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MP में विश्वविद्यालयों में मंदिर प्रबंधन की पढ़ाई, CM,मोहन यादव ने की घोषणा

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Published On: 23 February 2026
CM
— “सीएम मोहन यादव ने एमपी के विश्वविद्यालयों में मंदिर प्रबंधन पाठ्यक्रम की घोषणा की, आस्था, पर्यटन और रोजगार को एक साथ जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम।”

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MP में विश्वविद्यालयों में मंदिर प्रबंधन की पढ़ाई, CM,मोहन यादव ने की घोषणा

मध्य प्रदेश धार्मिक पर्यटन और रोजगार के नए अवसरों का केंद्र बन रहा

मध्य प्रदेश के CM Mohan Yadav ने इंदौर में विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत करते हुए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। CM  ने कहा कि राज्य को आस्था और पर्यटन का बड़ा केंद्र बनाने के लिए कई योजनाओं पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि धार्मिक स्थलों का विकास न केवल श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराएगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगा।

CM मोहन यादव ने इंदौर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रदेश के धार्मिक स्थलों में लगातार विकास कार्य किए जा रहे हैं। उनका यह प्रयास यह सुनिश्चित करने के लिए है कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और स्थानीय व्यापार, होटल, परिवहन और रोजगार के क्षेत्र भी लाभान्वित हों।

प्रमुख तीर्थस्थलों का विकास

CM ने बताया कि चित्रकूट, सलकनपुर, महाकाल और ओंकारेश्वर जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों को व्यवस्थित और विकसित किया जा रहा है। इन स्थलों पर आधारभूत सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है, ताकि आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिले। विकास कार्यों में मंदिर परिसर की सुरक्षा, साफ-सफाई, पार्किंग, यातायात प्रबंधन और सुविधाजनक आवास शामिल हैं।

CM ने यह भी कहा कि धार्मिक पर्यटन केवल आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि इसे पेशेवर और व्यवस्थित तरीके से संचालित करने से आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि होती है। इसका सीधा लाभ स्थानीय व्यवसाय, होटल उद्योग और हस्तशिल्पकारों को मिलता है।

मंदिर प्रबंधन की पढ़ाई का आरंभ

CM मोहन यादव ने यह भी घोषणा की कि विश्वविद्यालयों में मंदिर प्रबंधन को एक विशेष विषय के रूप में शुरू किया जा रहा है। यह कदम धार्मिक पर्यटन और प्रशासन को पेशेवर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

इस पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को मंदिरों की प्रशासनिक व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन, सुरक्षा, धार्मिक पर्यटन, श्रद्धालु प्रबंधन और कार्यक्रम आयोजन से संबंधित पहलुओं की पढ़ाई कराई जाएगी। इस पहल के तहत उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय ने डिप्लोमा और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की शुरुआत की है। इन पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

CM ने कहा कि इस पहल से छात्रों को न केवल करियर के नए अवसर मिलेंगे, बल्कि प्रदेश के धार्मिक स्थलों का संचालन भी बेहतर और अधिक पेशेवर तरीके से होगा। यह कार्यक्रम धार्मिक पर्यटन को व्यवस्थित रूप से बढ़ावा देने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए रणनीतिक रूप से तैयार किया गया है।

धार्मिक कॉरिडोर का विकास

मंदिर प्रबंधन के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश के 13 प्रमुख तीर्थस्थलों पर धार्मिक कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। यह कॉरिडोर श्रद्धालुओं के आने-जाने, दर्शन और अन्य सुविधाओं को सरल और सुव्यवस्थित बनाने के लिए बनाए जा रहे हैं।

उज्जैन के महाकाल मंदिर परिसर में विशेष बदलाव किए जा रहे हैं। फाइबर की मूर्तियों की जगह पत्थर और धातु की प्रतिमाओं स्थापित की जा रही हैं। ये प्रतिमाएं स्थानीय कारीगरों द्वारा उज्जैन में ही तैयार की जा रही हैं, जिससे स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिल रहा है।

CM ने कहा कि इस तरह के विकास कार्यों से धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, स्थानीय हस्तशिल्प और होटल उद्योग को लाभ होगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

रोजगार और आर्थिक विकास

CM ने जोर देकर कहा कि मंदिरों और तीर्थस्थलों के विकास से सिर्फ आस्था ही नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधियां और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि धार्मिक पर्यटन, रोजगार और आर्थिक विकास को एक साथ जोड़कर मध्य प्रदेश को देश का प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र बनाया जाए।

युवाओं और शिक्षा पर प्रभाव

मंदिर प्रबंधन पाठ्यक्रम से युवाओं को नई करियर संभावनाएं मिलेंगी। विद्यार्थी न केवल प्रशासनिक और वित्तीय कौशल सीखेंगे, बल्कि धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए उच्च स्तर की सेवाओं को संचालित करना भी सीखेंगे।

इससे धार्मिक स्थलों का प्रबंधन अधिक पेशेवर होगा और प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र की गुणवत्ता में सुधार होगा। भविष्य में यह पाठ्यक्रम अन्य विश्वविद्यालयों में भी शुरू किया जा सकता है, जिससे प्रदेश में शिक्षा और रोजगार दोनों का विकास होगा।

निष्कर्ष

CM मोहन यादव की यह घोषणा मध्य प्रदेश को आस्था, पर्यटन और रोजगार का एक समेकित केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मंदिर प्रबंधन पाठ्यक्रम और धार्मिक स्थलों के विकास से प्रदेश के युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

धार्मिक कॉरिडोर, आधुनिक व्यवस्थाएं और पेशेवर प्रशासन से श्रद्धालुओं का अनुभव सुधरेगा। साथ ही, यह प्रयास मध्य प्रदेश को देशभर में एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में पहचान दिलाएगा।

मध्य प्रदेश सरकार का यह दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि आस्था और पर्यटन को साथ लेकर आर्थिक और सामाजिक विकास को भी सुनिश्चित किया जा सकता है।

 

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