—Advertisement—

,

चातुर्मास केवल साधु-संतों का नहीं, श्रावकों का भी होता है, धर्म-साधना और आत्मचिंतन से जीवन को सार्थक बनाएं: आचार्यश्री उदार सागर

Author Picture
Published On: 10 August 2026
चातुर्मास केवल साधु-संतों का नहीं, श्रावकों का भी होता है, धर्म-साधना और आत्मचिंतन से जीवन को सार्थक बनाएं: आचार्यश्री उदार सागर

—Advertisement—

*चातुर्मास साधु-संतों का ही नहीं, श्रावकों का भी होता है- आचार्यश्री उदार सागर*

मुरैना (मनोज जैन नायक) शहर के बड़े जैन मंदिर में ज्ञान रत्नाकर आचार्यश्री उदारसागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि चातुर्मास केवल साधु-संतों के नगर में रुकने का अवसर नहीं, बल्कि श्रावकों के लिए भी धर्माराधना, आत्मचिंतन और संयम के मार्ग पर आगे बढ़ने का स्वर्णिम अवसर है। साधु-संत वर्षा ऋतु के चार माह एक ही स्थान पर रहकर अपनी साधना, स्वाध्याय, ध्यान और धर्मोपदेश में निरंतर प्रवृत्त रहते हैं। वे चातुर्मास का संकल्प लेकर अपनी संयम साधना को और अधिक प्रभावी बनाते हैं। इसी प्रकार श्रावकों को भी इस पावन अवसर पर अपने जीवन में कुछ धार्मिक नियम और संकल्प धारण करने चाहिए।

चातुर्मास में श्रावकों का सबसे बड़ा कर्तव्य है कि वे साधु-संतों की संयम चर्या में सहभागी बनें और उनकी साधना में पूर्ण सहयोग प्रदान करें। प्रतिदिन मंदिर में जाकर साधु-संतों के दर्शन करें, उनके प्रवचन एवं उपदेशों का श्रवण करें और उनके द्वारा बताए गए मार्ग को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें। केवल प्रवचन सुनना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रवचन में प्राप्त ज्ञान को व्यवहार में उतारना ही चातुर्मास की वास्तविक सार्थकता है ।

इस अवसर पर चातुर्मास आयोजन समिति के सदस्यों और प्रमुख श्रावकों का दायित्व और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्हें साधु-संतों से निरंतर संपर्क बनाए रखना चाहिए और समय-समय पर विनयपूर्वक पूछते रहना चाहिए कि किसी प्रकार की आवश्यकता तो नहीं है। विशेषकर दिगम्बर साधु अपनी आवश्यकताओं को लेकर श्रावकों के पास नहीं आते। वे अपनी संयम मर्यादा में रहते हुए किसी से अपनी आवश्यकता नहीं कहते। इसलिए श्रावकों को स्वयं जागरूक होकर उनकी आवश्यकताओं को समझना और उनकी साधना में सहयोग करना चाहिए।

साधु-संतों की आहारचर्या, स्वाध्याय, अध्ययन, ध्यान, स्वास्थ्य, प्रवचन तथा अन्य धार्मिक साधनाओं में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो, इसकी समुचित व्यवस्था करना श्रावकों का सौभाग्य और कर्तव्य दोनों है। साधु की साधना में सहयोग देना वस्तुतः अपने जीवन में धर्म की साधना को मजबूत करना है।

*श्रावकों के जीवन में परिवर्तन लाना ही मुख्य उद्देश्य*

मुनिश्री उपशांत सागर महाराज ने धर्मसभा में कहा कि केवल चार महीने साधु-संतों के नगर में विराजमान रहने से चातुर्मास सफल नहीं हो जाता। चातुर्मास की सार्थकता तब है, जब नगर के श्रावक अपने जीवन में परिवर्तन लाएं। परिवार के साथ धर्मसभा में आएं, बच्चों और युवाओं को संतों के सानिध्य से जोड़ें तथा नियमित रूप से स्वाध्याय और धर्मचर्चा करें।

उन्होंने कहा कि संतों की सेवा का अर्थ केवल उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति करना नहीं है, बल्कि उनकी बताई हुई बातों को अपने जीवन में उतारना भी सच्ची सेवा है। यदि संत प्रतिदिन प्रवचन कर रहे हैं और श्रावक सुनकर भी अपने जीवन में कोई परिवर्तन नहीं ला रहा है, तो चातुर्मास का वास्तविक लाभ नहीं मिल पाएगा।

मुनिश्री ने श्रावकों से आह्वान करते हुए कहा कि इस चातुर्मास में केवल संतों के नगर में रहने का आनंद न लें, बल्कि अपने जीवन को धर्ममय बनाने का संकल्प लें। साधु-संत चातुर्मास में नगर को अपना सानिध्य देते हैं और श्रावक अपनी श्रद्धा, सेवा एवं साधना से उस चातुर्मास को सार्थक बनाते हैं।

*मंगलाचरण से हुआ धर्मसभा का शुभारंभ*

धर्मसभा का शुभारंभ श्रद्धा और भक्ति से परिपूर्ण वातावरण में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत श्रीमती गुंजन जैन द्वारा प्रस्तुत सुमधुर मंगलाचरण से हुई। उनके मंगलाचरण ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया और उपस्थित श्रद्धालुओं ने श्रद्धा एवं एकाग्रता के साथ धार्मिक भावों का अनुभव किया।

इसके पश्चात समाज के श्रेष्ठीजन एवं गणमान्य अतिथियों द्वारा पूज्य आराध्य के चित्र का अनावरण किया गया। विधि-विधान एवं श्रद्धाभाव के साथ दीप प्रज्वलित कर धर्मसभा के औपचारिक शुभारंभ की घोषणा की गई। दीप प्रज्वलन के दौरान उपस्थित समाजजनों ने धार्मिक भावना के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की।

धर्मसभा का संचालन विद्वान नवनीत जैन शास्त्री ने प्रभावशाली एवं सुव्यवस्थित ढंग से किया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को धर्मसभा के उद्देश्य और धार्मिक आयोजनों के महत्व से अवगत कराया। उनके संचालन ने पूरे कार्यक्रम को गरिमामय स्वरूप प्रदान किया।

धर्मसभा में बड़ी संख्या में समाजजन, श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने धार्मिक वातावरण में सहभागिता करते हुए आयोजन को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp