—Advertisement—

CM हाउस, उज्जैन के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी, जानें इसकी खासियतें

Author Picture
Published On: 6 April 2026
CM
— काशी विश्वनाथ में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी, सटीक समय और पंचांग की जानकारी के लिए

—Advertisement—

CM हाउस, उज्जैन के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी, जानें इसकी खासियतें

उत्तर प्रदेश के काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में अब एक अनोखी वैज्ञानिक और सांस्कृतिक धरोहर स्थापित कर दी गई है – विक्रमादित्य वैदिक घड़ी। यह घड़ी प्राचीन भारतीय ज्ञान और आधुनिक तकनीक का संगम है, जो केवल समय बताने का साधन नहीं बल्कि भारतीय कालगणना और वैदिक विज्ञान का डिजिटल रूप है। इसे मध्य प्रदेश के CM,मोहन् यादव की पहल और उपहार स्वरूप उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट के रूप में दिया गया।

चौथी स्थापना – उज्जैन और CM हाउस के बाद काशी में

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की स्थापना 4 अप्रैल 2026 को काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार सम्पन्न की गई। यह घड़ी पहले CM हाउस और उज्जैन के महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ में स्थापित हो चुकी है। काशी विश्वनाथ में इसे स्थापित करने के बाद यह तीसरी जगह बन गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, चौथी घड़ी अयोध्या रामलला मंदिर में स्थापित की जाएगी।

CM मोहन् यादव ने 3 अप्रैल 2026 को इस घड़ी को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट किया था। इसके अगले दिन, विक्रम संवत 2083 के वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की द्वितीया को इसे मंदिर परिसर में श्रद्धापूर्वक स्थापित किया गया।

वैदिक घड़ी की विशेषताएं

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी केवल समय देखने का यंत्र नहीं है। यह भारतीय प्राचीन विज्ञान, खगोलशास्त्र और पंचांग विद्या का डिजिटल रूपांतरण है। इसे उज्जैन के महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा विकसित किया गया है।

इस घड़ी की सबसे अनोखी विशेषता यह है कि यह सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के आधार पर समय की सटीक गणना करती है। पूरे दिन को यह घड़ी 30 मुहूर्तों में विभाजित करती है, जिससे धार्मिक और वैदिक कर्मकाण्डों के लिए सही समय का ज्ञान मिलता है।

इसके अलावा, इस घड़ी के माध्यम से श्रद्धालु और युवा पीढ़ी निम्नलिखित जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं:

  • भारतीय मानक समय (IST)
  • पंचांग और तिथियाँ
  • योग और नक्षत्र
  • भद्रा स्थिति
  • ग्रहों के गोचर और उनके प्रभाव

इस प्रकार यह घड़ी न केवल समय बताती है, बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और खगोलीय ज्ञान को भी जनमानस तक पहुँचाती है।

आधुनिक तकनीक और प्राचीन ज्ञान का संगम

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का सबसे बड़ा महत्व इसके वैज्ञानिक और तकनीकी नवाचार में है। यह घड़ी आधुनिक डिजिटल तकनीक का उपयोग कर प्राचीन वैदिक ज्ञान को वर्तमान युग के लिए सुलभ बनाती है। सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार समय का सटीक निर्धारण करना इस घड़ी की सबसे प्रमुख विशेषता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि इस घड़ी के माध्यम से न केवल मंदिर परिसर में श्रद्धालु अपने धार्मिक कर्मों को सही समय पर कर सकते हैं, बल्कि युवा पीढ़ी को भारतीय समय गणना और खगोलशास्त्र के बारे में व्यावहारिक ज्ञान भी मिलेगा।

सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का स्थापन सिर्फ तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह भारतीय सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है। काशी विश्वनाथ मंदिर में इस घड़ी की स्थापना से यह संदेश जाता है कि प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का संगम आज भी संभव है।

मंदिर प्रशासन और धार्मिक विद्वानों का मानना है कि इस घड़ी से न केवल श्रद्धालुओं को सही समय की जानकारी मिलेगी, बल्कि यह धार्मिक अनुष्ठानों और मुहूर्तों के पालन में भी सहायक साबित होगी। साथ ही, यह घड़ी भारतीय युवा पीढ़ी को अपने सांस्कृतिक और खगोलीय ज्ञान से जोड़ने का माध्यम बनेगी।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

घड़ी के तकनीकी पहलू को ध्यान में रखते हुए, इसे सौर ऊर्जा आधारित प्रणाली से संचालित किया गया है। यह सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को सटीक रूप से मापती है और दिन के 30 मुहूर्तों में विभाजित करती है। इसका डिज़ाइन और प्रोग्रामिंग आधुनिक डिजिटल तकनीक और प्राचीन वैदिक गणना का मिश्रण है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस घड़ी के माध्यम से समय की गणना में त्रुटि का लगभग कोई स्थान नहीं है। इसे किसी भी भौगोलिक स्थान पर स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार समायोजित किया जा सकता है, जिससे समय की सटीकता सुनिश्चित होती है।

भविष्य की योजनाएँ

CM मोहन् यादव और शोधपीठ के विद्वानों ने भविष्य में अयोध्या रामलला मंदिर में चौथी वैदिक घड़ी स्थापित करने की योजना बनाई है। इसके अलावा, अन्य प्रमुख मंदिरों और सांस्कृतिक केंद्रों में भी इस घड़ी के माध्यम से भारतीय खगोलशास्त्र और पंचांग ज्ञान को बढ़ावा देने की तैयारी है।

इस पहल से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का संगम आज भी हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को सुदृढ़ कर सकता है।

निष्कर्ष

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी केवल एक घड़ी नहीं, बल्कि भारतीय वैज्ञानिक और सांस्कृतिक ज्ञान का प्रतीक है। उज्जैन और CM हाउस के बाद अब काशी विश्वनाथ मंदिर में इसकी स्थापना से यह सुनिश्चित होता है कि युवाओं और श्रद्धालुओं को भारतीय समय गणना, पंचांग और ग्रह गोचर की सटीक जानकारी उपलब्ध हो सके।

इस घड़ी के माध्यम से न केवल भारतीय संस्कृति का पुनरुत्थान होगा, बल्कि यह भविष्य में धार्मिक अनुष्ठानों और वैदिक ज्ञान के प्रचार-प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp