मध्यप्रदेश के CM डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को अचानक खरगोन जिले के कतरगांव गेहूं खरीदी केंद्र का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। बिना किसी पूर्व सूचना के हुए इस निरीक्षण से प्रशासनिक अमले में हलचल मच गई। मुख्यमंत्री ने केंद्र पर पहुंचकर सीधे किसानों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने किसानों के साथ बैठकर चाय भी पी और खरीदी व्यवस्था की जमीनी हकीकत को समझने की कोशिश की।
सीएम मोहन यादव ने एक दिन पहले ही संकेत दे दिया था कि वे किसी भी समय किसी भी खरीदी केंद्र पर पहुंच सकते हैं। इसी के तहत उन्होंने महेश्वर में रात्रि विश्राम के बाद सुबह अपने कार्यक्रम में बदलाव करते हुए बड़वाह मार्ग स्थित कतरगांव केंद्र का औचक निरीक्षण किया।
किसानों से सीधे सवाल, तौल और भुगतान की ली जानकारी
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने किसानों से सीधे पूछा कि क्या तौल में किसी प्रकार की गड़बड़ी हो रही है या नहीं। उन्होंने यह भी जानकारी ली कि किसानों को उनकी उपज का भुगतान समय पर मिल रहा है या नहीं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता किसानों को पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसानों की उपज का सही मूल्य और समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
50 प्रतिशत चमक विहीन गेहूं की भी होगी खरीदी
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए घोषणा की कि सरकार अब 50 प्रतिशत चमक विहीन गेहूं भी खरीदेगी। उन्होंने कहा कि किसानों को किसी भी स्थिति में परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि 10 प्रतिशत तक सूखे दाने और 6 प्रतिशत तक क्षतिग्रस्त दानों की भी खरीदी की जाएगी। इस निर्णय से उन किसानों को राहत मिलेगी जिनकी फसल मौसम या अन्य कारणों से प्रभावित हुई है।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने गेहूं का वजन भी खुद तुलवाकर देखा, ताकि व्यवस्था की पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
तौल में देरी नहीं होनी चाहिए: CM के सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री ने कलेक्टर भव्या मित्तल और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि उपज तौल में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्रों पर पर्याप्त पानी, छाया और बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सीएम ने कहा कि वे किसी भी समय किसी भी खरीद केंद्र पर पहुंच सकते हैं, इसलिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क और तैयार रहे। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
ट्रॉली पर चढ़कर किसानों से संवाद, बढ़ा आत्मीय जुड़ाव
इसी क्रम में शाजापुर जिले के मकोड़ी स्थित श्यामा वेयरहाउस में भी मुख्यमंत्री का अलग ही अंदाज देखने को मिला। यहां वे सीधे ट्रॉली पर चढ़कर किसानों से मिले और उनसे खरीदी व्यवस्था को लेकर बातचीत की।
किसानों ने मुख्यमंत्री के इस सहज और जमीनी जुड़ाव की सराहना की। कई किसानों ने अपनी समस्याएं सीधे मुख्यमंत्री के सामने रखीं, जिन्हें उन्होंने गंभीरता से सुना और समाधान का भरोसा दिलाया।
गेहूं खरीदी का बड़ा आंकड़ा और लक्ष्य
प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का कार्य तेजी से जारी है। अब तक 9.83 लाख किसानों ने स्लॉट बुक कर अपनी उपज बिक्री के लिए पंजीयन कराया है।
अब तक 5,08,657 किसानों से लगभग 22 लाख 70 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। वहीं, 4.74 लाख से अधिक किसानों का गेहूं या तो रिजेक्ट किया गया है या अभी खरीदी प्रक्रिया में है।
पिछले वर्ष राज्य में लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की गई थी। इस वर्ष सरकार ने 78 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य तय किया है, जिसे आगे बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।
किसानों के हित में पारदर्शिता और निगरानी पर जोर
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी से बचाना और पारदर्शी व्यवस्था देना है। उन्होंने कहा कि खरीदी केंद्रों पर किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की मेहनत का पूरा सम्मान किया जाएगा और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य समय पर दिया जाएगा।
निष्कर्ष
सीएम मोहन यादव का कतरगांव गेहूं खरीदी केंद्र का यह अचानक निरीक्षण न केवल प्रशासन के लिए सख्त संदेश है, बल्कि किसानों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को भी दर्शाता है। ट्रॉली पर चढ़कर किसानों से संवाद करने और चाय पर चर्चा करने जैसी पहल ने सरकार और किसानों के बीच भरोसे को और मजबूत किया है।
सरकार की नई नीतियों से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, खासकर चमक विहीन और आंशिक रूप से खराब गेहूं की खरीदी की अनुमति से। आने वाले दिनों में खरीदी व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने पर जोर दिया जाएगा।
