“विधायक तो हमारी सुनते ही नहीं”: CM का रास्ता रोक बच्चों ने की खेल के मैदान की डिमांड, मुख्यमंत्री ने लिया फौरन एक्शन
अशोकनगर, 26 जनवरी 2026: मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के मढ़ी गांव में मंगलवार को एक दिलचस्प घटना सामने आई जब CM मोहन यादव का काफिला बच्चों द्वारा रास्ते में रोक लिया गया। यह बच्चे अपने गांव में खेल के मैदान की मांग कर रहे थे। बच्चों ने CM से शिकायत की कि उनके गांव में क्रिकेट और अन्य खेलों के लिए कोई मैदान नहीं है और जिस जगह पर पहले मैदान था, वहां अब अतिक्रमण कर लिया गया है।
यह घटना CM के दौरे के दौरान हुई, जब वह गांव के पंचायत भवन में ग्रामीणों से चर्चा कर रहे थे। जैसे ही बैठक समाप्त हुई, कुछ युवा खिलाड़ियों ने सीएम का रास्ता रोक लिया और अपनी समस्या बताई। इस मौके पर सीएम ने तुरंत बच्चों की बातों को गंभीरता से लिया और अधिकारियों को फौरन मैदान बनाने के निर्देश दिए।
बच्चों ने किया सीएम से खेल के मैदान की मांग
CM मोहन यादव मढ़ी गांव के दौरे पर थे, जहां उन्होंने पंचायत भवन में ग्रामवासियों और पंचायती राज के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के बाद, जैसे ही सीएम बाहर आए, बच्चों ने उनका रास्ता रोक लिया। इन बच्चों ने सीएम से सीधे कह दिया कि उनके गांव में खेलने के लिए कोई मैदान नहीं है और वे क्रिकेट खेलना चाहते हैं।
बच्चों ने बताया कि जहां पहले खेल का मैदान था, वहां अब हेलीपैड बना दिया गया है और उस जगह पर अब अतिक्रमण हो गया है। इस पर सीएम ने बच्चों से पूछा कि “क्या वह मैदान अब भी वहां है?”, तो बच्चों ने जवाब दिया कि वह जगह अब बिल्कुल खाली नहीं है और खेल के लिए उपयुक्त नहीं रही।
बच्चों ने सीएम से आग्रह किया कि उन्हें क्रिकेट खेलने के लिए एक स्थायी मैदान की आवश्यकता है। सीएम ने बच्चों की बातों को गंभीरता से सुना और तुरंत अधिकारियों को इस मुद्दे पर एक्शन लेने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा, “यह हमारी जिम्मेदारी है कि बच्चों को अच्छे खेल के मैदान मुहैया कराएं।”
CM ने लिया तुरंत एक्शन
बच्चों की समस्याओं को सुनते हुए, सीएम मोहन यादव ने अधिकारियों को आदेश दिया कि खेल का मैदान जल्द से जल्द तैयार किया जाए। उन्होंने पंचायत से कहा कि इस पर कोई समझौता नहीं होगा और यह मुद्दा प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि खेल के मैदान बच्चों का अधिकार है, और यदि कहीं कोई जगह खाली है, तो उसे खेल के लिए समर्पित किया जाना चाहिए। इस दौरान, सीएम ने बच्चों से पूछा कि क्या वे क्रिकेट खेलने के लिए सिर्फ एक मैदान चाहते हैं या कुछ और। बच्चों ने बताया कि उन्हें सिर्फ एक खेल का मैदान चाहिए ताकि वे क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेल खेल सकें।
विधायक की शिकायत
जब CM ने बच्चों से पूछा कि क्या उनके गांव में विधायक से कोई मदद मिल सकती है, तो बच्चों ने जवाब दिया कि “विधायक जी तो हमारी बात ही नहीं सुनते।” यह सुनकर सीएम ने बच्चों से कहा, “ऐसा नहीं बोलते,” और बच्चों के सिर पर स्नेहपूर्वक हाथ फेरते हुए कहा कि “हम सबकी समस्याओं को हल करेंगे।” सीएम ने बच्चों से कहा, “आपकी आवाज़ को हम सुन रहे हैं और जल्द ही इस मुद्दे को हल करेंगे।”
इस पर बच्चों ने सीएम से कहा कि उन्हें स्टेडियम चाहिए, ताकि वे अपनी खेलकूद की गतिविधियों को बढ़ा सकें। इस पर सीएम ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “हर गांव में स्टेडियम नहीं बना सकते, लेकिन मैं वादा करता हूं कि हम आपके लिए मैदान जरूर बनवाएंगे।” यह वादा बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए काफी था।
मुख्यमंत्री का दृष्टिकोण
CM मोहन यादव ने इस घटना के बाद अपनी प्राथमिकताओं को साफ कर दिया कि वह राज्य में बच्चों और युवाओं के लिए खेल के मैदानों की उपलब्धता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को सही माहौल और सुविधाएं मिलनी चाहिए, ताकि वे अपनी खेलकूद की क्षमताओं को विकसित कर सकें और भविष्य में अपने देश का नाम रोशन कर सकें।
यह घटना लोकतंत्र की सशक्तता और जनता से जुड़ी सरकार की प्राथमिकताएं को स्पष्ट करती है। मुख्यमंत्री ने यह साबित कर दिया कि प्रशासन बच्चों और आम जनता की समस्याओं को सुनने के लिए हमेशा तैयार रहता है और उनकी समस्याओं को हल करने के लिए तत्पर है।
समाज के प्रति सीएम का दृष्टिकोण
सीएम ने यह भी कहा कि गांवों में खेल के मैदानों की कमी को समझते हुए, सरकार खेल और युवा कल्याण के क्षेत्र में कई योजनाएं लागू कर रही है, ताकि ग्रामीण इलाकों में बच्चों को बेहतर खेल सुविधाएं मिल सकें। उनका मानना है कि अगर बच्चों को अच्छी सुविधाएं मिलेंगी, तो वे न केवल शारीरिक रूप से फिट रहेंगे, बल्कि मानसिक और बौद्धिक विकास में भी मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि खेल के मैदानों की उपलब्धता सिर्फ बच्चों के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए जरूरी है, क्योंकि इससे न केवल बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास होता है, बल्कि यह समाज में एकता और समरसता को भी बढ़ावा देता है।
निष्कर्ष
यह घटना यह दिखाती है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव बच्चों और आम नागरिकों के प्रति अपनी संवेदनशीलता को पूरी तरह से समझते हैं। बच्चों की छोटी सी शिकायत पर सीएम का फौरन एक्शन और अधिकारियों को निर्देश देना यह दर्शाता है कि एक प्रभावी प्रशासन जनता के हर छोटे से छोटे मुद्दे को गंभीरता से लेता है और उसे हल करने के लिए तत्पर रहता है। इस वादे के साथ कि गांवों में खेल के मैदान बनेंगे, सीएम ने यह भी साबित किया कि उनका प्रशासन हर स्तर पर जनहित के लिए काम कर रहा है।

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