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“Coldrif Syrup त्रासदी: 17 मासूम बच्चों की मौत — मुख्यमंत्री मोहन यादव की ‘सहानुभूति’ क्या सुधार पाएगी सिस्टम की खामियाँ? जहरीले सिरप से लिवर और किडनी फेल, अधिकारियों का निलंबन, परिवारों की पीड़ा और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही उजागर”

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Published On: 7 October 2025
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🚨 Coldrif Syrup से बच्चों की मौत: सवाल उठ रहे हैं मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी पर

छिंदवाड़ा / बैतूल, अक्टूबर 2025:
छिंदवाड़ा और बैतूल में Coldrif कफ सिरप के सेवन से अब तक 17 मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है। सोमवार को तामिया ब्लॉक के जूनापानी गांव में एक डेढ़ साल की बच्ची नागपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ गई। परिजनों का कहना है कि उन्हें विश्वास ही नहीं था कि वही सिरप उनकी बेटी की जान ले लेगा।

यह दर्दनाक घटना पूरे प्रदेश में गहरा शोक फैला रही है। मृत बच्चों के परिजनों की आंसू भरी कहानियां यह दिखाती हैं कि केवल एक मुख्यमंत्री के दौरे या संवेदना व्यक्त करने से बच्चों की जान नहीं बचाई जा सकती।


💉 जहरीले सिरप की जांच में गंभीर चूक

जांच में सामने आया कि Coldrif सिरप और दो अन्य सिरपों में खतरनाक रसायन डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) पाया गया।

  • Tamiz Nadu की श्रीसन फार्मास्युटिकल्स के Coldrif सिरप में 46–48% DEG था।
  • मध्यप्रदेश से जाँच में दो और सिरप गुजरात की कंपनियों के थे, जिनमें DEG की मात्रा सुरक्षित स्तर से कई गुना अधिक पाई गई।

इस जहरीले रसायन के कारण बच्चों के लिवर और किडनी फेल हो गए।


🏥 मेडिकल स्टोर और डॉक्टर की जिम्मेदारी

जांच में यह पता चला कि Coldrif सिरप की 300 बोतलें उस मेडिकल स्टोर से सप्लाई हुईं, जो डॉ. प्रवीण सोनी की पत्नी के नाम पर रजिस्टर्ड था और स्टोर का संचालन उनके भतीजे द्वारा किया जा रहा था।

  • मेडिकल स्टोर का लाइसेंस रद्द कर दिया गया।
  • वितरण में मिली अनियमितताओं के कारण डॉक्टर और स्टोर संचालकों पर कार्रवाई जारी है।

लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या केवल स्टोर और डॉक्टर को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त है, जब सरकारी निगरानी पूरी तरह से नाकाम रही हो?

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⚠️ नियमों का उल्लंघन

भारत सरकार ने 2023 में साफ निर्देश दिए थे कि Chlorpheniramine Maleate और Phenylephrine HCI वाले कफ सिरप 4 साल से छोटे बच्चों को नहीं दिए जा सकते।
लेकिन Coldrif सिरप की पैकेजिंग पर कोई चेतावनी नहीं थी, और यह सीधे छोटे बच्चों तक पहुँच गया।

यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि नियम और कानून लागू करने में भी लापरवाही हुई।


⚡ प्रशासनिक कार्रवाई और सवाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छिंदवाड़ा दौरा किया और मृतक परिवारों से मुलाकात की। इसके बाद कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया:

  • IAS दिनेश कुमार मौर्य – ड्रग कंट्रोलर
  • शरद जैन – जबलपुर ड्रग इंस्पेक्टर
  • शोभित कोष्टा – डिप्टी ड्रग कंट्रोलर
  • गौरव शर्मा – छिंदवाड़ा ड्रग इंस्पेक्टर

लेकिन सवाल उठता है कि क्या केवल दौरा और निलंबन जिम्मेदारी पूरी कर देता है? इस त्रासदी में सुपरवाइजरी स्तर पर गहरी लापरवाही हुई है, जिसे केवल कागजी कार्रवाई से नहीं मापा जा सकता।


🙏 परिवारों की पीड़ा

इस दर्दनाक घटना ने परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी है। माता-पिता अब केवल अपने बच्चों की यादों के सहारे जी रहे हैं।

  • एक पिता ने कहा, “हमें उम्मीद थी कि डॉक्टर हमारी बेटी को बचाएंगे, पर अब सिर्फ उसकी यादें बची हैं।”
  • ऐसे परिवारों के लिए सरकार की संवेदना केवल शब्दों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि कानूनी कार्रवाई और भविष्य में सुरक्षा उपाय भी जरूरी हैं।

🏥 निष्कर्ष

Coldrif सिरप कांड यह साफ दिखाता है कि:

  • प्रशासनिक निगरानी में गंभीर चूक हुई।
  • कानूनी निर्देशों की अनदेखी की गई।
  • परिवारों की जिंदगी तबाह हुई।
  • मुख्यमंत्री का दौरा और अधिकारियों का निलंबन केवल प्रारंभिक कदम हैं, लेकिन जिम्मेदारी की पूरी पूर्ति नहीं।

अब सवाल यह है कि क्या सरकार वास्तव में यह सुनिश्चित कर पाएगी कि भविष्य में ऐसे हादसे दोबारा न हों, या यह केवल कागजी कार्रवाई और बयानबाजी तक सीमित रह जाएगी।

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