सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद CJP की चेतावनी, छात्रों पर कार्रवाई हुई तो फिर शुरू होगा बड़ा आंदोलन
अभिजीत दीपके ने सरकार से की छात्रों को परेशान न करने की अपील, FIR वापस लेने की मांग
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) ने छात्रों और प्रदर्शनकारियों को लेकर अपना रुख सख्त कर लिया है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शन में शामिल छात्रों को पुलिस कार्रवाई या किसी अन्य तरीके से निशाना बनाया गया, तो संगठन दोबारा बड़े स्तर पर शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू कर सकता है।
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि छात्रों को परेशान करना बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि प्रदर्शन में शामिल युवाओं के खिलाफ किसी भी तरह की प्रताड़ना या दबाव की कार्रवाई न की जाए।
छात्रों को लेकर CJP ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
CJP नेता सौरव दास ने भी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि छात्रों से किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया, तो संगठन के पास देशव्यापी आंदोलन फिर से शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
संगठन का कहना है कि 25 जुलाई को सरकार की ओर से मिले आश्वासन और भरोसे के आधार पर ही विरोध प्रदर्शन समाप्त किया गया था। अब CJP को आशंका है कि मौजूदा कानूनी प्रक्रिया के जरिए प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर कार्रवाई जारी रह सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश पर जताई चिंता
CJP ने सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के कुछ बिंदुओं को लेकर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि आदेश में मौजूदा FIR और जांच प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दिए जाने से प्रदर्शनकारियों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
CJP का दावा है कि यह स्थिति उन आश्वासनों के विपरीत है, जिनके आधार पर छात्रों और युवाओं ने आंदोलन समाप्त किया था।
आश्वासन के बाद खत्म किया गया था आंदोलन
सौरव दास ने कहा कि सरकार की ओर से मिले भरोसे के बाद ही CJP ने आंदोलन वापस लिया था। संगठन का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध करने वाले छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
CJP ने आरोप लगाया है कि यदि प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को आगे बढ़ाया गया तो इससे युवाओं के बीच असंतोष बढ़ सकता है।
सरकारी पक्ष के रुख पर भी उठाए सवाल
CJP ने अदालत में सरकारी वकीलों के रवैये पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि सरकार को पहले से हुए समझौते और बातचीत की जानकारी थी, इसके बावजूद अंतरिम आदेश के दौरान इस मुद्दे को प्रभावी तरीके से नहीं रखा गया।
पार्टी ने कहा कि छात्रों और युवाओं के हितों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है।
FIR वापस लेने की मांग
CJP ने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की है कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR की समीक्षा कर उन्हें वापस लिया जाए। इसके अलावा संगठन ने युवाओं को भविष्य में किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा देने की मांग भी की है।
CJP का कहना है कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट के सामने अपने पूर्व आश्वासनों की जानकारी देनी चाहिए, ताकि पूरे मामले में स्पष्टता बनी रहे।
CJP का दावा- सरकार के पास अभी भी कार्रवाई रोकने का अधिकार
CJP नेताओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश में ऐसा कोई निर्देश नहीं है जो सरकारों को मामलों की समीक्षा करने या FIR वापस लेने से रोकता हो।
संगठन का कहना है कि यदि सरकार चाहे तो कानूनी प्रक्रिया के तहत मामलों पर निर्णय ले सकती है और इसे अदालत के आदेश का हवाला देकर टाला नहीं जाना चाहिए।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो दोबारा सड़क पर उतरने की चेतावनी
CJP ने कहा है कि सरकार को छात्रों और युवाओं से किए गए वादों को पूरा करना चाहिए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो शांतिपूर्ण आंदोलन दोबारा शुरू किया जा सकता है।
फिलहाल इस पूरे मामले में आगे की स्थिति सरकार के रुख, न्यायिक प्रक्रिया और संबंधित पक्षों की अगली कार्रवाई पर निर्भर करेगी।
(नोट: यह रिपोर्ट CJP प्रतिनिधियों द्वारा किए गए दावों और बयानों पर आधारित है। मामले से जुड़े कानूनी और प्रशासनिक घटनाक्रम समय के साथ बदल सकते हैं।)
