China Gold Reserve: क्या दुनिया का सारा सोना खरीद लेगा चीन? लगातार 22वें महीने बढ़ाया गोल्ड रिजर्व
अगस्त 2026 में पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने खरीदा करीब 20.2 टन सोना, रिकॉर्ड कीमतों के बावजूद जारी रखी खरीदारी
बिजनेस डेस्क। चीन के केंद्रीय बैंक ने लगातार 22वें महीने अपने स्वर्ण भंडार में बढ़ोतरी की है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने अगस्त 2026 में करीब 6.50 लाख ट्रॉय औंस यानी लगभग 20.2 टन सोना खरीदा। यह अक्टूबर 2023 के बाद चीन की ओर से किसी एक महीने में की गई सबसे बड़ी आधिकारिक सोने की खरीद बताई जा रही है।
इस खरीदारी के बाद चीन का आधिकारिक स्वर्ण भंडार जुलाई के 7.608 करोड़ ट्रॉय औंस से बढ़कर अगस्त के अंत में 7.673 करोड़ ट्रॉय औंस हो गया। टन में देखें तो चीन के पास अब लगभग 2,387 टन आधिकारिक सोना होने का अनुमान है।
चीन की इस खरीदारी ने इसलिए भी बाजार का ध्यान खींचा है, क्योंकि अगस्त में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। महंगे भाव के बावजूद चीन ने खरीद की रफ्तार कम करने के बजाय जुलाई के बराबर लगभग 20 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा।
22 महीने से लगातार सोना खरीद रहा चीन
पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना की सोना खरीदने की मौजूदा श्रृंखला नवंबर 2024 के आसपास शुरू हुई थी। इसके बाद से केंद्रीय बैंक ने लगातार 22 महीनों तक अपने आधिकारिक स्वर्ण भंडार में बढ़ोतरी दर्ज की है।
जुलाई 2026 में चीन ने करीब 20 टन सोना खरीदा था। इसके साथ उसकी लगातार खरीदारी का क्रम 21 महीने तक पहुंच गया था। अगस्त में करीब 20.2 टन की नई खरीद के बाद यह सिलसिला 22 महीने का हो गया।
अगस्त की खरीदारी अक्टूबर 2023 के बाद सबसे बड़ी मासिक वृद्धि रही। चीन ने वर्ष 2026 के शुरुआती आठ महीनों में करीब 80 टन सोना अपने आधिकारिक भंडार में शामिल किया है। अगस्त के अंत में उसके स्वर्ण भंडार का कुल आकार करीब 2,387 टन हो गया। इसी रुझान की पुष्टि करते हैं।
क्या वास्तव में दुनिया का सारा सोना खरीद सकता है चीन?
चीन की लगातार खरीदारी को देखते हुए यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या वह दुनिया में उपलब्ध सोने का बड़ा हिस्सा अपने नियंत्रण में लेने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, वास्तविकता में चीन का दुनिया का पूरा सोना खरीद लेना संभव नहीं है।
दुनिया में केंद्रीय बैंकों, सरकारों, निवेशकों, ज्वेलरी बाजार और निजी संस्थानों के पास भारी मात्रा में सोना मौजूद है। चीन की मौजूदा आधिकारिक हिस्सेदारी इस पूरे भंडार का छोटा भाग है। चीन के पास दुनिया का छठा सबसे बड़ा घोषित सरकारी स्वर्ण भंडार बताया गया है।
जुलाई तक चीन के आधिकारिक विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगभग आठ प्रतिशत थी। इसका अर्थ है कि चीन के पास विशाल मात्रा में विदेशी मुद्रा और अन्य वित्तीय संपत्तियां भी मौजूद हैं। विश्व स्वर्ण परिषद के अनुसार, जुलाई में चीन के पास 2,366 टन आधिकारिक सोना था और वह घोषित भंडार के आधार पर दुनिया में छठे स्थान पर था। में इसका विवरण उपलब्ध है।
चीन क्यों बढ़ा रहा है अपना गोल्ड रिजर्व?
किसी देश का केंद्रीय बैंक कई कारणों से सोने का भंडार बढ़ाता है। सोने को ऐसी संपत्ति माना जाता है, जिस पर किसी अन्य देश की सरकार या केंद्रीय बैंक की प्रत्यक्ष देनदारी नहीं होती। आर्थिक अनिश्चितता, मुद्रा में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के समय यह रिजर्व पोर्टफोलियो को संतुलित करने में मदद कर सकता है।
चीन के पास दुनिया का सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार है। इसका बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्राओं और सरकारी प्रतिभूतियों में निवेशित है। सोने की खरीद से चीन अपने रिजर्व को अलग-अलग संपत्तियों में बांटकर किसी एक मुद्रा या बाजार पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर सकता है।
अमेरिका और चीन के बीच व्यापार तथा रणनीतिक तनाव भी इस नीति का एक संभावित कारण माना जाता है। डॉलर आधारित वित्तीय व्यवस्था में किसी तरह का जोखिम बढ़ने पर सोना केंद्रीय बैंक को वैकल्पिक सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
डॉलर पर निर्भरता कम करने की रणनीति?
चीन लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अपनी मुद्रा युआन का इस्तेमाल बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। सोने का बड़ा भंडार किसी देश की मुद्रा और आर्थिक विश्वसनीयता को मनोवैज्ञानिक समर्थन दे सकता है।
हालांकि, केवल सोना खरीदने से डॉलर का वैश्विक प्रभाव समाप्त नहीं हो जाता। डॉलर अभी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार, कर्ज, कमोडिटी मूल्य निर्धारण और केंद्रीय बैंक रिजर्व की प्रमुख मुद्रा बना हुआ है। चीन की सोना खरीद को डॉलर से तत्काल दूरी के बजाय रिजर्व में विविधता लाने की दीर्घकालीन रणनीति के रूप में देखना अधिक उचित होगा।
रिकॉर्ड कीमत पर भी क्यों जारी है खरीद?
आमतौर पर कीमतों में तेज उछाल आने पर खरीदार खरीदारी धीमी कर देते हैं। इसके विपरीत चीन ने अगस्त में सोने की कीमत लगभग 10 प्रतिशत बढ़ने के बावजूद अपनी खरीद जारी रखी।
इससे की खरीदारी बताती है कि पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना का लक्ष्य अल्पकालीन लाभ कमाना नहीं, बल्कि दीर्घकालीन रिजर्व तैयार करना हो सकता है। केंद्रीय बैंक आम निवेशक की तरह रोजाना कीमत देखकर फैसला नहीं करते। उनकी खरीद नीतियां कई वर्षों की आर्थिक, मुद्रा और राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के आधार पर बनती हैं।
अगस्त में खरीद और कीमतों में वृद्धि के कारण चीन के स्वर्ण भंडार का अनुमानित मूल्य जुलाई के करीब 306.35 अरब डॉलर से बढ़कर अगस्त में लगभग 350.08 अरब डॉलर पहुंच गया। यह बढ़ोतरी केवल नए सोने की खरीद से नहीं, बल्कि पहले से मौजूद भंडार के बाजार मूल्य में वृद्धि से भी हुई।
केवल चीन ही नहीं, अन्य देश भी खरीद रहे सोना
वैश्विक स्तर पर कई केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडार को बढ़ा रहे हैं। पोलैंड, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और चेक गणराज्य जैसे देशों ने भी हाल के वर्षों में सोने की खरीद की है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के 2026 के सर्वे में 89 प्रतिशत केंद्रीय बैंक उत्तरदाताओं ने उम्मीद जताई थी कि अगले 12 महीनों में वैश्विक आधिकारिक स्वर्ण भंडार बढ़ेगा। रिकॉर्ड 45 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने अपने स्वयं के रिजर्व में भी बढ़ोतरी की संभावना जताई। इस व्यापक रुझान को दिखाता है।
इसका मतलब यह है कि सोने की मौजूदा मांग केवल चीन के कारण नहीं है। वैश्विक महंगाई, युद्ध, व्यापारिक तनाव, सरकारी कर्ज और मुद्रा जोखिम ने कई केंद्रीय बैंकों को सोने की ओर आकर्षित किया है।
सोने की कीमतों पर क्या होगा असर?
केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद से सोने को दीर्घकालीन मांग का समर्थन मिल सकता है। चीन जैसे बड़े खरीदार की खरीदारी बाजार की धारणा को भी प्रभावित करती है। इसके बावजूद सोने की कीमत केवल केंद्रीय बैंक की खरीद से तय नहीं होती।
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