लिपिक कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा दो सूत्रीय ज्ञापन
मंत्रालयीन कर्मचारियों के समान वेतनमान देने और अनुकंपा नियुक्ति में सीपीसीटी की बाध्यता समाप्त करने की मांग
दैनिक स्वराज वाणी
कोमल अहिरवार, जिला ब्यूरो चीफ
दमोह। मध्यप्रदेश लिपिक वर्गीय कर्मचारी संघ के प्रांतीय आह्वान एवं पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत शनिवार, 12 सितंबर को दमोह जिले के लिपिक वर्गीय कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम दो सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने जिले के जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन मुख्यमंत्री तक पहुंचाते हुए मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की।
ज्ञापन में लिपिक कर्मचारियों की वेतन विसंगति दूर कर उन्हें मंत्रालयीन लिपिक कर्मचारियों के समान वेतनमान का लाभ देने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। इसके अतिरिक्त अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में सीपीसीटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग भी की गई। कर्मचारियों का कहना है कि इन विषयों को लेकर वे लंबे समय से शासन का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
मंत्रालयीन कर्मचारियों के समान वेतनमान की मांग
लिपिक कर्मचारी संघ ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की कि विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत लिपिक वर्गीय कर्मचारियों की वेतन संबंधी विसंगतियों को दूर किया जाए। उन्हें मंत्रालय में कार्यरत लिपिक कर्मचारियों के समान वेतनमान और उससे संबंधित सुविधाओं का लाभ प्रदान किया जाए।
कर्मचारियों के अनुसार समान प्रकृति का कार्य और जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद वेतनमान में अंतर होने से उनमें असंतोष की स्थिति बनी हुई है। कर्मचारियों का कहना है कि सरकारी विभागों की प्रशासनिक व्यवस्था के संचालन में लिपिक वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कार्यालयीन अभिलेखों के संधारण, पत्राचार, स्थापना, लेखा और विभिन्न योजनाओं से संबंधित कार्यों के क्रियान्वयन में लिपिक कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। इसके बाद भी वेतन विसंगति के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अनुकंपा नियुक्ति में सीपीसीटी की बाध्यता हटाने की मांग
ज्ञापन में अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में सीपीसीटी की अनिवार्यता समाप्त करने का मुद्दा भी उठाया गया। कर्मचारियों ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य दिवंगत शासकीय कर्मचारी के आश्रित परिवार को संकट की स्थिति में तत्काल आर्थिक सहारा देना होता है। ऐसे मामलों में सीपीसीटी की अनिवार्यता के कारण पात्र आश्रितों को नियुक्ति प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
संघ ने शासन से आग्रह किया कि अनुकंपा नियुक्ति की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सीपीसीटी संबंधी बाध्यता को समाप्त किया जाए, ताकि प्रभावित परिवारों को समय पर नियुक्ति और आर्थिक सहायता मिल सके। कर्मचारियों ने इस विषय पर व्यावहारिक तथा संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।
जनप्रतिनिधियों को सौंपा गया ज्ञापन
लिपिक कर्मचारियों ने अपना ज्ञापन संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार धर्मेंद्र सिंह लोधी, आनंद विभाग के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार लखन पटेल, दमोह विधायक जयंत कुमार मलैया और हटा विधायक उमादेवी खटीक को सौंपा। इसके साथ ही दमोह कलेक्टर के माध्यम से भी मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन प्रेषित किया गया।
कर्मचारियों ने जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे उनकी मांगों को राज्य सरकार के समक्ष प्रभावी रूप से रखें और समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक पहल करें। ज्ञापन सौंपने पहुंचे कर्मचारियों ने कहा कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और इनका सीधा संबंध कर्मचारियों तथा उनके परिवारों की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति से है।
लंबे समय से मांग उठा रहे कर्मचारी
लिपिक कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों और सदस्यों ने बताया कि वेतन विसंगति सहित विभिन्न समस्याओं को लेकर समय-समय पर शासन को अवगत कराया जाता रहा है। कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से अपनी मांगें सरकार के समक्ष रखी हैं। इसके बावजूद अपेक्षित निर्णय नहीं होने से लिपिक कर्मचारियों में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है।
कर्मचारियों ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी और उचित निर्णय लेकर उन्हें राहत प्रदान करेगी। उनका कहना है कि वेतन विसंगति दूर होने से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और वे अधिक उत्साह एवं समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।
ज्ञापन कार्यक्रम के समापन पर लिपिक कर्मचारी संघ दमोह ने कार्यक्रम में शामिल सभी लिपिक कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। संघ ने मांगों के समर्थन में एकजुटता बनाए रखने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात शासन तक पहुंचाने के लिए सभी कर्मचारियों का धन्यवाद किया।
