मुख्यमंत्री मोहन यादव से संतों की मुलाकात नहीं होने पर अशोकनगर के संतों ने 5 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार और सिंहस्थ कुंभ के बहिष्कार का अभियान शुरू किया।
मुख्यमंत्री से मिलने भोपाल पहुंचे संत
मुख्यमंत्री मोहन यादव से संतों की मुलाकात को लेकर अशोकनगर से संत प्रतिनिधिमंडल भोपाल पहुंचा। राष्ट्रीय संत सुरक्षा समिति के नेतृत्व में संत समाज ने मुख्यमंत्री से समय लेकर अपनी पांच प्रमुख मांगों पर चर्चा करने का प्रयास किया। 23 जुलाई को मुख्यमंत्री निवास पर मुख्यमंत्री कार्यालय के ओएसडी को पांच सूत्रीय मांगों वाला ज्ञापन सौंपा गया तथा एक सप्ताह के भीतर मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय देने का अनुरोध किया गया।
हालांकि संत प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से मुलाकात के लिए कोई समय नहीं दिया गया, जिससे संत समाज में गहरी नाराजगी व्याप्त हो गई।
पांच सूत्रीय मांगों वाला ज्ञापन
मुख्यमंत्री मोहन यादव से संतों की मुलाकात नहीं होने के बाद संतों ने कहा कि उनकी पांच प्रमुख मांगें लंबे समय से लंबित हैं।मुख्य मांगों में शामिल हैं—
- गौमाता की सुरक्षा
- मंदिरों एवं पुजारियों को संरक्षण
- संत समाज का सम्मान
- गौशालाओं की प्रभावी व्यवस्था
- धार्मिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान
संत समाज का कहना है कि सरकार इन मांगों पर गंभीरता से निर्णय ले।
मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं होने पर आंदोलन तेज
संत प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि मुलाकात नहीं होने से नाराज होकर 4 जुलाई को धरना देने का निर्णय लिया गया तथा 5 जुलाई को विशाल संत सभा आयोजित करने की तैयारी थी।इसके लिए भोपाल के रविंद्र भवन की बुकिंग भी की गई थी, लेकिन कार्यक्रम निरस्त हो गया।इसके बाद संत समाज ने मुख्यमंत्री आवास घेराव का निर्णय लिया। जब संत मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़े तो पुलिस प्रशासन ने उन्हें रोक लिया। मौके पर तीन थाना क्षेत्रों का पुलिस बल तथा डीएसपी मौजूद रहे।पुलिस अधिकारियों ने संतों से ज्ञापन लेकर मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
सिंहस्थ कुंभ बहिष्कार की चेतावनी
मुख्यमंत्री मोहन यादव से संतों की मुलाकात नहीं होने पर संत समाज ने सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी।ज्ञापन में कहा गया है कि यदि एक सप्ताह के भीतर मुख्यमंत्री संत प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात नहीं करते हैं तो 4 अगस्त के बाद हजारों संत दोबारा मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे।साथ ही प्रदेशभर में सरकार तथा उज्जैन सिंहस्थ कुंभ के बहिष्कार का अभियान चलाया जाएगा।
दतिया उपचुनाव में भी आंदोलन
संत समाज ने स्पष्ट किया कि दतिया उपचुनाव में भी गौमाता, मंदिर और पुजारियों को न्याय दिलाने के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।संत समाज के अनुसार प्रदेशभर के संत दतिया पहुंचकर आंदोलन को समर्थन देंगे।
राष्ट्रीय संत सुरक्षा समिति के नेतृत्व में बड़ा प्रदर्शन
राष्ट्रीय संत सुरक्षा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य देवमुरारी बापू के नेतृत्व में अनेक संत और सामाजिक संगठनों ने आंदोलन में भाग लिया।इनमें प्रमुख रूप से—
- सनातन सेना
- अखंड रघुवंशी समाज
- पुजारी संघ
- वाल्मीकि समाज
- बौद्ध समाज
- नेपाल ग्रुप
- भवानी संघ
- मुस्लिम समाज
सहित करीब 10 सामाजिक संगठन शामिल रहे।
विभिन्न राजनीतिक दलों का समर्थन
आंदोलन में कई राजनीतिक दलों के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।इनमें प्रमुख हैं—
- कांग्रेस
- समाजवादी पार्टी
- सपाक्स पार्टी
- भगवा पार्टी
- परिवर्तन पार्टी ऑफ इंडिया
- लोकतांत्रिक अभिनव पार्टी
- संपूर्ण समाज पार्टी
संत समाज का कहना है कि यह केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक न्याय का भी मुद्दा है।
पशुधन मंत्री लखन पटेल से मुलाकात
आचार्य देवमुरारी बापू ने पशुधन मंत्री लखन पटेल को ज्ञापन सौंपते हुए प्रदेश में आवारा गौवंश की समस्या उठाई।उन्होंने पूछा कि प्रदेशभर में लाखों गौमाता सड़कों पर क्यों बैठी हैं।इस पर मंत्री ने बताया कि प्रदेश में स्वावलंबी गौशालाओं की योजना पर कार्य चल रहा है तथा धीरे-धीरे सड़कों पर मौजूद गौवंश को गौशालाओं में भेजने का प्रयास किया जाएगा।
आगे की रणनीति
संत समाज ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री मोहन यादव से संतों की मुलाकात शीघ्र नहीं होती है तो—
- मुख्यमंत्री आवास घेराव
- जिला स्तर पर आंदोलन
- सिंहस्थ कुंभ बहिष्कार अभियान
- जनजागरण यात्रा
- दतिया उपचुनाव में सक्रिय भागीदारी
जैसे कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री मोहन यादव से संतों की मुलाकात नहीं होने के बाद संत समाज ने आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया है। संत प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि जब तक उनकी पांच सूत्रीय मांगों पर सरकार सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक विरोध जारी रहेगा। आगामी दिनों में यह आंदोलन प्रदेश की राजनीति और धार्मिक संगठनों के लिए महत्वपूर्ण विषय बन सकता है।

