लंदन से भारत आएगी ‘माँ वाग्देवी’ की मूर्ति? भोजशाला पर CM मोहन यादव का बड़ा बयान
हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का मुख्यमंत्री ने किया स्वागत
धार, 16 मई 2026।
मध्यप्रदेश के CM डॉ. मोहन यादव ने धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर आए हाईकोर्ट के हालिया फैसले का स्वागत किया है। इस फैसले में भोजशाला को संरक्षित स्मारक और माँ वाग्देवी की आराधना स्थली के रूप में मान्यता दिए जाने की बात सामने आई है। मुख्यमंत्री ने इस निर्णय को भारत की सांस्कृतिक विरासत, आस्था और ऐतिहासिक पहचान के सम्मान से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला निर्णय बताया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फैसला केवल एक कानूनी निर्णय नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक चेतना, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि ऐसे निर्णय समाज में विश्वास और सांस्कृतिक एकता को और अधिक मजबूत करते हैं।
भोजशाला की गरिमा अब ASI के संरक्षण में होगी और मजबूत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण और प्रबंधन में अब भोजशाला की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गरिमा और अधिक सुदृढ़ होगी।
उन्होंने कहा कि ASI की देखरेख में न केवल इस धरोहर का संरक्षण बेहतर तरीके से हो सकेगा, बल्कि इसके ऐतिहासिक महत्व को भी सही ढंग से संरक्षित और प्रदर्शित किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि श्रद्धालुओं को नियमों के अनुसार पूजा-अर्चना का अधिकार भी मिले, जिससे आस्था और संरक्षण दोनों के बीच संतुलन बना रहे।
माँ वाग्देवी की प्रतिमा को भारत लाने की चर्चा तेज
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में माँ वाग्देवी की मूल प्रतिमा को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत दिया। उन्होंने कहा कि यूनाइटेड किंगडम (UK) में स्थित माँ वाग्देवी की मूल प्रतिमा को भारत वापस लाने के संबंध में केंद्र सरकार को विचार करने का निर्देश दिया गया है।
उन्होंने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यदि यह प्रतिमा भारत वापस लाई जाती है तो यह न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय होगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में हर संभव प्रयास करेगी, ताकि माँ वाग्देवी की प्रतिमा को उसके मूल स्थान पर पुनः स्थापित किया जा सके।
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पुनर्स्थापन की दिशा में कदम
माँ वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाने की चर्चा केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक विषय नहीं है, बल्कि यह ऐतिहासिक पुनर्स्थापन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी धरोहरें किसी भी देश की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार इस दिशा में गंभीरता से कार्य करेगी और केंद्र सरकार के साथ समन्वय बनाकर आवश्यक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रयास भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पुनः स्थापित करने में सहायक होगा।
सामाजिक समरसता और भाईचारे पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश की संस्कृति हमेशा से “सर्वधर्म समभाव”, सामाजिक समरसता और भाईचारे की वाहक रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य किसी भी प्रकार के विभाजन या टकराव को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि समाज में सौहार्द और आपसी सम्मान की भावना को मजबूत करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार न्यायालय के निर्णय का पूर्ण सम्मान करती है और उसे लागू करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करेगी, जिससे प्रदेश में शांति और सांस्कृतिक संतुलन बना रहे।
न्यायालय के निर्णय को बताया ऐतिहासिक और स्वागतयोग्य
सीएम मोहन यादव ने कहा कि माननीय न्यायालय का यह निर्णय अत्यंत स्वागतयोग्य है और यह देश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षण देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस निर्णय के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और सभी संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।
धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक संरक्षण के बीच संतुलन
सरकार के इस पूरे दृष्टिकोण में धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की कोशिश दिखाई देती है। भोजशाला जैसे ऐतिहासिक स्थल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वे भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का भी हिस्सा हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे स्थलों का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है।
भोजशाला को लेकर बढ़ी जनभावनाएं
फैसले के बाद भोजशाला को लेकर स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर जनभावनाएं भी तेज हो गई हैं। कई लोग इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के रूप में देख रहे हैं।
धार क्षेत्र में इस फैसले के बाद उत्साह का माहौल देखा जा रहा है और लोगों में उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में इस स्थल का महत्व और अधिक बढ़ेगा।
केंद्र और राज्य के समन्वय से आगे की प्रक्रिया
माँ वाग्देवी की प्रतिमा को भारत लाने की प्रक्रिया में केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय की आवश्यकता होगी। विदेशों में स्थित ऐतिहासिक मूर्तियों और धरोहरों को वापस लाना एक जटिल और लंबी प्रक्रिया होती है, जिसमें कानूनी, कूटनीतिक और सांस्कृतिक पहलू शामिल होते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार इस दिशा में पूरी सक्रियता से कार्य करेगी और आवश्यक सहयोग केंद्र सरकार को प्रदान करेगी।
निष्कर्ष
भोजशाला को लेकर आए हाईकोर्ट के फैसले और माँ वाग्देवी की प्रतिमा को भारत लाने की संभावनाओं ने पूरे मध्यप्रदेश में एक नई सांस्कृतिक और ऐतिहासिक चर्चा को जन्म दिया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह बयान स्पष्ट करता है कि राज्य सरकार न केवल सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि उन्हें पुनर्स्थापित करने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाते हैं और कैसे माँ वाग्देवी की यह ऐतिहासिक प्रतिमा अपने मूल स्थान पर वापस स्थापित हो पाती है।
