—Advertisement—

CM मोहन यादव ने नर्मदा में 6 मगरमच्छ छोड़े, ओंकारेश्वर अभयारण्य पर मछुआरा संगठन और स्थानीय लोगों ने जताया विरोध, खंडवा न्यूज अपडेट

Author Picture
Published On: 31 October 2025
Madhya Pradesh Wildlife Conservation Narmada River Crocodiles Program 1

—Advertisement—

CM मोहन यादव ने नर्मदा में छोड़े 6 मगरमच्छ, मछुआरा संगठनों ने जताया विरोध

खंडवा न्यूज़: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को खंडवा जिले के नर्मदानगर स्थित साकल घाट पर एक महत्वपूर्ण और विवादित कदम उठाया। उन्होंने नर्मदा नदी में कुल 6 मगरमच्छों को छोड़ने की घोषणा की। इनमें 4 मादा और 2 नर मगरमच्छ शामिल थे, जिन्हें भोपाल से लाकर इंदिरा सागर डैम के बैकवॉटर में छोड़ा गया। ये सभी मगरमच्छ पहले अन्य तालाबों और नदियों से रेस्क्यू किए गए थे।

मगरमच्छों को नदी में छोड़ने के समय उनके पिंजरे से निकालने के बाद करीब एक घंटे तक ये पानी में नहीं उतरे। इस दौरान मुख्यमंत्री और वन विभाग के कर्मचारी उन्हें नदी में जाने के लिए लाठी की मदद से आगे बढ़ाते रहे। अंततः सभी मगरमच्छों को सुरक्षित रूप से नर्मदा नदी में छोड़ दिया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह कदम आमजन के लिए कोई खतरा पैदा नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि जहां मगरमच्छ छोड़े गए हैं, वहां सेंचुरी घोषित की जा रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 1 नवंबर, मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के मौके पर ओंकारेश्वर को अभयारण्य घोषित किया जाएगा। उन्होंने इस अवसर को विशेष बताते हुए कहा कि यह सेंचुरी मंत्री विजय शाह के जन्मदिन के दिन घोषित की जाएगी।

सीएम यादव ने आगे बताया कि राज्य सरकार “पुण्य सलिला मां नर्मदा के वाहन मगरमच्छ को मां नर्मदा में बसाने” के संकल्प को आगे बढ़ा रही है। उनका कहना है कि नर्मदा की धारा मगरमच्छों के जीवन और आवास के लिए अत्यंत अनुकूल है।

1200 675 25301832 thumbnail 16x9 kh aspera

मछुआरा संगठनों और स्थानीय लोगों का विरोध

हालांकि, मुख्यमंत्री द्वारा नर्मदा नदी में मगरमच्छ छोड़ने के फैसले पर खंडवा में मछुआरा संगठनों ने विरोध जताया। मछुआरा संगठन के कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सदाशिव भंवरिया ने कहा कि इस कदम से हजारों मछुआरों की रोज़ी-रोटी खतरे में पड़ सकती है। उनका कहना है कि इंदिरा सागर डेम के तीन जिलों — खंडवा, हरदा और देवास के लगभग एक लाख हेक्टेयर जलक्षेत्र में मगरमच्छों और घड़ियालों की संख्या बढ़ेगी। इससे मछुआरों को अपने काम के दौरान मगरमच्छों से खतरा बढ़ जाएगा।

अधिकांश मछुआरे छोटी नावों या टायर ट्यूब पर बैठकर मछली पकड़ते हैं। ऐसे में नदी में मगरमच्छों की बढ़ती संख्या उनके लिए गंभीर खतरा बन सकती है। मछुआरा संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर स्थिति को नियंत्रण में नहीं लाया गया, तो मछुआरों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

ओंकारेश्वर घाट पर मगरमच्छ की बढ़ती उपस्थिति

खंडवा जिले की तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में हाल ही में नर्मदा नदी के घाटों पर मगरमच्छ निकलने की घटनाएं बढ़ गई हैं। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में डर का माहौल बन गया है। बीते कुछ दिनों पहले ओंकारेश्वर घाट के किनारे एक मगरमच्छ का बच्चा देखा गया, जिससे वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।

घटना के समय नाविक मुकेश वर्मा ने सावधानी से मगरमच्छ के बच्चे को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर रख दिया। वन विभाग की टीम तुरंत घाट पर पहुंची और मगरमच्छ के बच्चे को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया। विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील भी की।

पिछले कुछ महीनों में ओंकारेश्वर घाट पर मगरमच्छ की बढ़ती संख्या ने स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में डर का माहौल बना दिया है। ऐसे में मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा नर्मदा में मगरमच्छों को छोड़ना मछुआरा संगठन और आम जनता के बीच चिंता का विषय बन गया है।

मुख्यमंत्री का दृष्टिकोण और सरकार की पहल

सीएम मोहन यादव का कहना है कि मगरमच्छ नर्मदा नदी के प्राकृतिक आवास में ही सुरक्षित रहेंगे। उनकी मंशा केवल जंगली जीवन संरक्षण और नदी में पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने की है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार नर्मदा नदी के किनारे सेंचुरी और अभयारण्य बनाने की योजना पर काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि मगरमच्छों के नदी में छोड़े जाने से मानव जीवन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। उनका मानना है कि नर्मदा की धारा और जल स्तर इन जीवों के लिए अनुकूल हैं और इससे नदी की पारिस्थितिकी को मजबूती मिलेगी।

मछुआरा संगठन का मुख्य विरोध

मछुआरा संगठन का मुख्य तर्क है कि नर्मदा में मगरमच्छों की संख्या बढ़ने से मछुआरों की सुरक्षा खतरे में है। संगठन ने चेतावनी दी कि इंदिरा सागर डैम और आसपास के जलक्षेत्र में काम करने वाले मछुआरे अब मगरमच्छों और घड़ियालों के हमले का शिकार हो सकते हैं।

मछुआरे छोटी नावों या तैरते टायर पर मछली पकड़ते हैं। ऐसे में मगरमच्छों की मौजूदगी उनके लिए गंभीर जोखिम है। संगठन ने सरकार से आग्रह किया है कि मछुआरों की सुरक्षा और नदी में मगरमच्छों की निगरानी के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

ओंकारेश्वर और नर्मदा घाटों की स्थिति

ओंकारेश्वर घाट पर हाल ही में मगरमच्छ की उपस्थिति ने स्थानीय लोगों में डर पैदा कर दिया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए नाविकों और वन विभाग की टीम सतर्क हैं। हाल के दिनों में कई छोटे मगरमच्छ नदी में देखे गए हैं।

वन विभाग ने लोगों से सावधानी और सतर्कता बनाए रखने का अनुरोध किया है। विभाग ने यह भी कहा कि मगरमच्छों के व्यवहार को ध्यान में रखते हुए लोग नदी में असुरक्षित रूप से प्रवेश न करें।

omkareshwar island hindi 1663939769

निष्कर्ष

CM मोहन यादव द्वारा नर्मदा नदी में मगरमच्छों को छोड़ना एक ऐतिहासिक और विवादित कदम है। जबकि सरकार का उद्देश्य वन्य जीवन संरक्षण और नदी पारिस्थितिकी का संतुलन है, मछुआरा संगठन और स्थानीय लोग इस कदम से चिंतित हैं।

मछुआरों की सुरक्षा, नदी में मगरमच्छों की निगरानी, और ओंकारेश्वर घाट पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा अब मुख्य मुद्दे बन गए हैं। भविष्य में राज्य सरकार को नर्मदा में मगरमच्छों के आवास और मछुआरों के हित के बीच संतुलन बनाने के लिए ठोस रणनीति अपनानी होगी।

यह घटना यह भी दर्शाती है कि खंडवा जिले, ओंकारेश्वर घाट, और इंदिरा सागर डैम का क्षेत्र वन्य जीवों के संरक्षण और स्थानीय जनता की सुरक्षा दोनों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp