अशोकनगर में समर्थन मूल्य पर अनाज बेचने आए किसानों की तुलाई रुकी तो गुस्से में कलेक्टर साकेत मालवीय ने अफसरों को फोन लगाकर फटकारा। जानें पूरा मामला और कलेक्टर के सख्त एक्शन की कहानी।
गुस्से में कलेक्टर ने लगाया फोन तो दौड़े अफसर: किसानों का दर्द सुन अशोकनगर कलेक्टर साकेत मालवीय ने लगाई क्लास
Ashoknagar News: तीन दिनों की मजबूरी, धूप-मच्छरों के बीच खड़े किसान और एक सरकारी तंत्र जो सो रहा था। लेकिन जब गुस्से में कलेक्टर ने लगाया फोन तो हरकत में आए अफसर।
तीन दिन से इंतजार, धैर्य टूटा तो किसानों ने किया चक्काजाम
अशोकनगर जिले के कोलुआ रोड स्थित 9 नंबर गोदाम के बाहर किसानों की लंबी कतार थी। यहाँ धुर्रा-महाना सोसायटी का चना-मसूर खरीदी केंद्र है। किसान मोहन सिंह रघुवंशी ने बताया, “हम तीन दिन से यहाँ पड़े हैं। रातभर मच्छर काटते हैं, दिनभर धूप। एक कांटा चल रहा है, दिनभर में सिर्फ तीन ट्रॉलियाँ तौली गईं।”जब शुक्रवार दोपहर में खरीदी केंद्र ने तौल बंद कर दी, तो किसानों का धैर्य टूट गया। लगभग दो दर्जन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ किसानों ने थूबोन मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। यह जाम करीब आधे घंटे तक चला, जिससे पूरा रास्ता ठप हो गया।
जाम में फंसे कलेक्टर, मौके पर पहुंचकर सुना दर्द
इसी दौरान वहाँ से गुजर रहे अशोकनगर कलेक्टर साकेत मालवीय खुद जाम में फंस गए। कार रुकते ही उन्होंने मौके पर पहुँचकर किसानों से सीधे बात की। किसानों ने कलेक्टर को बताया कि 1 अप्रैल का स्लॉट बुक होने के बावजूद 8 तारीख तक कोई खरीदी नहीं हुई। कपिल रघुवंशी ने कहा, “आज मेरा स्लॉट खत्म होने वाला था, प्रबंधक ने तौल से हाथ खड़े कर दिए थे। शुक्र है कलेक्टर साहब आ गए।”
गुस्से में कलेक्टर ने लगाया फोन – अफसरों को फटकार
किसानों का दर्द सुनकर कलेक्टर साकेत मालवीय का पारा चढ़ गया। तुरंत उन्होंने संयुक्त कलेक्टर, तहसीलदार और कृषि उपसंचालक को फोन मिलाया। एक अधिकारी को देरी पर गुस्से में कलेक्टर ने लगाया फोन और ताड़ते हुए कहा, “आपको काम बोझ लग रहा है क्या? हम यहाँ खड़े हैं और किसान सड़क पर हैं। मजाक चल रहा है क्या? आपसे पहले मुझे जानकारी लग रही है।”इस फोन कॉल के बाद अफसर हड़बड़ाकर मौके पर दौड़े पहुँचे।
कलेक्टर बोले – “तुलाई चालू रखो, चाहे रात हो या दिन”
कलेक्टर साकेत मालवीय खुद पैदल चलकर किसानों के साथ खरीदी केंद्र के अंदर पहुँचे। समिति प्रबंधक को खूब फटकार लगाई और सख्त लहजे में आदेश दिए:
“जब तक ट्रैक्टर खड़े हैं, चाहे दिन हो या रात, शनिवार हो या रविवार, तुलाई चालू रखिए। यह केंद्र किसानों के हिसाब से चलेगा, प्रबंधक की मर्जी से नहीं। एक भी ट्रॉली बाहर खड़ी नहीं दिखनी चाहिए।”
इसके बाद तुरंत तौल प्रक्रिया शुरू करवाई गई।
QR कोड का विवाद: 6 लाख की मांग, मिले सिर्फ 6 हजार
इस पूरे मामले में QR कोड आधारित हाईटेक व्यवस्था भी बाधा बनी। शासन ने हर बोरी पर QR कोड लगाने का नियम बनाया है, जिससे पता चले कि बोरी किस जिले, केंद्र और किसान की है। विपणन अधिकारी ने जिले के लिए 6 लाख QR कोड की मांग की थी, लेकिन अब तक केवल 6 हजार QR कोड ही मिल पाए हैं।किसानों ने आरोप लगाया कि खरीदी केंद्र संचालक ने QR कोड की कमी का बहाना बनाकर केवल अपने खास लोगों को ही QR कोड बांट दिए। अधिकारियों का कहना है कि रविवार तक 66 हजार QR कोड आने की उम्मीद है।
किसानों की जुबानी – “स्लॉट खत्म हो रहा था, कलेक्टर ने बचाई उपज”
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मोहन सिंह रघुवंशी (किसान): “हम तीन दिन से यहाँ पड़े हैं। रात भर मच्छर काटते हैं और दिन में धूप रहती है। जब प्रबंधक ने मना किया, तब हमें सड़क पर चक्काजाम करने मजबूर होना पड़ा।”
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कपिल रघुवंशी (किसान): “आज मेरा स्लॉट खत्म होने वाला था और ये लोग कह रहे थे कि अब तौल नहीं होगी। शुक्र है कलेक्टर आ गए, नहीं तो हमारी उपज धरी रह जाती।”
