छतरपुर में महाराजा कॉलेज के छात्रों का चक्का जाम, डबल बस किराया वसूली का आरोप
कलेक्ट्रेट के बाहर छात्रों का जोरदार प्रदर्शन, बसों में ओवरलोडिंग और छात्र किराया नहीं देने का भी आरोप
छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर से जुड़े छात्रों ने शनिवार को बस किराए और परिवहन व्यवस्था को लेकर कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। छात्रों ने सड़क पर चक्का जाम कर अपनी नाराजगी जताई। प्रदर्शन के दौरान मौके पर सिटी कोतवाली का पुलिस बल भी तैनात रहा।
छात्रों का आरोप है कि बस संचालकों द्वारा मनमाने तरीके से किराया बढ़ाया जा रहा है। छात्रों के मुताबिक, पहले बड़ा मलहरा से छतरपुर तक एक तरफ का किराया 50 रुपये था, जो अब बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया है। इस तरह छात्रों को रोजाना आने-जाने में करीब 200 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
बस किराया दोगुना करने का आरोप
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने बताया कि बस किराए में अचानक बढ़ोतरी से सबसे ज्यादा परेशानी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों को हो रही है। छात्रों के अनुसार, बड़ी संख्या में विद्यार्थी मजदूर और किसान परिवारों से हैं और उनके लिए रोजाना 200 रुपये तक बस किराए के रूप में खर्च करना मुश्किल है।
छात्रों ने प्रशासन से मांग की कि बस संचालकों द्वारा वसूले जा रहे किराए की जांच की जाए और निर्धारित किराए के अनुसार ही यात्रियों से राशि ली जाए।
छात्राओं ने उठाया आधे किराए का मुद्दा
प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश सरकार के नियमों के अनुसार विद्यार्थियों को बस किराए में रियायत मिलनी चाहिए, लेकिन कई बस संचालक छात्रों से पूरा किराया वसूल रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि यदि उन्हें निर्धारित छात्र किराया सुविधा नहीं मिलती है, तो रोज कॉलेज आने-जाने का खर्च उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालता है। उन्होंने जिला प्रशासन और परिवहन विभाग से इस मामले की जांच कराने की मांग की है।
बसों में ओवरलोडिंग का भी आरोप
छात्रों ने बसों की क्षमता और सुरक्षा को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि कई बसों में क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाया जाता है। छात्रों के मुताबिक, कुछ बसों में 60 से 70 तक यात्रियों को ठूंसकर ले जाने की स्थिति बन जाती है और कई बार यात्रियों को बैठने के लिए पर्याप्त सीट तक नहीं मिलती।
छात्रों ने आरोप लगाया कि इस तरह की ओवरलोडिंग से उनकी जान को खतरा बना रहता है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से बसों की फिटनेस, क्षमता और ओवरलोडिंग की जांच कराने की मांग की।
हादसे का हवाला देकर जताई चिंता
प्रदर्शनकारी छात्रों ने कुछ दिन पहले निगाहें क्षेत्र की एक बस के पलटने की घटना का भी उल्लेख किया। छात्रों का कहना है कि बसों में क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने और सुरक्षा मानकों की अनदेखी से गंभीर हादसे की आशंका बनी रहती है।
छात्रों ने मांग की कि परिवहन विभाग नियमित रूप से बसों की जांच करे और नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
हर महीने हजारों रुपये खर्च होने का दावा
छात्रों ने कहा कि सरकार की ओर से कॉलेज में प्रवेश को लेकर राहत दी जा रही है, लेकिन परिवहन का खर्च विद्यार्थियों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। छात्रों के अनुसार, रोजाना 200 रुपये तक आने-जाने में खर्च होने पर महीने का परिवहन खर्च करीब 6 हजार रुपये तक पहुंच सकता है।
उनका कहना है कि इतनी बड़ी राशि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए वहन करना आसान नहीं है। इसी वजह से छात्रों ने बस किराए को नियंत्रित करने और छात्र रियायत लागू कराने की मांग उठाई है।
जिला प्रशासन से कार्रवाई की मांग
छात्रों ने जिला प्रशासन और परिवहन विभाग से पूरे मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में निर्धारित बस किराया लागू कराना, विद्यार्थियों को मिलने वाली किराया रियायत सुनिश्चित करना और बसों में ओवरलोडिंग पर रोक लगाना शामिल है।
छात्रों का कहना है कि यदि बस संचालकों द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है तो प्रशासन को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और किफायती परिवहन सुविधा मिल सके।
पुलिस बल रहा तैनात
कलेक्ट्रेट के बाहर छात्रों के प्रदर्शन और चक्का जाम को देखते हुए सिटी कोतवाली का पुलिस बल मौके पर तैनात रहा। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रखा।
फिलहाल छात्रों की शिकायतों पर प्रशासन और परिवहन विभाग की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, यह देखने वाली बात होगी। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि बस किराए और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं का समाधान होने तक वे अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाते रहेंगे।
नोट: बस किराए, छात्र रियायत और ओवरलोडिंग से जुड़े आरोप प्रदर्शनकारी छात्रों के दावों पर आधारित हैं। संबंधित विभाग या बस संचालकों का पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
