Ajit Pawar के निधन के बाद NCP विलय पर घमासान,
महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ दिनों में एक गंभीर बदलाव देखने को मिला है। उपमुख्यमंत्री Ajit Pawar के 28 जनवरी 2026 को हुए दुखद विमान हादसे ने न सिर्फ उनके परिवार को बल्कि पूरे राजनीतिक परिदृश्य को झकझोर कर रख दिया। उनके निधन के बाद राज्य में कई राजनीतिक चर्चाओं ने जन्म लिया, जिनमें प्रमुख है एनसीपी (अजित पवार गुट) और एनसीपी (शरद पवार गुट) के विलय की योजना।
शरद पवार ने दावा किया कि दोनों गुटों को एक करने की प्रक्रिया पिछले चार महीनों से चल रही थी। उन्होंने कहा कि अजित पवार और उनके सहयोगी नेताओं के बीच 12 फरवरी 2026 को दोनों गुटों के विलय की आधिकारिक घोषणा होने वाली थी। वहीं, सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री बनने की जानकारी शरद पवार को नहीं थी।
शरद पवार का दावा और विलय की तैयारी
एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने बारामती में मीडिया से बातचीत में कहा कि Ajit Pawar और जयंत पाटिल के बीच दोनों गुटों को एक करने का संवाद लंबे समय से चल रहा था। उन्होंने बताया कि शशिकांत शिंदे, सुनील तटकरे और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ कई बैठकों में विलय की योजना पर चर्चा हुई थी।
शरद पवार ने स्पष्ट किया कि 12 फरवरी को विलय की घोषणा होनी थी, लेकिन 28 जनवरी को हुए विमान हादसे ने इस पूरी प्रक्रिया को प्रभावित कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अजित पवार के निधन के कारण सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया गया, लेकिन विलय की प्रक्रिया फिलहाल स्थगित हो गई है।
CM फडणवीस का रुख
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शरद पवार के दावे पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि अगर अजित पवार विलय जैसी कोई योजना अंतिम चरण में ले रहे होते, तो वे निश्चित रूप से उनसे साझा करते। फडणवीस ने कहा,
“अजित दादा और मेरे संबंध ऐसे थे कि वे हर महत्वपूर्ण बात मुझसे साझा करते थे। उनके निधन के एक दिन पहले भी हमने करीब एक घंटा बातचीत की थी। अगर विलय जैसी कोई बात अंतिम चरण में होती, तो वे मुझसे इसे जरूर साझा करते।”
उन्होंने आगे कहा कि किसी पार्टी का विलय करना उनकी आंतरिक प्रक्रिया है, लेकिन महायुति गठबंधन का हिस्सा होने के नाते ऐसी कोई बड़ी बात BJP से छिपाई नहीं जा सकती। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि एनसीपी का विलय करना या न करना पूरी तरह उनकी पार्टी का आंतरिक निर्णय है।
फडणवीस ने यह भी कहा कि बीजेपी हमेशा एनसीपी के फैसलों का सम्मान करती है। उन्होंने कहा,
“हम एनसीपी के साथ गठबंधन में हैं और उनके निर्णय के साथ खड़े रहना हमारी जिम्मेदारी है। चाहे पहले, अब या भविष्य में, एनसीपी के फैसलों के साथ हम खड़े रहेंगे।”
सुनेत्रा पवार को वित्त विभाग न मिलने का कारण
Ajit Pawar की पत्नी सुनेत्रा पवार शनिवार को महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लीं। हालांकि, उन्हें अजित पवार का संभाला हुआ वित्त एवं योजना विभाग नहीं दिया गया।
सीएम फडणवीस ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय सुनेत्रा पवार की वर्तमान स्थिति को देखते हुए लिया गया। उन्होंने कहा,
“सुनेत्रा पवार इस समय गहरे दुख और मानसिक पीड़ा से गुजर रही हैं। बजट पेश करना सिर्फ भाषण पढ़ना नहीं है, बल्कि इसमें बैठकों और गहन तैयारी की आवश्यकता होती है। इसलिए वित्त विभाग फिलहाल मेरे पास रखा गया है। बजट सत्र के बाद इसे फिर विचार किया जाएगा।”
इस निर्णय से यह संदेश भी गया कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों का बंटवारा संवेदनशील परिस्थितियों के अनुसार किया गया है।
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राजनीतिक हलचल और पारिवारिक बैठकों की भूमिका
Ajit Pawar के निधन के बाद राजनीतिक और पारिवारिक दोनों स्तरों पर सक्रिय चर्चाएं हुईं। उनके बेटे पार्थ पवार ने गोविंदबाग जाकर शरद पवार से मुलाकात की। इस दौरान सुप्रिया सुले और रोहित पवार भी मौजूद थे।
हालांकि राजनीतिक हलकों में चर्चा यह भी है कि सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री बनने के बाद विलय की बातचीत फिलहाल ठंडी पड़ गई है। शरद पवार चार दिन बाद मुंबई लौटे, जबकि उनका मुंबई में कोई निर्धारित कार्यक्रम नहीं था। उनके परिवार के सदस्य और राजनीतिक नेतृत्व भविष्य की रणनीति पर विचार कर रहे हैं।
सुनेत्रा पवार ने भी उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद देर रात अपने गृह नगर बारामती लौट आईं। उन्होंने फिलहाल किसी विधानमंडल सीट से चुनाव लड़ने की योजना नहीं बनाई है, लेकिन उनके चुनाव की संभावना पर राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं।
महायुति गठबंधन और राजनीतिक स्थिरता
सीएम फडणवीस ने स्पष्ट किया कि भाजपा, एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना और एनसीपी (अजित पवार गुट) महायुति गठबंधन के घटक दल हैं। इस गठबंधन की स्थिरता को बनाए रखना हर दल की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि एनसीपी के आंतरिक फैसलों का सम्मान करते हुए भी गठबंधन की स्थिरता सुनिश्चित करना जरूरी है।
फडणवीस ने कहा,
“एनसीपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में आगे बढ़ने का निर्णय लिया है। हमें उनके सुझाए किसी भी नाम या फैसले में कभी कोई समस्या नहीं थी और आगे भी नहीं होगी।”
निष्कर्ष
Ajit Pawar के दुखद निधन ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा बदलाव ला दिया है। उनके निधन से न केवल उनके परिवार को गहरा दुख पहुंचा है, बल्कि एनसीपी के दोनों गुटों के विलय और सुनेत्रा पवार की भूमिका पर भी नए सवाल उठे हैं।
शरद पवार और अन्य वरिष्ठ नेताओं के प्रयासों के बावजूद, विलय की प्रक्रिया फिलहाल ठंडी पड़ गई है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि बीजेपी हमेशा गठबंधन के फैसलों का समर्थन करती रहेगी।
सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री बनने से राजनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का बंटवारा संवेदनशील परिस्थितियों के अनुसार किया गया है। भविष्य में यह देखना होगा कि एनसीपी का विलय कब और कैसे पूरा होगा और महायुति गठबंधन की स्थिरता किस प्रकार बनी रहती है।
यह हादसा और उसके बाद की राजनीतिक हलचल महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहेगी।
