अपनी ही सरकार से ‘मंत्री जी’ की नाराजगी… मुख्यमंत्री के आने से पहले ही कार्यक्रम से हुए रवाना
इंदौर में बुधवार को हुए एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। Jalud में आयोजित सोलर प्लांट लोकार्पण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, लेकिन अपने ही विभाग से जुड़े इस महत्वपूर्ण आयोजन में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की गैरमौजूदगी ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पहुंचे, मंत्री रहे नदारद
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ प्रदेश के कई बड़े नेता और अधिकारी उपस्थित थे। यह आयोजन नगरीय प्रशासन विभाग से जुड़ा हुआ था, ऐसे में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की उपस्थिति स्वाभाविक मानी जा रही थी, लेकिन वे कार्यक्रम में नजर नहीं आए।
सूत्रों के अनुसार, मंत्री विजयवर्गीय उस समय इंदौर में ही मौजूद थे, इसके बावजूद उन्होंने कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी। उनकी इस अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दिया है।
सूचना व्यवस्था पर उठे सवाल
बताया जा रहा है कि मंत्री को कार्यक्रम की सूचना देने के तरीके और समय को लेकर भी असंतोष था। इसी वजह से उन्होंने कार्यक्रम में शामिल न होने का फैसला लिया। हालांकि इस बारे में आधिकारिक तौर पर कोई बयान सामने नहीं आया है, लेकिन चर्चा है कि सूचना व्यवस्था को लेकर उनकी नाराजगी रही।
पुराना वीडियो फिर आया चर्चा में
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सोशल मीडिया पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक पुराना वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वे कहते नजर आते हैं कि “मैं तो टेम्परेरी मंत्री हूं, कभी भी भूतपूर्व मंत्री हो सकता हूं।”
अब इस वीडियो को मौजूदा घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है और राजनीतिक हलकों में इसे लेकर तरह-तरह की व्याख्याएं की जा रही हैं।
पहले भी सामने आ चुकी है दूरी की घटनाएं
यह पहली बार नहीं है जब कैलाश विजयवर्गीय की किसी सरकारी कार्यक्रम या बैठक से दूरी चर्चा का विषय बनी हो। इससे पहले भी कुछ अवसरों पर उनकी अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठ चुके हैं।
भाजपा के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जब वे कार्यक्रम में मौजूद थे लेकिन मुख्यमंत्री के आगमन से पहले ही वहां से चले गए थे।
कैबिनेट बैठकों में भी अनुपस्थिति पर चर्चा
कई बार कैबिनेट बैठकों में उनकी अनुपस्थिति को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि पार्टी स्तर पर इस पर कभी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह मुद्दा समय-समय पर उठता रहा है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
जलूद कार्यक्रम के बाद इस पूरे मामले ने राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है। कुछ लोग इसे प्रशासनिक असंतोष से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे केवल संयोग बता रहे हैं।
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। समर्थक इसे गलत तरीके से पेश किया गया मामला बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे सरकार के भीतर असहमति के संकेत के रूप में देख रहा है।
कांग्रेस ने भी साधा निशाना
कांग्रेस ने इस मामले को लेकर सरकार पर तंज कसा है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह सरकार के भीतर समन्वय की कमी को दर्शाता है। हालांकि भाजपा की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
निष्कर्ष
कैलाश विजयवर्गीय की इस अनुपस्थिति ने भले ही एक सामान्य प्रशासनिक कार्यक्रम को राजनीतिक चर्चा का विषय बना दिया हो, लेकिन फिलहाल इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। यह नाराजगी थी, प्रशासनिक असंतोष या केवल एक सामान्य अनुपस्थिति—इस पर अभी भी सियासी अटकलें जारी हैं।
