MP Assembly Monsoon Session 2026: शिवराज और एंदल सिंह के मुखौटे पहनकर पहुंचे कांग्रेस विधायक, किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरा
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र 2026 (MP Assembly Monsoon Session 2026) की शुरुआत पहले ही दिन राजनीतिक गर्माहट और तीखे विरोध प्रदर्शन के साथ हुई। कांग्रेस विधायकों ने किसानों के मुद्दों को लेकर सरकार पर जोरदार हमला बोला। विधानसभा परिसर में गांधी प्रतिमा के सामने कांग्रेस विधायक केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना के मुखौटे पहनकर पहुंचे और प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया।
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार किसानों से किए गए वादों को पूरा करने में विफल रही है। प्रदर्शन के दौरान विधायकों ने किसानों की आय दोगुनी करने, फसल बीमा, फसल नुकसान का मुआवजा, खाद-बीज की उपलब्धता, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और कर्जमाफी जैसे अहम मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
मानसून सत्र के पहले दिन ही गरमाया राजनीतिक माहौल
MP Assembly Monsoon Session 2026 के पहले दिन विधानसभा परिसर का माहौल पूरी तरह राजनीतिक रंग में रंगा दिखाई दिया। सत्र शुरू होने से पहले ही कांग्रेस विधायक गांधी प्रतिमा के सामने एकत्रित हुए और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन का सबसे आकर्षक पहलू यह रहा कि कांग्रेस के कई विधायक केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना के मुखौटे पहनकर पहुंचे। इस प्रतीकात्मक विरोध के माध्यम से विपक्ष ने यह संदेश देने की कोशिश की कि कृषि से जुड़े विभाग किसानों की समस्याओं का समाधान करने में असफल रहे हैं।
किसानों की आय दोगुनी करने के वादे पर सरकार को घेरा
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा आज भी अधूरा है। उनका कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा।
विधायकों ने आरोप लगाया कि बढ़ती महंगाई, महंगे कृषि उपकरण, डीजल, खाद और बीज की कीमतों ने किसानों की आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर दिया है। ऐसे में सरकार को किसानों की आय बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
खाद और बीज की उपलब्धता पर उठाए सवाल
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस विधायकों ने खाद और बीज की उपलब्धता को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।
उनका कहना था कि कई जिलों में किसान समय पर खाद और गुणवत्तापूर्ण बीज नहीं मिलने की शिकायत कर रहे हैं। खेती के महत्वपूर्ण समय में किसानों को लंबी कतारों में लगना पड़ता है, जिससे बुवाई प्रभावित होती है।
विपक्ष ने मांग की कि सरकार पर्याप्त मात्रा में खाद और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करे और वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाए।
MSP को लेकर सरकार पर दबाव
कांग्रेस ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया।
विधायकों का कहना है कि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा है। कई स्थानों पर किसान मजबूरी में अपनी फसल बाजार में कम कीमत पर बेचने को विवश हैं।
विपक्ष ने मांग की कि सरकार सभी प्रमुख फसलों की प्रभावी खरीदी सुनिश्चित करे और किसानों को घोषित MSP का पूरा लाभ मिले।
फसल बीमा योजना पर उठे सवाल
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने फसल बीमा योजना की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए।
उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को समय पर बीमा राशि नहीं मिलती। कई मामलों में किसानों को मुआवजा मिलने में महीनों लग जाते हैं।
विपक्ष ने सरकार से मांग की कि फसल बीमा योजना को अधिक प्रभावी बनाया जाए तथा पात्र किसानों को शीघ्र राहत उपलब्ध कराई जाए।
फसल नुकसान के मुआवजे की मांग
प्रदेश के कई हिस्सों में प्राकृतिक आपदाओं, अतिवृष्टि और अन्य कारणों से फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा भी कांग्रेस ने विधानसभा परिसर में उठाया।
कांग्रेस विधायकों का कहना है कि किसानों को समय पर सर्वे और उचित मुआवजा नहीं मिल रहा। उन्होंने मांग की कि प्रभावित किसानों को शीघ्र आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा फिर बना चर्चा का केंद्र
मानसून सत्र के पहले दिन कांग्रेस ने किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया।
विपक्ष का कहना है कि आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों को राहत देने के लिए सरकार को कर्जमाफी पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान की बजाय केवल घोषणाओं तक सीमित है।
गांधी प्रतिमा के सामने किया प्रतीकात्मक प्रदर्शन
कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर स्थित गांधी प्रतिमा के सामने बैठकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान किसानों के समर्थन में नारे लगाए गए और सरकार से कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि उनका विरोध पूरी तरह लोकतांत्रिक और किसानों के हितों की रक्षा के उद्देश्य से किया गया।
विपक्ष ने सरकार से मांगे जवाब
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है और यहां जनता से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याएं केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण विकास से जुड़ा विषय हैं। इसलिए सरकार को इन मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
सरकार की ओर से क्या हो सकता है जवाब
मानसून सत्र के दौरान सरकार की ओर से किसानों के हित में चल रही विभिन्न योजनाओं, समर्थन मूल्य पर खरीद, कृषि विकास कार्यक्रमों और राहत योजनाओं का पक्ष रखा जा सकता है।
सरकार यह भी बता सकती है कि कृषि उत्पादन बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने और किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
हालांकि विपक्ष का कहना है कि योजनाओं का लाभ जमीन पर अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच रहा है और किसानों की वास्तविक समस्याओं का समाधान अभी बाकी है।
पूरे मानसून सत्र में किसानों के मुद्दों पर रहने की संभावना
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि MP Assembly Monsoon Session 2026 के दौरान किसानों से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठते रहेंगे। कांग्रेस पहले ही संकेत दे चुकी है कि वह खाद-बीज, समर्थन मूल्य, फसल बीमा, मुआवजा, सिंचाई, बिजली और कर्जमाफी जैसे विषयों पर सरकार को लगातार घेरने की रणनीति पर काम करेगी।
दूसरी ओर सरकार अपनी उपलब्धियों और कृषि क्षेत्र में किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए विपक्ष के आरोपों का जवाब दे सकती है। ऐसे में विधानसभा का यह मानसून सत्र किसानों के मुद्दों पर तीखी बहस और राजनीतिक टकराव का केंद्र बनने की संभावना है।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र 2026 की शुरुआत ही किसानों के मुद्दों पर जोरदार राजनीतिक टकराव के साथ हुई। कांग्रेस विधायकों द्वारा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्य कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना के मुखौटे पहनकर किया गया प्रदर्शन पूरे दिन चर्चा का विषय बना रहा।
खाद, बीज, MSP, किसानों की आय दोगुनी करने का वादा, फसल बीमा, मुआवजा और कर्जमाफी जैसे मुद्दों को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। अब सभी की नजर विधानसभा की कार्यवाही पर रहेगी कि इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार क्या जवाब देती है और किसानों से जुड़े सवालों पर क्या ठोस निर्णय सामने आते हैं।
