MP शैक्षिक गुणवत्ता शिक्षक सम्मेलन: CM डॉ. मोहन यादव ने अपनी शिक्षिका समेत शिक्षकों को किया सम्मानित
मध्यप्रदेश की शैक्षिक गुणवत्ता को नई दिशा देने और शिक्षकों के योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से राजधानी भोपाल के शासकीय सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय में आयोजित मध्यप्रदेश स्तरीय शैक्षिक गुणवत्ता शिक्षक सम्मेलन में CM डॉ. मोहन यादव शामिल हुए। इस अवसर पर CM ने अपने संबोधन में गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की पहचान विश्व पटल पर बनाने में शिक्षकों की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है। सम्मेलन का आयोजन शिक्षक संघ द्वारा किया गया था, जिसमें प्रदेशभर से आए शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान CM डॉ. मोहन यादव ने न केवल उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया, बल्कि उन्हें पढ़ाने वाली शिक्षिका को भी मंच पर सम्मान देकर गुरुजनों के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की। मुख्यमंत्री का यह भावुक क्षण कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा।
गुरु-शिष्य परंपरा भारत की पहचान
CM डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपरा गुरु-शिष्य संबंधों पर आधारित रही है। गुरुओं के मार्गदर्शन से ही शिष्य आगे बढ़ता है और जीवन में ऊंचाइयों को छूता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पढ़ाने का कार्य नहीं करता, बल्कि वह विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। CM ने कहा कि एक शिक्षक का प्रभाव केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह समाज और राष्ट्र निर्माण में भी अहम भूमिका निभाता है। यही कारण है कि सरकार शिक्षकों की गरिमा, सम्मान और सुविधाओं को लेकर गंभीरता से कार्य कर रही है।
प्रदर्शनी का उद्घाटन और अवलोकन
सम्मेलन में शामिल होने के बाद CM डॉ. मोहन यादव ने सबसे पहले शैक्षिक गुणवत्ता से जुड़ी प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी में शिक्षकों द्वारा नवाचार, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, डिजिटल एजुकेशन, स्मार्ट क्लास, और बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ाने वाले मॉडलों का प्रदर्शन किया गया था। CM ने प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए शिक्षकों से संवाद किया और उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के नवाचार ही शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और प्रभावी बनाते हैं।
शिक्षकों का सम्मान, भावुक हुए CM
सम्मेलन के दौरान CM डॉ. मोहन यादव ने मंच से कई शिक्षकों को सम्मानित किया। विशेष रूप से उस क्षण ने सभी को भावुक कर दिया, जब मुख्यमंत्री ने अपनी शिक्षिका को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि जीवन में जो कुछ भी सीखा है, उसकी नींव इन्हीं गुरुओं ने रखी है। CM ने कहा कि शिक्षक का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक अगर सशक्त होंगे, तो आने वाली पीढ़ियां भी सशक्त होंगी।
शिक्षा मंत्री भी रहे मौजूद
इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह भी CM के साथ मौजूद रहे। शिक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षकों को प्रशिक्षण, संसाधन और तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज की रीढ़ होते हैं और उनके सहयोग से ही शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
शिक्षक संघ ने किया CM का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान मध्यप्रदेश शिक्षक संघ की ओर से CM डॉ. मोहन यादव का भी सम्मान किया गया। शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री का शिक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और शिक्षकों के प्रति सम्मान, पूरे शिक्षक समुदाय के लिए प्रेरणादायक है। शिक्षक संघ ने सरकार से शिक्षकों की समस्याओं, पदोन्नति, वेतन विसंगति और शैक्षणिक संसाधनों को लेकर भी चर्चा की और मुख्यमंत्री ने इन मुद्दों पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
प्रदेशभर से पहुंचे शिक्षक
मध्यप्रदेश स्तरीय इस सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने को लेकर सुझाव दिए। सम्मेलन का उद्देश्य केवल सम्मान देना नहीं, बल्कि शिक्षकों के बीच संवाद और नवाचार को बढ़ावा देना भी रहा।
शिक्षा को नई दिशा देने का प्रयास
CM डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिले। इसके लिए शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में शिक्षा के क्षेत्र में और अधिक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। सम्मेलन का समापन राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए किया गया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि शिक्षक सम्मान और समर्थन के साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।
