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चीन की NEO ब्रेन चिप को मिली मंजूरी, लकवाग्रस्त मरीजों को विचारों से उपकरण नियंत्रित करने में मिलेगी मदद

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Published On: 8 June 2026
NEO

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चीन की NEO ब्रेन चिप को मिली मंजूरी, लकवाग्रस्त मरीजों के लिए तकनीक की दुनिया में नई उम्मीद

ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस की दौड़ में चीन का बड़ा कदम

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, न्यूरोसाइंस और हेल्थ टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है। हाल के वर्षों में ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) तकनीक को लेकर सबसे अधिक चर्चा अमेरिकी कंपनी Neuralink की रही है, जिसकी स्थापना एलन मस्क ने की है। हालांकि अब चीन ने इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी पहली व्यावसायिक ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस प्रणाली NEO को मंजूरी दे दी है।

यह मंजूरी केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे स्वास्थ्य सेवाओं और पुनर्वास चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई क्रांति के रूप में देखा जा रहा है। NEO को विशेष रूप से उन मरीजों की सहायता के लिए विकसित किया गया है जो लकवे, रीढ़ की चोट या अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के कारण सामान्य शारीरिक गतिविधियां करने में असमर्थ हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक व्यापक स्तर पर सफल होती है, तो लाखों मरीजों के जीवन में बड़ा बदलाव आ सकता है।

क्या है ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस तकनीक?

ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) एक ऐसी तकनीक है जो मानव मस्तिष्क और किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के बीच सीधा संपर्क स्थापित करती है।

सामान्य परिस्थितियों में हमारा मस्तिष्क शरीर के विभिन्न अंगों को संकेत भेजता है। ये संकेत नसों के माध्यम से हाथ-पैरों और अन्य अंगों तक पहुंचते हैं। लेकिन जब किसी दुर्घटना, बीमारी या रीढ़ की हड्डी की चोट के कारण यह संपर्क टूट जाता है, तब व्यक्ति लकवाग्रस्त हो सकता है।

BCI तकनीक मस्तिष्क से निकलने वाले संकेतों को सीधे पढ़कर उन्हें कंप्यूटर या मशीन के लिए उपयोगी कमांड में बदल देती है। इस प्रकार व्यक्ति बिना हाथ-पैर हिलाए केवल अपने विचारों के माध्यम से किसी उपकरण को नियंत्रित कर सकता है।

NEO ब्रेन चिप का विकास कैसे हुआ?

NEO ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस को चीन की न्यूरोटेक्नोलॉजी कंपनी Neuracle Technology ने विकसित किया है। इस परियोजना में देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान Tsinghua University का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

कई वर्षों के शोध, परीक्षण और तकनीकी विकास के बाद इस प्रणाली को व्यावसायिक उपयोग के लिए तैयार किया गया। मार्च 2026 में चीन के राष्ट्रीय चिकित्सा नियामक प्राधिकरण ने इसे मंजूरी प्रदान की।

यह मंजूरी दर्शाती है कि तकनीक ने सुरक्षा, प्रभावशीलता और चिकित्सा उपयोगिता के आवश्यक मानकों को पूरा किया है।

NEO अन्य ब्रेन चिप्स से कैसे अलग है?

NEO की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कम आक्रामक (Less Invasive) तकनीक है।

दुनिया की कई ब्रेन चिप तकनीकों में मस्तिष्क के भीतर इलेक्ट्रोड प्रत्यारोपित करने पड़ते हैं। यह प्रक्रिया जटिल सर्जरी की मांग करती है और इसमें कई जोखिम भी शामिल होते हैं।

इसके विपरीत NEO में आठ सेंसर लगाए जाते हैं जो मस्तिष्क की सुरक्षात्मक परत ड्यूरा मैटर के ऊपर स्थापित किए जाते हैं।

इसका लाभ यह है कि:

  • मस्तिष्क ऊतक को नुकसान पहुंचने की संभावना कम होती है।
  • रक्तस्राव का जोखिम घटता है।
  • संक्रमण की संभावना कम होती है।
  • रिकवरी अवधि अपेक्षाकृत छोटी हो सकती है।
  • मरीजों के लिए सर्जरी कम जटिल बन जाती है।

इसी वजह से विशेषज्ञ NEO को व्यावहारिक और सुरक्षित विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

NEO कैसे काम करती है?

NEO प्रणाली में लगे सेंसर मस्तिष्क की गतिविधियों को रिकॉर्ड करते हैं।

जब कोई व्यक्ति हाथ हिलाने, वस्तु पकड़ने या किसी कार्य को करने के बारे में सोचता है, तब मस्तिष्क विशेष विद्युत संकेत उत्पन्न करता है। सेंसर इन संकेतों को पकड़ लेते हैं।

इसके बाद:

  1. संकेत कंप्यूटर तक भेजे जाते हैं।
  2. कंप्यूटर उन्हें डिजिटल डेटा में बदलता है।
  3. एल्गोरिद्म इन संकेतों का विश्लेषण करते हैं।
  4. प्राप्त कमांड रोबोटिक उपकरणों तक पहुंचती है।
  5. उपकरण इच्छित गतिविधि को पूरा करते हैं।

इस प्रकार मरीज अपने विचारों के माध्यम से मशीनों को नियंत्रित कर सकता है।

लकवाग्रस्त मरीजों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह तकनीक?

दुनिया भर में करोड़ों लोग ऐसी स्थितियों से प्रभावित हैं जिनमें वे सामान्य रूप से चल-फिर नहीं सकते।

रीढ़ की हड्डी की चोट, स्ट्रोक, न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग और गंभीर दुर्घटनाएं अक्सर मरीजों की स्वतंत्रता छीन लेती हैं।

ऐसे लोगों के लिए NEO जैसी तकनीक कई स्तरों पर मददगार हो सकती है।

संभावित लाभ

  • हाथों की सीमित गतिविधि वापस पाना
  • वस्तुओं को पकड़ने में सहायता
  • कंप्यूटर का उपयोग करना
  • व्हीलचेयर नियंत्रित करना
  • रोबोटिक उपकरण संचालित करना
  • दैनिक जीवन की गतिविधियों में आत्मनिर्भरता बढ़ाना

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

Dong Hui का मामला क्यों चर्चा में है?

NEO तकनीक के शुरुआती परीक्षणों में शामिल 39 वर्षीय Dong Hui का मामला दुनिया भर में चर्चा का विषय बना।

करीब छह वर्ष पहले एक सड़क दुर्घटना में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दुर्घटना के बाद वे गर्दन से नीचे तक लकवाग्रस्त हो गए।

लंबे उपचार और पुनर्वास के बावजूद उनकी शारीरिक गतिविधियां काफी सीमित थीं।

2024 में उन्हें NEO परीक्षण कार्यक्रम में शामिल किया गया। सर्जरी और प्रशिक्षण के बाद उन्होंने धीरे-धीरे तकनीक का उपयोग करना शुरू किया।

रिपोर्ट्स के अनुसार अक्टूबर 2025 में वे पहली बार पेन पकड़कर अपना नाम लिखने में सफल हुए।

यह उपलब्धि केवल उनके लिए ही नहीं बल्कि पूरे BCI उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी गई।

पुनर्वास चिकित्सा में नई संभावनाएं

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि BCI तकनीक पुनर्वास के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।

अब तक पुनर्वास मुख्य रूप से फिजियोथेरेपी, दवाओं और सहायक उपकरणों पर निर्भर था।

लेकिन BCI तकनीक मस्तिष्क और मशीन के बीच सीधा संपर्क स्थापित कर नई संभावनाएं खोल रही है।

भविष्य में यह तकनीक:

  • रोबोटिक हाथ नियंत्रित कर सकती है
  • कृत्रिम अंगों को संचालित कर सकती है
  • लकवाग्रस्त मरीजों की गतिशीलता बढ़ा सकती है
  • संचार क्षमता बहाल कर सकती है

AI के साथ BCI का संयोजन

NEO को मंजूरी मिलने के बाद चीन की कई तकनीकी कंपनियां इसे AI के साथ जोड़ने पर काम कर रही हैं।

AI मस्तिष्क संकेतों को अधिक सटीकता से समझने में मदद कर सकता है।

उदाहरण के लिए यदि किसी मरीज के मस्तिष्क से प्राप्त संकेत अस्पष्ट हैं, तो AI उन्हें पहचानकर सही कमांड में बदल सकता है।

इससे:

  • प्रतिक्रिया समय कम होगा
  • सटीकता बढ़ेगी
  • उपकरणों का नियंत्रण आसान होगा
  • मरीजों का अनुभव बेहतर होगा

विचारों से कंप्यूटर नियंत्रित करने के प्रयोग

शंघाई स्थित NeuroXess कंपनी ने हाल ही में ऐसे परीक्षण किए हैं जिनमें लकवाग्रस्त मरीज केवल अपने विचारों के माध्यम से कंप्यूटर कर्सर को नियंत्रित करने में सफल रहे।

मरीज स्क्रीन पर मौजूद विकल्पों को चुन सके और डिजिटल इंटरफेस के साथ संवाद कर सके।

यह उपलब्धि भविष्य की उन तकनीकों का संकेत है जिनमें कीबोर्ड और माउस की आवश्यकता कम हो सकती है।

बोलने में असमर्थ लोगों के लिए नई उम्मीद

BCI तकनीक का एक और महत्वपूर्ण उपयोग उन लोगों के लिए हो सकता है जो बोल नहीं सकते।

कुछ न्यूरोलॉजिकल बीमारियां व्यक्ति की बोलने की क्षमता छीन लेती हैं, जबकि उनका मस्तिष्क सामान्य रूप से सोचता रहता है।

AI और BCI के संयोजन से ऐसे संकेतों को भाषा में बदलने का प्रयास किया जा रहा है।

यदि यह तकनीक सफल होती है, तो मरीज केवल सोचकर संवाद कर सकेंगे।

क्या भविष्य में विचार पढ़ना संभव होगा?

ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस तकनीक को लेकर अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या भविष्य में मशीनें लोगों के विचार पढ़ सकेंगी।

विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान तकनीक अभी केवल सीमित प्रकार के मस्तिष्क संकेतों को समझ पाती है।

यह तकनीक मुख्य रूप से उन संकेतों को पढ़ती है जो किसी विशेष गतिविधि से जुड़े होते हैं, जैसे हाथ हिलाने की इच्छा या किसी वस्तु को पकड़ने का प्रयास।

फिलहाल यह मानव मस्तिष्क के जटिल विचारों को पूरी तरह पढ़ने में सक्षम नहीं है।

सुरक्षा और नैतिक चुनौतियां

हर नई तकनीक की तरह BCI तकनीक के साथ भी कई चुनौतियां जुड़ी हुई हैं।

प्रमुख चिंताएं

  • मस्तिष्क डेटा की गोपनीयता
  • साइबर सुरक्षा जोखिम
  • डेटा दुरुपयोग की आशंका
  • तकनीक तक समान पहुंच
  • नैतिक और कानूनी प्रश्न

विशेषज्ञों का कहना है कि इन तकनीकों के विकास के साथ-साथ मजबूत नियम और सुरक्षा ढांचा भी आवश्यक होगा।

Neuralink और NEO के बीच प्रतिस्पर्धा

एलन मस्क की Neuralink और चीन की NEO दोनों ही BCI क्षेत्र में महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन चुकी हैं।

हालांकि दोनों की तकनीकी रणनीतियां अलग हैं।

Neuralink अधिक उन्नत इम्प्लांटेबल इलेक्ट्रोड सिस्टम पर काम कर रही है, जबकि NEO ने अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले समाधान को अपनाया है।

यह प्रतिस्पर्धा भविष्य में तकनीकी नवाचार को और तेज कर सकती है।

वैश्विक बाजार में BCI का भविष्य

विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस उद्योग का बाजार कई अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

स्वास्थ्य सेवा, पुनर्वास, संचार, गेमिंग, शिक्षा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में इसके उपयोग की संभावनाएं देखी जा रही हैं।

कई देशों में सरकारें और निजी कंपनियां इस क्षेत्र में बड़े निवेश कर रही हैं।

निष्कर्ष

चीन की NEO ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस तकनीक चिकित्सा विज्ञान और न्यूरोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह तकनीक विशेष रूप से लकवाग्रस्त मरीजों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है, जो लंबे समय से अपनी स्वतंत्रता वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं। कम आक्रामक डिजाइन, व्यावसायिक मंजूरी और AI के साथ संभावित एकीकरण इसे भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य तकनीकों में शामिल करता है। आने वाले वर्षों में यह तकनीक न केवल मरीजों के जीवन को बदल सकती है, बल्कि मानव और मशीन के बीच संवाद के तरीके को भी पूरी तरह नया स्वरूप दे सकती है।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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