CM डॉ. मोहन यादव ने क्षमता संवर्धन कार्यशाला का शुभारंभ किया
“लोक निर्माण से लोक कल्याण” की दिशा में मध्यप्रदेश ने उठाया सशक्त कदम
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य में अधोसंरचना विकास को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। प्रदेश के यशस्वी CM डॉ. मोहन यादव ने क्षमता संवर्धन कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम और PMS 2.0 (Project Management System) के शुभारंभ अवसर पर कहा कि अब राज्य में चल रहे निर्माण कार्य केवल ईंट और सीमेंट तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि जनसेवा और सार्वजनिक कल्याण के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित किए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हर परियोजना केवल एक भवन नहीं, बल्कि जनता की अपेक्षाओं और विश्वास का प्रतीक है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल सिर्फ भौतिक अधोसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य अधिकारियों, इंजीनियरों और कर्मचारियों में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाना है। इस दिशा में PMS 2.0 जैसे डिजिटल उपकरण और प्रशिक्षण कार्यक्रम एक क्रांतिकारी कदम साबित होंगे।
MPBDC की सराहना और प्रगति
मुख्यमंत्री ने Madhya Pradesh Building Development Corporation (MPBDC) की कार्यप्रणाली की खुले तौर पर सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से MPBDC के प्रबंध संचालक सी. बी. चक्रवर्ती सहित पूरी टीम को बधाई दी और उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
MPBDC द्वारा स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रशासनिक, खेल और अन्य शासकीय क्षेत्रों के लिए उच्च गुणवत्ता और सुरक्षित भवनों का निर्माण किया जा रहा है। वर्तमान में लगभग ₹9,800 करोड़ की लागत से 371 भवनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इनमें विभिन्न विभागों के प्रोजेक्ट शामिल हैं:
- स्कूल शिक्षा विभाग: 52 परियोजनाएँ
- जनजातीय कार्य विभाग: 50 परियोजनाएँ
- स्वास्थ्य विभाग: 66 परियोजनाएँ
- उच्च शिक्षा विभाग: 129 परियोजनाएँ
- राजस्व विभाग: 43 परियोजनाएँ
- खेल विभाग: 28 परियोजनाएँ
- अन्य विभाग: 48 परियोजनाएँ
राजस्व विभाग के अंतर्गत भोपाल में 43 तहसील और 6 जिला कार्यालयों का निर्माण कार्य जारी है। इसके अतिरिक्त रीवा और उज्जैन में अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेज भवनों का निर्माण भी तेजी से प्रगति पर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से न केवल प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ेगी, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा।

तकनीक आधारित पारदर्शिता और दक्षता
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार गुणवत्ता, समयबद्धता और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए डिजिटल उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है।
- डिजिटल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम (PMS 2.0): परियोजनाओं की प्रगति और लागत का डिजिटल ट्रैक रिकॉर्ड
- ड्रोन मॉनिटरिंग: निर्माण स्थलों की वास्तविक समय में निगरानी
- ई-टेंडरिंग: पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया
- थर्ड पार्टी क्वालिटी कंट्रोल (SQC): परियोजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र एजेंसियों का सहयोग
इस तकनीक आधारित मॉनिटरिंग से कार्यों की गति बढ़ी है और लागत-प्रभावी निष्पादन सुनिश्चित हुआ है।
विभागीय टीम और नेतृत्व
लोक निर्माण विभाग के मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि विभाग आधुनिक तकनीकों को अपनाकर निर्माण कार्यों को अधिक परिणामोन्मुख बना रहा है। उन्होंने बताया कि गुणवत्ता नियंत्रण और डिजिटल मॉनिटरिंग के माध्यम से प्रत्येक परियोजना को उत्कृष्टता का मानक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम में प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह झामरे, उज्जैन के Dr. विक्रांत सिंह तोमर, भरत यादव और ,KPS राणा और ENC अजय श्रीवास्तव सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों और इंजीनियरों की टीम भावना और समर्पण की खुले तौर पर प्रशंसा की और कहा कि यही विकास का वास्तविक आधार है।
क्षमता संवर्धन कार्यशाला का महत्व
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में गीता के उपदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्म, समर्पण और उत्कृष्टता की भावना से ही सफलता प्राप्त होती है। उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे अपने कार्य को केवल दायित्व न मानें, बल्कि जनसेवा का अवसर समझें।
क्षमता संवर्धन कार्यशाला का उद्देश्य अधिकारियों और इंजीनियरों को:
- नवीनतम तकनीकों से परिचित कराना
- उन्नत गुणवत्ता मानकों की जानकारी देना
- सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के सिद्धांतों से जोड़ना
इससे विभागीय कार्यसंस्कृति में सकारात्मक परिवर्तन आएगा और जवाबदेही की भावना सुदृढ़ होगी।
ग्रीन बिल्डिंग और सतत विकास
MPBDC पर्यावरण अनुकूल निर्माण पद्धतियों और ग्रीन बिल्डिंग अवधारणा को भी बढ़ावा दे रहा है। इसमें ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल राज्य को सतत विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। प्रत्येक परियोजना में नवाचार, गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण के तत्व शामिल हैं, जिससे मध्यप्रदेश का विकास सतत, सुरक्षित और समृद्ध बन सके।
PMS 2.0 का प्रभाव
PMS 2.0 (Project Management System) के शुभारंभ से सभी निर्माण परियोजनाओं में डिजिटल ट्रैकिंग और समयबद्धता सुनिश्चित होगी। इससे:
- परियोजनाओं की निगरानी और नियंत्रण अधिक प्रभावी होगा
- लागत और समय में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी
- अधिकारियों और इंजीनियरों की जवाबदेही बढ़ेगी
- प्रत्येक निर्माण कार्य उत्कृष्टता का प्रतीक बनेगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि PMS 2.0 सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि विकास और जवाबदेही का नया युग है।
विकास, विश्वास और उत्कृष्टता
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अब अधोसंरचना विकास के नए युग में प्रवेश कर रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल भवन निर्माण नहीं, बल्कि जनविश्वास और सेवा का निर्माण है।
MPBDC के प्रबंध संचालक सी. बी. चक्रवर्ती के नेतृत्व में निगम ने गुणवत्ता नियंत्रण, डिजिटल मॉनिटरिंग और समयबद्ध निष्पादन को संस्थागत रूप दिया है। उनकी कार्यशैली और नवाचार आधारित दृष्टिकोण ने निगम को प्रदेश के अधोसंरचना विकास का सशक्त स्तंभ बना दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “लोक निर्माण से लोक कल्याण” का यह संकल्प मध्यप्रदेश को विकास, पारदर्शिता और उत्कृष्टता की दिशा में निरंतर अग्रसर कर रहा है।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनकी टीम के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में अधोसंरचना विकास की नई कहानी लिखी जा रही है। यह पहल:
- प्रदेश में आधुनिक, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भवन निर्माण को बढ़ावा देगी
- अधिकारियों और इंजीनियरों में क्षमता, दक्षता और जवाबदेही बढ़ाएगी
- सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच में सुधार करेगी
- पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को सुनिश्चित करेगी
यह परियोजनाएँ मध्यप्रदेश को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी। MPBDC – विकास, विश्वास और उत्कृष्टता का प्रतीक बनकर प्रदेश की अधोसंरचना विकास यात्रा में एक नए युग की शुरुआत कर रहा है।
