सीएम मोहन यादव का बड़ा फैसला: दो जिलों की सीमाएं बदलीं, ओंकारेश्वर में बना नया अभयारण्य — प्रदेश को मिली 27वीं वन्यजीव सौगात
भोपाल | मध्य प्रदेश स्थापना दिवस 2025 पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य को एक ऐतिहासिक तोहफा दिया है।
1 नवंबर को प्रदेश के 70वें स्थापना दिवस के अवसर पर सीएम मोहन यादव ने ओंकारेश्वर अभयारण्य (Omkareshwar Sanctuary) के गठन की औपचारिक घोषणा की। यह राज्य का 27वां वन्यजीव अभयारण्य होगा। इस घोषणा के साथ ही खंडवा और देवास जिलों की सीमाओं में बड़ा बदलाव किया गया है, जिससे दोनों जिलों का भौगोलिक नक्शा नया रूप ले चुका है।
ओंकारेश्वर अभयारण्य: 611 वर्ग किलोमीटर में फैला नया ‘ग्रीन कॉरिडोर’
सरकार द्वारा स्वीकृत ओंकारेश्वर अभयारण्य लगभग 611 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला है।
इसमें नर्मदा नदी के बैकवॉटर में स्थित 52 प्राकृतिक द्वीपों (Islands) को भी शामिल किया गया है।
इन टापुओं का यह अनोखा समूह इस अभयारण्य को प्रदेश के अन्य अभयारण्यों से अलग और विशेष बनाता है।
राज्य सरकार के मुताबिक, यह क्षेत्र न केवल वन्यजीव संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि इको-टूरिज्म (Eco-Tourism) के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित होगा।
दो जिलों की सीमाओं में बदलाव: खंडवा और देवास के नक्शे में बड़ा परिवर्तन
ओंकारेश्वर अभयारण्य के गठन के साथ ही खंडवा और देवास जिलों की प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव किया गया है।
इस अभयारण्य के लिए दोनों जिलों के वन एवं राजस्व क्षेत्रों को पुनर्गठित किया गया है।
इस पुनर्गठन के बाद नया प्रशासनिक नक्शा तैयार किया गया है, जो राज्य के पर्यावरणीय संतुलन को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा — “यह निर्णय वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन दोनों के लिए ऐतिहासिक साबित होगा”
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने इस फैसले पर कहा,
“ओंकारेश्वर अभयारण्य का गठन मध्य प्रदेश की हरियाली, जैव विविधता और पर्यटन के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। यह निर्णय वन्यजीव संरक्षण, स्थानीय रोजगार और पर्यावरण संरक्षण तीनों को एक साथ सशक्त बनाएगा।”
सीएम ने कहा कि नर्मदा नदी के पवित्र तट पर स्थित ओंकारेश्वर का यह क्षेत्र प्राकृतिक और धार्मिक दोनों ही दृष्टियों से अत्यंत पवित्र है। यहां का विकास न केवल पर्यटन को गति देगा, बल्कि आसपास के ग्रामीण अंचलों के लिए भी नई आर्थिक संभावनाओं के द्वार खोलेगा।
वन्यजीव संरक्षण और बाघों के लिए सुरक्षित गलियारा बनेगा
वन विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, ओंकारेश्वर अभयारण्य के गठन से राज्य के बाघ (Tigers), तेंदुए (Leopards), चीतल, सांभर और अन्य प्रजातियों के लिए एक सुरक्षित गलियारा (Safe Corridor) तैयार होगा।
यह अभयारण्य सतपुड़ा और नर्मदा घाटी के वन क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगा, जिससे वन्यजीवों का प्राकृतिक आवागमन सुगम होगा।
पर्यावरण और रोजगार दोनों को मिलेगा बढ़ावा
ओंकारेश्वर अभयारण्य से स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।
सरकार की योजना है कि यहाँ ईको-टूरिज्म, होम-स्टे, गाइडिंग और हैंडीक्राफ्ट मार्केट के माध्यम से स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ा जाए।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि
“वन्यजीवों की रक्षा के साथ-साथ यह योजना ‘हर घर रोजगार’ के लक्ष्य को भी मजबूत करेगी। स्थानीय युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के मिशन में सहभागी बनाया जाएगा।”
ओंकारेश्वर — धार्मिक और प्राकृतिक धरोहर का संगम
ओंकारेश्वर, जहाँ भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक “ओंकारेश्वर महादेव” स्थित है, अब प्राकृतिक धरोहर के रूप में भी राज्य की पहचान बनेगा।
यहां की नर्मदा घाटी, घने जंगल, वन्यजीव और पवित्रता का संगम इस क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन और पर्यावरण पर्यटन दोनों के लिए केंद्र बिंदु बनाएगा।
विशेषज्ञों की राय: “यह प्रदेश का इको-टूरिज्म हब बनेगा”
पर्यावरणविदों का कहना है कि 52 द्वीपों को अभयारण्य का हिस्सा बनाए जाने से यह क्षेत्र मध्य प्रदेश का सबसे अनोखा वाइल्डलाइफ ज़ोन बनेगा।
यहां पर्यटकों को वाटर सफारी, नेचर ट्रेकिंग, बर्ड वॉचिंग, और कैंपिंग जैसी गतिविधियों का अनुभव मिलेगा।
वन्यजीव विशेषज्ञों ने बताया कि नर्मदा के जलाशय में स्थित ये द्वीप कई दुर्लभ पक्षियों और जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास हैं, जिनके संरक्षण से जैव विविधता को नया जीवन मिलेगा।
सरकार की योजना: बुनियादी ढांचे का होगा विकास
मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर पर्यटन और वन विभाग मिलकर यहां ईको-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करेंगे।
इसके तहत अगले दो वर्षों में:
- पर्यटक मार्गों का विस्तार,
- बोटिंग सुविधाएं,
- वन्यजीव व्यू पॉइंट्स,
- और पर्यावरण संरक्षण केंद्र (Eco-Education Center) स्थापित किए जाएंगे।
सरकार का लक्ष्य है कि 2027 तक ओंकारेश्वर अभयारण्य को देश के शीर्ष 10 इको-टूरिज्म स्थलों में शामिल किया जाए।
मुख्यमंत्री का विज़न: “हर जिले में हरियाली, हर गांव में अवसर”
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा,
“मध्य प्रदेश केवल तीर्थ और पर्यटन की धरती नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की मिसाल भी बनेगा। हमारा लक्ष्य है कि हर जिले में हरियाली और हर गांव में रोजगार के अवसर हों।”
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि वन्यजीव और मानव के बीच संतुलन बना रहे।
इसके लिए स्थानीय समुदायों को भी संरक्षण प्रयासों से जोड़ा जाएगा।
निष्कर्ष: मध्य प्रदेश को मिला नया पर्यावरणीय गौरव
ओंकारेश्वर अभयारण्य का गठन न केवल दो जिलों — खंडवा और देवास — की सीमाओं को नया स्वरूप देता है, बल्कि यह राज्य के लिए पर्यावरणीय, आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टि से एक ऐतिहासिक कदम है।
सीएम डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश अब “ग्रीन ग्रोथ मॉडल” की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जहाँ विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलेंगे।

