Chhindwara में लोकायुक्त की बड़ी ‘टी-ट्रैप’ कार्रवाई: 14,000 की रिश्वत लेते पीएचई कर्मचारी गिरफ्तार, बाबू भी आरोपी
Chhindwara जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त संगठन ने एक बार फिर बड़ी और सफल कार्रवाई को अंजाम दिया है। जबलपुर लोकायुक्त टीम ने खजरी रोड स्थित एक चाय की दुकान पर ट्रैप ऑपरेशन करते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के एक कर्मचारी को 14,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई ने पूरे विभाग में हड़कंप मचा दिया है।
इस मामले में विभाग के एक सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी (बाबू) को भी सह-आरोपी बनाया गया है, क्योंकि रिश्वत की पूरी योजना उसी के निर्देश पर संचालित की जा रही थी।
ठेकेदार से रिश्वत की मांग कैसे शुरू हुई?
पूरा मामला अम्बाडा निवासी ठेकेदार सौरभ मिश्रा से जुड़ा है, जिन्होंने पीएचई विभाग में निर्माण कार्य का ठेका लिया था। कार्य के दौरान उन्होंने लगभग 30 प्रतिशत काम पूरा किया, जिसके बाद उनके बैंक खाते में 4,11,665 रुपये की राशि जारी की गई।
राशि जारी होने के बाद ही विभागीय स्तर पर दबाव और रिश्वत की मांग शुरू हो गई।
ठेकेदार का आरोप है कि भुगतान जारी करने के एवज में उससे अवैध रूप से कमीशन मांगा गया।
6 प्रतिशत कमीशन की डिमांड
लोकायुक्त जांच में सामने आया कि पीएचई विभाग में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी संदेश गजभिये और पंप अटेंडेंट दर्पण मिश्रा ने मिलकर ठेकेदार से कुल भुगतान का 6 प्रतिशत कमीशन मांगा था।
यह राशि लगभग 25,000 रुपये बनती थी।
आरोप है कि दोनों ने मिलकर ठेकेदार पर लगातार दबाव बनाया और भुगतान रोकने की धमकी भी दी गई।
लोकायुक्त में की गई शिकायत
लगातार दबाव और अवैध मांग से परेशान होकर ठेकेदार सौरभ मिश्रा ने मामले की शिकायत जबलपुर लोकायुक्त इकाई से की।
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने मामले का प्राथमिक सत्यापन शुरू किया। सत्यापन के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि रिश्वत की मांग वास्तविक है और एक सुनियोजित तरीके से की जा रही है।
इसके बाद लोकायुक्त ने ट्रैप ऑपरेशन की योजना तैयार की।
सत्यापन के दौरान तय हुई पहली किश्त
लोकायुक्त जांच में यह सामने आया कि बातचीत के दौरान यह तय हुआ कि रिश्वत की पहली किश्त के रूप में 14,000 रुपये दिए जाएंगे।
इस डील को आगे बढ़ाने के लिए संदेश गजभिये ने ठेकेदार को सीधे पंप अटेंडेंट दर्पण मिश्रा से संपर्क करने के लिए कहा।
इससे यह स्पष्ट हो गया कि पूरा मामला एक संगठित तरीके से चल रहा था।
चाय की दुकान पर बिछाया गया जाल
लोकायुक्त टीम ने योजना बनाकर मंगलवार को खजरी रोड स्थित एक चाय की दुकान को ट्रैप का स्थान चुना।
यह स्थान इसलिए चुना गया ताकि आरोपी किसी तरह की शंका न कर सकें और लेनदेन आसानी से हो सके।
लोकायुक्त टीम पहले से ही आसपास छिपकर तैनात थी और हर गतिविधि पर नजर रख रही थी।
रिश्वत लेते ही रंगे हाथ गिरफ्तारी
जैसे ही तय योजना के अनुसार ठेकेदार सौरभ मिश्रा ने पंप अटेंडेंट दर्पण मिश्रा को 14,000 रुपये सौंपे, लोकायुक्त टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे मौके पर ही पकड़ लिया।
पूरे लेनदेन को वीडियो और अन्य तकनीकी माध्यमों से रिकॉर्ड किया गया, ताकि सबूत मजबूत रहें।
गिरफ्तारी के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोग भी इस कार्रवाई को देखकर हैरान रह गए।
मुख्य आरोपी का कनेक्शन भी उजागर
लोकायुक्त की जांच में यह भी सामने आया कि यह पूरा रिश्वत लेनदेन अकेले दर्पण मिश्रा का नहीं था।
पूरी योजना सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी संदेश गजभिये के निर्देश पर चल रही थी।
इसी आधार पर लोकायुक्त ने उसे भी सह-आरोपी बनाया है।
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि वह इस पूरे भ्रष्टाचार नेटवर्क का मुख्य संचालक था।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधित 2018) के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
इनमें शामिल हैं:
- धारा 7
- धारा 12
- धारा 13(1)(बी)
- धारा 13(2)
इन धाराओं के तहत दोष सिद्ध होने पर कठोर सजा का प्रावधान है।
लोकायुक्त की सख्त कार्रवाई से मचा हड़कंप
इस कार्रवाई के बाद पूरे पीएचई विभाग में हड़कंप मच गया है। कई अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों में भी जांच को लेकर चिंता बढ़ गई है।
लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश है और आगे भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।
शिकायतकर्ता को मिली राहत
लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद ठेकेदार सौरभ मिश्रा को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि बिना लोकायुक्त के हस्तक्षेप के उन्हें न्याय मिलना मुश्किल था।
उन्होंने बताया कि लगातार दबाव और डर के कारण वह परेशान थे, लेकिन सही समय पर शिकायत करने से भ्रष्टाचार का खुलासा हो गया।
लोकायुक्त की टीम की भूमिका
जबलपुर लोकायुक्त टीम ने इस पूरे ऑपरेशन को बेहद योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया।
टीम ने पहले शिकायत का सत्यापन किया, फिर गोपनीय तरीके से ट्रैप तैयार किया और आखिर में सफलतापूर्वक आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ा।
इस ऑपरेशन को एक ‘टी-ट्रैप’ कार्रवाई के रूप में अंजाम दिया गया, जिसमें चाय की दुकान को स्थान बनाया गया।
भ्रष्टाचार पर बड़ा संदेश
इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित किया है कि सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार पर अब कड़ी नजर रखी जा रही है।
लोकायुक्त की यह कार्रवाई अन्य विभागों के लिए भी एक चेतावनी है कि रिश्वतखोरी किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निष्कर्ष
छिंदवाड़ा में हुई यह लोकायुक्त कार्रवाई न केवल एक भ्रष्टाचार के मामले का खुलासा है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सिस्टम में मौजूद अनियमितताओं पर अब सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
14,000 रुपये की रिश्वत लेते कर्मचारी की गिरफ्तारी और बाबू को सह-आरोपी बनाए जाने से यह संदेश साफ है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
यह कार्रवाई आने वाले समय में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत उदाहरण के रूप में देखी जाएगी और सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता को बढ़ावा देगी।
