MP में राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी का उद्घाटन
Bhopal : राजधानी Bhopal में आज राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी का भव्य उद्घाटन CM डॉ. मोहन यादव द्वारा किया गया। यह प्रदर्शनी रोज गार्डन में आयोजित की गई, जिसमें प्रदेशभर के फूलों के उत्पादक, किसान और उद्यानिकी प्रेमी शामिल हुए। CM ने इस अवसर पर न केवल प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, बल्कि किसानों को अनुदान राशि के चेक वितरित किए और उन्हें संबोधित भी किया। उन्होंने कहा कि फूल केवल सजावट का साधन नहीं हैं, बल्कि यह किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम भी बन चुके हैं।
CM ने जानकारी दी कि मध्यप्रदेश में आज लगभग 45,000 हेक्टेयर में फूलों की खेती हो रही है और इसमें करीब 45 हजार किसान जुड़े हैं। यह आंकड़ा राज्य में फूलों की खेती की बढ़ती लोकप्रियता और आर्थिक महत्व को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश फूलों के उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है और राज्य का फूल यहां तक कि लंदन तक निर्यात किया जा रहा है।
पुष्प खेती: किसानों की नई आमदनी
CM डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि फूलों की खेती से किसानों की आमदनी में वृद्धि हो रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में कृषि कल्याण वर्ष के अंतर्गत 16 विभागों को मिलाकर योजनाएं बनाई गई हैं, जिनमें भावांतर योजना के माध्यम से किसानों को बेहतर मूल्य सुनिश्चित किया जाता है। इससे किसानों को फायदा मिलता है और फूलों की खेती को बढ़ावा मिलता है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि फूल केवल सजावट का साधन नहीं हैं, बल्कि यह समाज और संस्कृति में अपनी एक अलग पहचान रखते हैं। उनका कहना था, “शरीर चाहे छूट जाए, लेकिन पुष्प हमेशा हमारे साथ रहते हैं। फूल भाव की भाषा बोलते हैं।” उन्होंने कहा कि अब फूलों की खेती न केवल आय का स्रोत बन रही है, बल्कि यह पर्यावरण और सौंदर्य संवर्धन में भी योगदान दे रही है।
प्रदर्शनी की अवधि और विस्तार
CM ने कार्यक्रम के दौरान यह घोषणा की कि राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी की अवधि को बढ़ाकर तीन दिन कर दिया गया है। पहले यह केवल एकदिवसीय आयोजन हुआ करता था। उन्होंने बताया कि आगे इसी तरह के कार्यक्रम जिलों में भी आयोजित किए जाएंगे। इससे किसानों को अपने उत्पाद को प्रदर्शित करने और नए खरीदारों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार बनने के बाद राज्य में पुष्प उद्यानिकी का क्षेत्र दोगुना हो गया है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदर्शनी का उद्देश्य न केवल फूलों का प्रदर्शन करना है, बल्कि यह किसानों और उद्यानिकी से जुड़े लोगों के लिए एक सीखने और नेटवर्क बनाने का मंच भी है।
सिंहस्थ 2028 में स्थानीय फूलों का इस्तेमाल
पुष्प प्रदर्शनी में उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने जानकारी दी कि आने वाले सिंहस्थ 2028 में बाहर से फूलों का इस्तेमाल नहीं होगा। उज्जैन में किसी भी समारोह या धार्मिक आयोजन के लिए केवल स्थानीय फूलों का ही प्रयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि उज्जैन में फूलों की खेती के लिए 100 एकड़ का विशेष क्लस्टर बनाया गया है। इससे स्थानीय किसानों को रोजगार मिलेगा और उनकी आमदनी बढ़ेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश की सभी धर्म नगरी में फूलों की खेती के लिए इसी तरह के क्लस्टर बनाए जाएंगे। इससे फूलों की मांग स्थानीय किसानों द्वारा पूरी होगी और प्रदेश का फूल बाहर नहीं जाएगा। यह योजना न केवल किसानों को लाभ पहुंचाएगी, बल्कि राज्य की उद्यानिकी को भी नई पहचान देगी।
फूलों का निर्यात और आर्थिक महत्व
CM ने बताया कि मध्यप्रदेश का फूल न केवल देश में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोकप्रिय हो रहा है। राज्य के फूलों का निर्यात लंदन तक किया जा रहा है। यह न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाता है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र की छवि को भी मजबूत करता है।
उन्होंने कहा कि फूलों की खेती अब पारंपरिक फसलों का विकल्प बन चुकी है और इसे आधुनिक कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार इस क्षेत्र में नई तकनीक, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है ताकि किसानों को बेहतर उत्पादन और लाभ मिल सके।
मुख्यमंत्री का किसानों से संवाद
पुष्प प्रदर्शनी के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से सीधे संवाद किया। उन्होंने फूलों की खेती में आने वाली कठिनाइयों, बाजार में मूल्य निर्धारण और नए प्रकार के फूलों के उत्पादन पर चर्चा की। किसानों ने अपनी समस्याएं साझा कीं और मुख्यमंत्री ने उन्हें संबंधित विभागों के माध्यम से समाधान दिलाने का आश्वासन दिया।
इस मौके पर कृषि मंत्री और उद्यानिकी मंत्री भी उपस्थित रहे। मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की विभिन्न योजनाएं जैसे कि भावांतर योजना, अनुदान, प्रशिक्षण कार्यक्रम और विपणन सहायता, फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए तैयार की गई हैं।
फूलों की खेती: पर्यावरण और सांस्कृतिक महत्व
CM ने फूलों की खेती के पर्यावरणीय महत्व को भी बताया। उन्होंने कहा कि फूलों की खेती से न केवल जमीन उपजाऊ रहती है, बल्कि यह पारिस्थितिकी तंत्र को भी संतुलित बनाए रखने में मदद करती है। फूलों से संबंधित व्यवसाय, जैसे कि गार्डनिंग, फ्लोरिस्ट उद्योग और डेकोरेशन, राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहे हैं।
साथ ही, फूलों का उपयोग धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भी होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि फूल समाज और संस्कृति की भाषा हैं और उनका महत्व सदियों से बना हुआ है। इस प्रदर्शनी के माध्यम से लोगों में उद्यानिकी और फूलों के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।
राज्य सरकार की योजनाओं का प्रचार
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत फूलों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण, बीज और उर्वरक उपलब्ध कराना, उत्पादन के बाद विपणन के अवसर प्रदान करना और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करना शामिल है।
उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शनी के जरिए न केवल स्थानीय फूलों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि युवा उद्यमियों को भी फूलों के व्यवसाय में निवेश करने का अवसर मिलेगा।
निष्कर्ष
राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी केवल एक प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि यह मध्यप्रदेश के किसानों, उद्यानिकी प्रेमियों और राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार फूलों की खेती को बढ़ावा दे रही है और इसे किसानों के लिए लाभकारी व्यवसाय में बदल रही है।
इस प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों को अनुदान, प्रशिक्षण और विपणन सहायता दी जा रही है। भविष्य में राज्य में अधिक पुष्प उद्यान विकसित किए जाएंगे, और राज्य का फूल न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाएगा। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर किसानों और जनता से अपील की कि वे फूलों की खेती में और अधिक योगदान दें और इस उद्योग को विकसित करने में सहयोग करें।
