पेयजल आपूर्ति में कोई कमी न रहे, जल जीवन मिशन 2028 से पहले होगा पूरा: CM Mohan Yadav
पेयजल आपूर्ति को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता
CM Mohan Yadav ने प्रदेश में पेयजल आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नागरिकों को पर्याप्त और निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बढ़ती गर्मी और जल की बढ़ती मांग को देखते हुए जलापूर्ति व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की जाए और जहां भी पानी की समस्या सामने आए, वहां तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर की जलापूर्ति योजनाओं और उनकी प्रगति का विस्तृत आकलन किया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल पेयजल उपलब्ध कराना नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण और नियमित जल पहुंचाना है।
जल संकट वाले क्षेत्रों में तत्काल कार्रवाई के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन क्षेत्रों में जल संकट की स्थिति बन रही है, वहां बिना देरी किए वैकल्पिक जल स्रोतों की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी गांव या शहर में पेयजल की कमी नहीं होनी चाहिए।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि विभाग द्वारा प्रदेशभर में पेयजल आपूर्ति की गहन मॉनिटरिंग की जा रही है। शिकायत मिलने पर तत्काल समाधान के लिए विशेष टीमें भी सक्रिय हैं, जिससे लोगों को समय पर राहत मिल सके।
मार्च 2028 से पहले पूरा होगा जल जीवन मिशन
बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती सम्पत्तिया उइके ने बताया कि प्रदेश में जल जीवन मिशन तेजी से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। अब तक मिशन का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और मार्च 2028 से पहले हर घर नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।
उन्होंने जानकारी दी कि उज्जैन संभाग सहित प्रदेश के 11 जिलों में जल जीवन मिशन का शत-प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इन जिलों में घर-घर नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जा चुके हैं और जलापूर्ति व्यवस्था नियमित रूप से संचालित की जा रही है।
उत्कृष्ट कार्य करने वाली ग्राम पंचायतों को मिलेगा सम्मान
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन ग्राम पंचायतों और गांवों ने नल-जल योजनाओं का बेहतर संचालन और रखरखाव किया है, उन्हें प्रोत्साहित और सम्मानित किया जाना चाहिए।
उनका मानना है कि जब स्थानीय समुदाय जल योजनाओं की जिम्मेदारी को समझते हुए सक्रिय भागीदारी निभाता है, तब योजनाओं की सफलता और स्थायित्व दोनों बढ़ते हैं। इससे अन्य ग्राम पंचायतों को भी बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी।
मध्यप्रदेश बना बोरवेल अधिनियम लागू करने वाला पहला राज्य
बैठक में मंत्री सम्पत्तिया उइके ने जानकारी दी कि खुले और असुरक्षित बोरवेलों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए मध्यप्रदेश में बोरवेल अधिनियम लागू किया गया है।
इस प्रकार का कानून बनाने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। इस कानून का उद्देश्य बोरवेल सुरक्षा सुनिश्चित करना और दुर्घटनाओं में कमी लाना है।
जल संरक्षण के लिए तालाब और सरोवर निर्माण पर जोर
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को केवल ट्यूबवेल और भूमिगत जल स्रोतों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने तालाब, सरोवर और अन्य जल संरचनाओं के निर्माण को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल स्रोत के रूप में तालाबों का उपयोग कई दृष्टियों से लाभकारी है। इससे वर्षा जल संग्रहण बढ़ता है, भूजल स्तर में सुधार होता है और जल पुनर्भरण की प्रक्रिया मजबूत होती है। साथ ही नल-जल योजनाओं के लिए स्थायी जल स्रोत भी उपलब्ध हो सकते हैं।
केंद्र से मिलेंगे 5 हजार करोड़ रुपये
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखें। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत मध्यप्रदेश को लगभग 5 हजार करोड़ रुपये का आवंटन प्राप्त होना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने इस राशि को जारी करने के लिए सहमति प्रदान की है। यह राशि प्रदेश में जलापूर्ति व्यवस्था और अधोसंरचना विकास को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
जल गंगा संवर्धन अभियान को मिलेगा नया विस्तार
मुख्यमंत्री ने जल गंगा संवर्धन अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि जल संरक्षण में योगदान देने वाले व्यक्तियों, संस्थाओं और ग्राम पंचायतों को राज्य एवं जिला स्तर पर सम्मानित किया जाए।
विभाग द्वारा वर्तमान में जल महोत्सव कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें नल-जल योजनाओं के संचालन और प्रबंधन में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया जाता है। मुख्यमंत्री ने इस कार्यक्रम को जल गंगा संवर्धन अभियान से जोड़ने और अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
1.11 करोड़ परिवारों तक पहुंचा नल का जल
प्रमुख सचिव मनीष सिंह ने बैठक में जानकारी दी कि प्रदेश में दिसंबर 2023 से अब तक 16.50 लाख से अधिक नए घरेलू नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इसके अलावा 15,238 नए नलकूप और हैंडपंप भी स्थापित किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 1 करोड़ 11 लाख से अधिक परिवारों को नल के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही 14,200 गांवों को ‘हर घर जल’ घोषित किया जा चुका है। कुल मिलाकर प्रदेश के लगभग 75 प्रतिशत परिवार जल जीवन मिशन के अंतर्गत कवर हो चुके हैं।
डिजिटल तकनीक से होगी जल योजनाओं की निगरानी
जल निगम के अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में जलापूर्ति व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
योजनाओं की निगरानी के लिए आईओटी आधारित सेंसर, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और ऑनलाइन ‘जल दर्पण’ पोर्टल जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। इन तकनीकों के माध्यम से जल वितरण, शिकायत निवारण और योजना संचालन की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकेगी।
सौर और पवन ऊर्जा से कम होगा संचालन खर्च
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि समूह ग्राम पेयजल योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव की लागत कम करने के लिए सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इससे बिजली खर्च में कमी आएगी और जलापूर्ति योजनाओं को दीर्घकालिक रूप से आर्थिक रूप से सक्षम बनाया जा सकेगा। विभाग का लक्ष्य जलापूर्ति व्यवस्था को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाना है।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश में हर घर तक स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को लेकर तेजी से कार्य कर रही है। जल जीवन मिशन की प्रगति, जल संरक्षण पर बढ़ता फोकस, आधुनिक तकनीकों का उपयोग और केंद्र सरकार से मिलने वाली वित्तीय सहायता इस दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों के अनुसार आने वाले वर्षों में प्रदेश की जलापूर्ति व्यवस्था को और अधिक मजबूत, पारदर्शी तथा टिकाऊ बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाए जाएंगे।
