विशेष निगरानी।
अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
क्या फिर लौट सकता है कोरोना?
विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना वायरस पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। यह अब भी दुनिया के कई देशों में समय-समय पर नए मामलों के रूप में सामने आता रहता है।
वायरस लगातार म्यूटेशन करता रहता है, जिसके कारण नए सब-वेरिएंट सामने आते हैं। अधिकांश नए वेरिएंट पहले की तुलना में कम गंभीर होते हैं, लेकिन बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए जोखिम अभी भी बना रहता है।
इसलिए कोविड को सामान्य वायरल संक्रमण मानकर पूरी तरह नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा।
क्या वैक्सीन अब भी प्रभावी है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कोविड वैक्सीन अब भी गंभीर संक्रमण से बचाने में प्रभावी मानी जाती है।
हालांकि समय के साथ वायरस बदलता है और नए वेरिएंट वैक्सीन से बनी प्रतिरक्षा को आंशिक रूप से प्रभावित कर सकते हैं। इसके बावजूद उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि वैक्सीन लेने वाले लोगों में अस्पताल में भर्ती होने और मौत का खतरा काफी कम रहता है।
यही कारण है कि स्वास्थ्य एजेंसियां अब भी पात्र लोगों को बूस्टर डोज लेने की सलाह देती हैं।
किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत?
डॉक्टरों के अनुसार निम्न श्रेणी के लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए—
- 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग।
- डायबिटीज के मरीज।
- किडनी रोग से पीड़ित व्यक्ति।
- हृदय रोगी।
- कैंसर मरीज।
- कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग।
- गर्भवती महिलाएं।
- फेफड़ों की पुरानी बीमारी वाले मरीज।
इन लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
Corona के सामान्य लक्षण
नए मामलों में अधिकांश मरीजों में हल्के से मध्यम लक्षण देखने को मिले हैं। कोविड संक्रमण के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं—
- बुखार।
- गले में खराश।
- सूखी खांसी।
- नाक बहना।
- सिरदर्द।
- शरीर में दर्द।
- अत्यधिक थकान।
- सांस लेने में परेशानी।
- स्वाद और गंध में बदलाव।
यदि किसी व्यक्ति को सांस लेने में गंभीर दिक्कत हो या लगातार तेज बुखार बना रहे तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।
संक्रमण से बचाव के लिए क्या करें?
विशेषज्ञों की सलाह है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है।
- भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें।
- हाथों को नियमित रूप से साबुन या सैनिटाइजर से साफ करें।
- खांसी या बुखार होने पर जांच कराएं।
- बीमार होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखें।
- बुजुर्गों और गंभीर मरीजों का विशेष ध्यान रखें।
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार वैक्सीन या बूस्टर डोज लें।
- बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाइयां लेने से बचें।
क्या देश में फिर बढ़ सकता है कोरोना?
फिलहाल केवल कुछ मामलों के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि देश में कोरोना की नई लहर शुरू हो गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
यदि संक्रमण के मामलों में लगातार बढ़ोतरी होती है या किसी नए वेरिएंट की पुष्टि होती है, तो केंद्र और राज्य सरकारें आवश्यक कदम उठा सकती हैं। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग लोगों से सतर्क रहने और अफवाहों से बचने की अपील कर रहा है।
निष्कर्ष
आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले में सामने आए कोरोना संक्रमण के नए मामलों और दो मरीजों की मौत ने एक बार फिर कोविड-19 को लेकर सतर्क रहने की जरूरत महसूस कराई है। हालांकि फिलहाल संक्रमण सीमित संख्या में सामने आया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है और संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की जांच की जा रही है।
मृतकों के सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए हैं, जिससे यह पता चल सकेगा कि संक्रमण किस वेरिएंट के कारण हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, इसलिए व्यक्तिगत स्वच्छता, समय पर जांच, आवश्यक सावधानी और स्वास्थ्य संबंधी दिशानिर्देशों का पालन करना आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
