महाभारतकालीन रहस्यों वाले आशापुरी धाम में गूंजे माता के जयकारे, पत्रकारों ने पहली बार की महाआरती
मंडलेश्वर। विंध्याचल पर्वत श्रृंखला की तलहटी में स्थित ग्राम आशापुर के प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां आशापुरी धाम में शारदीय नवरात्रि के दौरान भक्ति और उल्लास का माहौल है। सोमवार रात 8 बजे मंदिर परिसर में भव्य महाआरती हुई। इसमें हजारों श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर धर्मलाभ लिया। इस अवसर पर पहली बार मंडलेश्वर पत्रकार संघ के सदस्यों को मुख्य यजमान के रूप में महाआरती करने का अवसर मिला।
मां आशापुरी ट्रस्ट की ओर से मिले इस सौभाग्य के तहत पत्रकार संघ के अध्यक्ष राजेश पंवार, वरिष्ठ पत्रकार एवं कार्यकारी अध्यक्ष रामेश्वर कर्मा, सचिव निलेश जैन, उपाध्यक्ष अक्षय सिंह कुशवाह सहित संघ के अन्य पत्रकार परिवार के साथ अनुष्ठान में शामिल हुए। पंडित विशाल शर्मा के आचार्यत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महाआरती संपन्न हुई। इस दौरान आतिशबाजी और माता के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा।
एडिशनल एसपी ने सुरक्षा व्यवस्था देखी
श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी सुरक्षा व्यवस्था में मुस्तैद रहा। खरगोन की एडिशनल एसपी शकुंतला रूहल ने आशापुर धाम पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष और समिति के पदाधिकारियों से सुरक्षा प्रबंधों, श्रद्धालुओं की संख्या और भीड़ नियंत्रण को लेकर चर्चा की। पुलिस बल को व्यवस्थाएं सतर्कता से संभालने के निर्देश भी दिए।
मंदिर ट्रस्ट की ओर से पत्रकार संघ अध्यक्ष राजेश पंवार ने एडिशनल एसपी शकुंतला रूहल और पुलिस बल का अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत-सम्मान किया। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस की सक्रियता के लिए बधाई दी। इस दौरान रूहल ने पत्रकार संघ के पदाधिकारियों से बातचीत कर मंदिर के पौराणिक इतिहास और उससे जुड़ी मान्यताओं के बारे में जानकारी ली।
निरीक्षण और व्यवस्था के दौरान महेश्वर थाना प्रभारी जगदीश गोयल, मंडलेश्वर डिवीजन आरआई मुकेश लाल हायरी, काकड़दा पुलिस चौकी प्रभारी सुनील जामले सहित पुलिस बल तैनात रहा।
गरबा प्रस्तुति ने बांधा समां
महाआरती के बाद सांस्कृतिक मंच पर घाटाबिल्लोद के परवीन सिंह चौहान द्वारा आयोजित सांवरिया सेठ गरबा मंडल ने प्रस्तुति दी। कलाकारों ने देर रात 12 बजे तक गरबा नृत्य किया। श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम का आनंद लिया और कलाकारों की प्रस्तुति पर उत्साह जताया। नवरात्रि के दौरान मंदिर समिति प्रतिदिन सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक खिचड़ी प्रसादी का वितरण भी कर रही है।
अर्जुन की तपस्या से जुड़ी है मान्यता
महेश्वर नगर से करीब 13 किलोमीटर उत्तर और इंदौर हाईवे से लगभग 9 किलोमीटर दूर आशापुर गांव विंध्याचल पर्वत की गोद में बसा है। स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, महाभारत काल में पांडव अर्जुन ने यहां कठोर तपस्या की थी। मान्यता है कि उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां आशापुरी स्वयंभू रूप में प्रकट हुई थीं। द्वापर काल में वीर आल्हा और उदल द्वारा भी यहां तप कर आशीर्वाद लेने की कथाएं प्रचलित हैं।
यह धाम मांडव के वीर आल्हा-ऊदल और ओंकारेश्वर के राजा मांधाता के वंशजों की आराध्य देवी से जुड़ा बताया जाता है। मान्यता के अनुसार, मां आशापुरी 28 गोत्रों की कुलदेवी हैं। इंदौर संभाग के अलावा राजस्थान और महाराष्ट्र से भी श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मंदिर के गर्भगृह में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के रूप में त्रिदेवी विराजित हैं। उनके साथ भगवान गणेश, नवग्रह और सप्तमातृकाओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं। मंदिर के दोनों ओर भगवान शिव और भैरव बाबा की प्रतिमाएं भी हैं।
प्राचीन शिलालेख और बावड़ियां भी आकर्षण
मंदिर परिसर में एक प्राचीन शिलालेख मौजूद है। बताया जाता है कि इसकी लिपि को पढ़ने के लिए भोपाल से पुरातत्व विभाग की टीम आई थी, लेकिन वह भी इसे पढ़ नहीं सकी। मंदिर के आसपास चार प्राचीन बावड़ियां हैं। इनमें से एक बावड़ी से मांडू तक गुप्त गुफा मार्ग होने की बात स्थानीय मान्यताओं में कही जाती है।
इतिहास के अनुसार, पहले माता का मंदिर गुफानुमा और पत्थरों से निर्मित था। करीब 800 वर्ष पहले इसका पहला जीर्णोद्धार हुआ। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए वर्ष 2012 में संत मोनी बाबा के सानिध्य में मंदिर का दूसरा भव्य जीर्णोद्धार कराया गया। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि मां आशापुरी के दरबार में सच्चे मन से आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
