Budget 2026: ‘देश को पाखंड से भरा संदेश दे रहे PM मोदी’, Congress का आरोप
नई दिल्ली (29 जनवरी, 2026): Congress पार्टी ने PM नरेंद्र मोदी पर बजट सत्र के संदर्भ में उनके बयानों को लेकर तीखा हमला किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि PM मोदी लगातार प्रत्येक सत्र की शुरुआत में “देश को पाखंडी संदेश” दे रहे हैं, जबकि असल में उनके कार्यों में विपक्षी नेताओं को विश्वास में लेना और विधायी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है।
PM पर Congress का हमला
Congress के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की यह आदत बन चुकी है कि वह सत्र के शुरुआत में अपने “देश के नाम संदेश” में हर बार वही पाखंड भरे बयान देते हैं। जयराम रमेश ने दावा किया कि मोदी न तो विपक्षी दलों को विश्वास में लेने के लिए कोई सर्वदलीय बैठक बुलाते हैं और न ही संसद में होने वाली चर्चाओं में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।
रमेश ने कहा, “PM राष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्ष को विश्वास में लेने के लिए कभी सर्वदलीय बैठकें नहीं बुलाते। वह विधेयकों को बिना पर्याप्त चर्चा के पारित करवा देते हैं, और संसद में बैठकर विपक्षी नेताओं की चिंताओं का जवाब नहीं देते, बल्कि चुनावी रैलियों में भाषण देते हैं।”
उनका यह भी कहना था कि मोदी संसद में बैठकर जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय सिर्फ “पाखंड से भरे संदेश” देते हैं, जो लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ है।
पारदर्शिता की कमी और विपक्षी नेताओं का आरोप
Congress के नेताओं ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार संसद में विपक्षी दलों के सवालों को अनदेखा कर रही है, और बिना चर्चा के बिलों को पारित करवा रही है। जयराम रमेश ने कहा, “PM का यह रवैया लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उल्लंघन है। जब भी संसद का सत्र शुरू होता है, वह अपना ‘देश के नाम संदेश’ देकर जनता को यह भ्रमित करने का काम करते हैं कि वह उनके हित में काम कर रहे हैं, जबकि असल में उनका रवैया विपक्षी विचारों को नजरअंदाज करने का होता है।”
कांग्रेस का कहना है कि इस तरह की परिस्थितियों में, जब कोई सरकार विपक्ष की चिंताओं को नजरअंदाज करती है, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था की गंभीर स्थिति हो जाती है।
मोदी के बयान पर कांग्रेस का तंज
कांग्रेस के महासचिव ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी अपने बयान में यह दावा करते हैं कि उनकी सरकार देश को दीर्घकालिक समाधान प्रदान कर रही है, लेकिन वास्तव में यह सिर्फ एक दिखावा है। उन्होंने आगे कहा, “PM के बयान में जो दीर्घकालिक समाधान की बात की जा रही है, वह सिर्फ एक शो है। असल में उनका उद्देश्य सिर्फ अपनी छवि बनाने का है, जबकि असली मुद्दों पर वह कोई ठोस कदम नहीं उठाते।”
PM मोदी का बयान
वहीं, PM नरेंद्र मोदी ने अपने बयान में यह कहा कि यूरोपीय संघ (EU) के साथ मुक्त व्यापार समझौता भारत के लिए एक महत्वाकांक्षी कदम है। उनका कहना था कि भारत लंबे समय से लंबित समस्याओं से उबर रहा है और अब दीर्घकालिक समाधानों की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। मोदी ने यह भी कहा कि उनकी सरकार केवल फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम जनता तक कल्याणकारी योजनाओं की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए भी काम कर रही है।
PM ने कहा, “हमारी सरकार का उद्देश्य मानव-केंद्रित विकास को बढ़ावा देना है और इस दिशा में हम बड़े कदम उठा रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “आज भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है और दुनिया के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा है।”
कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप
कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला पहले भी कई बार देखा गया है। कांग्रेस ने हमेशा बीजेपी और मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि वह संसद को एक औपचारिकता के रूप में उपयोग करती है और विपक्ष के साथ सार्थक संवाद से बचती है। वहीं, बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस सरकार के समय में ऐसा कभी नहीं हुआ, और मोदी सरकार ने हर मुद्दे पर विपक्ष को विश्वास में लिया है।
आखिरकार क्या हो रही है बजट सत्र की सच्चाई?
वर्तमान में, बजट सत्र की शुरुआत के साथ, प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह से अपना ‘देश के नाम संदेश’ दिया, वह संसद में जारी राजनीतिक तनाव को और बढ़ाता नजर आ रहा है। जहां एक ओर प्रधानमंत्री ने यह कहा कि उनकी सरकार दीर्घकालिक समाधान की दिशा में काम कर रही है, वहीं कांग्रेस ने इसे पाखंड करार देते हुए कहा कि यह सिर्फ एक दिखावा है और असल में सरकार विपक्ष की आवाज़ को दबा रही है।
कांग्रेस की रणनीति
कांग्रेस की रणनीति अब यह बन गई है कि वह प्रधानमंत्री मोदी के पाखंड से भरे बयानों का पर्दाफाश करें और जनता को यह बताने की कोशिश करें कि असल में मोदी सरकार उनके मुद्दों की अनदेखी कर रही है। पार्टी ने यह भी संकेत दिया है कि वह आने वाले दिनों में बजट सत्र में और भी कड़े विरोध प्रदर्शन करेगी और देश की जनता को सरकार की असलियत से परिचित कराएगी।
निष्कर्ष
PM नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के बीच का यह तना-तनी का मुद्दा कहीं न कहीं इस बात का संकेत है कि देश में राजनीतिक माहौल अभी भी गरम है। विपक्ष को विश्वास में न लेने और विपक्षी नेताओं के सवालों का जवाब न देने का आरोप प्रधानमंत्री मोदी पर लगाना कांग्रेस का पुराना रुख है। अब यह देखना बाकी है कि इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच आगामी बजट सत्र में क्या बदलाव आते हैं और मोदी सरकार की योजना पर विपक्ष की प्रतिक्रिया कितनी तीव्र होती है।
