‘कांग्रेस खुद भस्मासुर है…’, पार्टियां तोड़ने के आरोप पर किरेन रिजिजू का पलटवार
TMC के चुनाव चिह्न विवाद पर राहुल गांधी ने बीजेपी और चुनाव आयोग को घेरा; सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस का राजनीतिक इतिहास याद दिलाया
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर जारी विवाद पर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी आमने-सामने आ गई हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा बीजेपी और चुनाव आयोग पर राजनीतिक दलों को तोड़ने एवं उनके चुनाव चिह्न छीनने का आरोप लगाए जाने के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने तीखा पलटवार किया। रिजिजू ने कांग्रेस की तुलना ‘भस्मासुर’ से करते हुए कहा कि दूसरों पर आरोप लगाने से पहले कांग्रेस को अपने राजनीतिक इतिहास और वर्तमान स्थिति पर नजर डालनी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस स्वयं अपने सहयोगियों और अपने संगठन को कमजोर करती रही है। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दलों में होने वाली टूट के लिए हर बार बीजेपी को जिम्मेदार ठहराना कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति बन गई है। रिजिजू के मुताबिक कांग्रेस के भीतर नेतृत्व, संगठन और आपसी विश्वास का संकट है। पार्टी अपनी कमजोरियों को स्वीकार करने के बजाय उनका दोष बीजेपी पर डालने का प्रयास करती है।
रिजिजू ने कहा, “कांग्रेस खुद भस्मासुर है।” उनके इस बयान का आशय था कि कांग्रेस अपने ही फैसलों और राजनीति से स्वयं को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पूर्व में कई क्षेत्रीय दलों और सरकारों को अस्थिर किया, लेकिन आज वह बीजेपी पर लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगा रही है।
राहुल गांधी ने लगाया ‘पार्टी चोरी’ का आरोप
यह राजनीतिक विवाद उस समय तेज हुआ जब राहुल गांधी ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद चुनाव आयोग तथा बीजेपी की भूमिका पर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पहले शिवसेना, फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और अब तृणमूल कांग्रेस—हर बार एक जैसा राजनीतिक तरीका अपनाया जा रहा है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पहले किसी राजनीतिक दल में टूट कराई जाती है और उसके बाद पार्टी के नाम एवं चुनाव चिह्न को लेकर विवाद खड़ा हो जाता है। उन्होंने इसे “वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी” बताते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल ममता बनर्जी या तृणमूल कांग्रेस की नहीं, बल्कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव चाहने वाले प्रत्येक राजनीतिक दल और मतदाता की है। चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के दावों को देखते हुए अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों को पार्टी का मूल नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोक दिया था। आयोग का कहना था कि अंतिम निर्णय होने तक दोनों पक्षों को समान अवसर देने के उद्देश्य से यह व्यवस्था की गई है।
सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस को याद दिलाया इतिहास
बीजेपी के राज्यसभा सांसद एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने भी राहुल गांधी के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को दूसरों पर राजनीतिक दल तोड़ने का आरोप लगाने से पहले अपना इतिहास देखना चाहिए। त्रिवेदी ने दावा किया कि कांग्रेस ने कई अवसरों पर दूसरी पार्टियों के सहयोग से बनी सरकारों से समर्थन वापस लेकर उन्हें गिराया।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, एचडी देवगौड़ा और इंद्र कुमार गुजराल की सरकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस के समर्थन वापस लेने के कारण इन सरकारों को सत्ता गंवानी पड़ी थी। बीजेपी प्रवक्ता ने राहुल गांधी पर राजनीतिक इतिहास की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस लंबे समय तक राज्यों और केंद्र में विरोधी सरकारों को अस्थिर करने की राजनीति करती रही है।
बीजेपी नेताओं का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस का विवाद उसका आंतरिक मामला है और चुनाव आयोग संवैधानिक नियमों के तहत निर्णय ले रहा है। वहीं कांग्रेस का आरोप है कि संवैधानिक संस्थाओं के माध्यम से विपक्षी दलों को कमजोर किया जा रहा है। इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच TMC का नाम और चुनाव चिह्न विवाद अब पश्चिम बंगाल से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है।
