मुख्यमंत्री मोहन यादव का छिंदवाड़ा दौरा: मृत बच्चों के परिजनों से की मुलाकात, जिम्मेदारों पर होगी सख्त कार्रवाई
छिंदवाड़ा/परासिया: मध्यप्रदेश में जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत का मामला लगातार सुर्खियों में है। इस दुखद घटना के बीच, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छिंदवाड़ा जिले के परासिया का दौरा किया और मृत बच्चों के परिजनों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन हर स्थिति में परिवारों के साथ खड़ा रहेगा और इस मामले में लापरवाही करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।
मुख्यमंत्री ने परिजनों से सीधे संवाद किया और उन्हें भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार इस त्रासदी की जिम्मेदारियों का पूरा हिसाब लेगी। उन्होंने परिवारों को हर तरह की सहायता देने का आश्वासन भी दिया।
जहरीले कफ सिरप से अब तक 16 बच्चों की मौत
छिंदवाड़ा के परासिया क्षेत्र में जहरीले “कोल्ड्रिफ” कफ सिरप के सेवन से अब तक 16 बच्चों की मौत हो चुकी है। हालांकि प्रशासन ने अब तक केवल 14 बच्चों की मौत की पुष्टि की है। राज्य सरकार ने इससे पहले 12 बच्चों की मौत के आधार पर प्रभावित परिवारों को 56 लाख रुपये की राहत राशि मंजूर कर दी थी। इससे यह अनुमान लगाया गया कि प्रशासन ने 14 बच्चों की मौत का आंकलन पहले ही कर लिया था।
डॉक्टर प्रवीण सोनी गिरफ्तार और निलंबित
मामले में परासिया सिविल अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी को गिरफ्तार कर लिया गया है। शासन ने उन्हें निलंबित कर दिया है और जबलपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में स्थानांतरित कर दिया है। इसके अलावा, कफ सिरप बनाने वाली श्रेसन फार्मास्यूटिकल कंपनी के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है।
डॉक्टरों का विरोध
डॉ. प्रवीण सोनी की गिरफ्तारी के बाद डॉक्टरों में नाराजगी देखने को मिली। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बैनर तले छिंदवाड़ा में 6 अक्टूबर को जिला अस्पताल से रैली निकाली गई और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। डॉक्टरों ने डॉ. सोनी की गिरफ्तारी का विरोध किया और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर डॉ. सोनी को रिहा नहीं किया गया तो वे और बड़े आंदोलन का सहारा लेंगे।
प्रशासन और सरकार की स्थिति
सरकार और प्रशासन इस समय पूरे मामले की जांच में जुटे हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में लापरवाह अधिकारियों और जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बच्चों की मौत और प्रभावित परिवारों की परेशानी को लेकर राज्य सरकार गंभीर है और सभी कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाए जा रहे हैं।

