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“सीएम मोहन यादव का ऐलान: मध्यप्रदेश में 900 ई-बसें शुरू, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, भोपाल और इंदौर में हरित और स्मार्ट परिवहन की नई शुरुआत”

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Published On: 15 October 2025
MP News 58

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सीएम मोहन यादव का बड़ा ऐलान: मध्यप्रदेश में दौड़ेंगी 900 ई-बसें, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, भोपाल और इंदौर से होगी शुरुआत


भोपाल/इंदौर, 15 अक्टूबर 2025:
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेशवासियों के लिए बड़ी खुशखबरी दी है। मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि जल्द ही मध्यप्रदेश में कुल 900 इलेक्ट्रिक बसें (ई-बस) दौड़ने लगेंगी। इन बसों का संचालन प्रमुख नगर निगम क्षेत्रों ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, भोपाल और इंदौर में किया जाएगा।

ई-बसों की शुरुआत से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि शहरों में वायु प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि बसों के संचालन से पहले आवश्यक चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएँ।


एमपी में ई-बसें: टेंडर और संचालन की जानकारी

जानकारी के अनुसार, ई-बसों की टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कुल 900 बसों में से 500 बसों का टेंडर अभी बाकी है, जबकि शेष बसों के लिए टेंडर पूरी तरह जारी किए जा चुके हैं।
नगर विकास विभाग के अनुसार, भारत सरकार ने कुल 972 ई-बसें मध्यप्रदेश के नगर निकायों को देने का निर्णय लिया है। पहले स्लॉट में 500 बसें दी जानी थीं, जिनमें से 472 ई-बसों के लिए भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ने टेंडर जारी कर दिए हैं।

यह टेंडर प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि ई-बसें समय पर शहरों में दौड़ने लगें और नागरिकों को आधुनिक, सुरक्षित और हरित परिवहन की सुविधा मिल सके।


ई-बसों की क्षमता और प्रकार

एमपी में चलने वाली ई-बसें दो प्रकार की होंगी:

  1. मिडी ई-बस – 26 सीटों के साथ।

  2. मिनी ई-बस – 21 सीटों के साथ।

इन बसों में यात्रियों के लिए आरामदायक बैठने की व्यवस्था, सुरक्षित यात्रा के उपाय और आधुनिक सुविधाएं मौजूद होंगी। नई ई-बसें शहरों के प्रदूषण को कम करने के लिए भी अहम योगदान देंगी।


दूसरे चरण की तैयारी: अन्य शहरों में ई-बसें

पहले चरण के सफल संचालन के बाद सागर, देवास और सतना नगर निगमों में भी ई-बसें उपलब्ध कराई जाएंगी।
नगर निगमों के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे डिपो का स्थान निर्धारित करें और टेंडर प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करें, ताकि बसों का संचालन जल्दी शुरू किया जा सके।

इस योजना से न केवल शहरों में हरित परिवहन बढ़ेगा, बल्कि नागरिकों को आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव भी मिलेगा।


ई-बस योजना: पर्यावरण और स्मार्ट सिटी पहल

एमपी में ई-बसों का संचालन हरित परिवहन (Green Transport) के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह पहल स्मार्ट सिटी और ग्रीन सिटी योजनाओं के अनुरूप है।

ई-बसों से:

  • वायु प्रदूषण में कमी आएगी।

  • यात्री सुविधाओं में सुधार होगा।

  • शहरों में सार्वजनिक परिवहन का आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प उपलब्ध होगा।


प्रमुख शहरों में ई-बस योजना

भोपाल और इंदौर: पहले से चल रही ई-बसें अब बढ़ाई जाएँगी।
ग्वालियर और जबलपुर: नई ई-बसें जल्द ही नगर निगम क्षेत्रों में परिचालित होंगी।
उज्जैन: पर्यावरण और यात्री सुविधा को ध्यान में रखते हुए ई-बसों का संचालन।

दूसरे चरण में सागर, देवास और सतना में ई-बसें संचालित होंगी। इस तरह मध्यप्रदेश के प्रमुख 8 शहरों में हरित परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।


सीएम मोहन यादव के निर्देश और सरकार की पहल

मुख्यमंत्री ने सभी नगर निगमों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ई-बसों का संचालन सुचारू रूप से शुरू किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना के माध्यम से:

  • शहरों में साफ-सुथरा परिवहन उपलब्ध होगा।

  • यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।

  • हरित शहर और स्मार्ट शहर की दिशा में प्रदेश का विकास तेज होगा।


निष्कर्ष

मध्यप्रदेश में 900 ई-बसों का संचालन राज्यवासियों के लिए एक बड़ी सुविधा और पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। यह पहल न केवल शहरों में प्रदूषण कम करने में मदद करेगी, बल्कि यात्रियों को आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव भी प्रदान करेगी।

मुख्य लाभ:

  • शहरों में वायु प्रदूषण में कमी।
  • स्मार्ट सिटी और ग्रीन सिटी पहल को बल।
  • यात्रियों के लिए सुरक्षित और आरामदायक सार्वजनिक परिवहन।
  • मध्यप्रदेश के प्रमुख 8 शहरों में आधुनिक ई-बस सेवा।

मध्यप्रदेश की इस योजना से राज्यवासियों के लिए सुलभ, हरित और सुरक्षित परिवहन का नया युग शुरू होने जा रहा है।

Highlights:

  • मध्यप्रदेश में 900 नई ई-बसों का संचालन होगा।
  • शुरुआत पांच प्रमुख शहरों: ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, भोपाल और इंदौर से।
  • मिडी और मिनी ई-बसें, यात्रियों के लिए आरामदायक और सुरक्षित।
  • शहरों में प्रदूषण कम करने और हरित परिवहन को बढ़ावा।
  • भारत सरकार की सहायता से कुल 972 ई-बसें प्रदेश के नगर निगमों में।
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