Chhattisgarh में अवैध रेत कारोबार का बड़ा खुलासा: बिलासपुर में 22 वाहन जब्त, रेत की कीमत 15000 से बढ़कर 19000 तक पहुंची
Chhattisgarh के बिलासपुर में अवैध रेत कारोबार का बड़ा नेटवर्क सामने आया है। यह पूरा मामला अब एक संगठित रेत माफिया सिस्टम की तरह काम करता नजर आ रहा है, जिसमें पड़ोसी जिलों से अवैध उत्खनन कर रेत की सप्लाई की जा रही है। इस अवैध कारोबार का सबसे ज्यादा असर आम जनता और निर्माण कार्यों पर पड़ रहा है, क्योंकि रेत की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है।
जांजगीर-चांपा से हो रहा अवैध उत्खनन
जानकारी के अनुसार, जांजगीर-चांपा जिला क्षेत्र से बड़े पैमाने पर अवैध रेत निकाली जा रही है और उसे बिलासपुर तक पहुंचाया जा रहा है। यह पूरा नेटवर्क रात के अंधेरे में सक्रिय रहता है, जिससे प्रशासन की निगरानी पर भी सवाल उठने लगे हैं।
हसदेव नदी क्षेत्र में बिना किसी अधिकृत खदान के अवैध उत्खनन किए जाने के वीडियो भी सामने आए हैं, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि नदी के भीतर ट्रकों और मशीनों की लंबी कतारें लगी हुई हैं और खुलेआम रेत निकाली जा रही है।
रात के समय सक्रिय होता है रेत माफिया नेटवर्क
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, रेत से भरे भारी वाहन शाम होते ही अकलतरा नेशनल हाईवे के आसपास इकट्ठा हो जाते हैं। जैसे ही शहर में नो-एंट्री का समय समाप्त होता है, ये वाहन एक साथ शहर में प्रवेश करते हैं और पूरी रात सड़कों पर दौड़ते रहते हैं।
इस पूरी प्रक्रिया में संगठित तरीके से काम किया जाता है, जिससे अवैध रेत की सप्लाई लगातार जारी रहती है और प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद कारोबार पर रोक लगाना मुश्किल हो रहा है।
हसदेव नदी में बिना अनुमति उत्खनन
जांजगीर क्षेत्र के पीथमपुर पुल के पास स्थित हसदेव नदी में अवैध उत्खनन का वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि नदी में हाईवा वाहनों की कतार लगी हुई है और बिना किसी वैध अनुमति के रेत निकाली जा रही है।
सबसे गंभीर बात यह है कि इस स्थान पर किसी भी प्रकार की आधिकारिक रेत खदान आवंटित नहीं की गई है, फिर भी यहां बड़े स्तर पर उत्खनन जारी है।
अरपा नदी की गुणवत्ता में गिरावट
विशेषज्ञों के अनुसार, बिलासपुर की अरपा नदी और आसपास की नदियों में अब उच्च गुणवत्ता वाली रेत लगभग समाप्त हो चुकी है। इसी कारण माफिया अब अन्य जिलों की नदियों का रुख कर रहे हैं और वहां से रेत निकालकर सप्लाई कर रहे हैं।
इस स्थिति ने स्थानीय स्तर पर रेत की उपलब्धता को प्रभावित किया है और निर्माण कार्यों में बाधा उत्पन्न की है।
खनिज विभाग की बड़ी कार्रवाई, 22 वाहन जब्त
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए खनिज विभाग ने अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ विशेष अभियान चलाया। तीन दिनों तक चले इस अभियान में कुल 22 वाहन जब्त किए गए।
कार्रवाई के तहत:
- अरपा नदी क्षेत्र से 10 ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त किए गए
- धुमा-मानिकपुर क्षेत्र से 1 पोकलेन मशीन और 4 हाईवा वाहन पकड़े गए
- लावर क्षेत्र में 1 हाईवा वाहन जब्त किया गया
- राजपुर-केकती क्षेत्र में 1 जेसीबी और 4 ट्रैक्टर जब्त किए गए
- बुतेना क्षेत्र में अवैध मुरुम उत्खनन के दौरान 1 जेसीबी मशीन भी कब्जे में ली गई
सभी जब्त वाहनों को बेलगहना पुलिस चौकी और लावर खनिज जांच चौकी में रखा गया है।
रेत की कीमतों में भारी बढ़ोतरी
रेत की सप्लाई बाधित होने और परिवहन लागत बढ़ने के कारण कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है। पहले जहां एक हाईवा रेत की कीमत लगभग 15,000 रुपये थी, अब वही बढ़कर 19,000 रुपये तक पहुंच गई है।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि अब उन्हें दूर-दराज के जिलों से रेत मंगानी पड़ रही है, जिससे परिवहन खर्च बढ़ गया है और सीधा असर कीमतों पर पड़ रहा है।
निर्माण कार्यों पर गहरा असर
रेत महंगी होने के कारण निर्माण कार्यों की लागत में भी भारी वृद्धि हो गई है। कई जगहों पर मकान निर्माण और अन्य निर्माण कार्य धीमे पड़ने लगे हैं।
आम लोगों के लिए घर बनाना पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो गया है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ गया है। छोटे और मध्यम वर्ग के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
अवैध रेत कारोबार को रोकना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। लगातार कार्रवाई के बावजूद रेत माफिया सक्रिय है और संगठित तरीके से अपना नेटवर्क चला रहा है।
निष्कर्ष
Chhattisgarh बिलासपुर में अवैध रेत कारोबार ने न केवल पर्यावरण को प्रभावित किया है, बल्कि आम जनता की जेब पर भी सीधा असर डाला है। 22 वाहनों की जब्ती के बावजूद रेत की कीमतों में बढ़ोतरी और अवैध खनन जारी रहना चिंता का विषय है। यदि इस पर सख्त नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
