किसी देश की असली तस्वीर कहां दिखती है
डॉ जयेन्द्र जैन’निप्पू चन्देरी’ विशेष संवाददाता भ्रमणभाष 9407222244
किसी देश की असली तस्वीर उसके चमकते शहरों से नहीं, बल्कि उस युवक की आंखों से दिखाई देती है जो रोजगार की तलाश में घर छोड़ने के बजाय अपने गांव में ही कुछ करने का सपना देखता है। उस छोटे दुकानदार से दिखाई देती है जो अपने कारोबार को बढ़ाना चाहता है, उस महिला से जो अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती है, और उस किसान से जो खेत के साथ अपनी छत पर भी ऊर्जा पैदा करने की संभावना देखता है। पिछले वर्षों में भारत की आर्थिक नीतियों में आत्मनिर्भरता, उद्यमिता, कौशल, डिजिटल तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा को विशेष स्थान मिला है।
आत्मनिर्भर भारत — निर्भरता से क्षमता की ओर
आत्मनिर्भर भारत अभियान का मूल विचार घरेलू उत्पादन, स्थानीय उद्योग, आपूर्ति-श्रृंखला और भारतीय क्षमताओं को मजबूत करना है। इसका अर्थ दुनिया से अलग होना नहीं, बल्कि भारत की उत्पादन क्षमता को इतना मजबूत करना है कि देश अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ वैश्विक बाजार में भी प्रतिस्पर्धा कर सके। कभी जिस युवक के लिए नौकरी ही सफलता का पर्याय थी, उसके सामने अब उद्यमिता का रास्ता भी खुला है।
स्टार्टअप इंडिया — नौकरी देने वाले उद्यमियों का देश
स्टार्टअप इंडिया का उद्देश्य देश में नवाचार और उद्यमिता का मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है। इसके अंतर्गत पात्र स्टार्टअप को DPIIT मान्यता, बौद्धिक संपदा सुविधा, कुछ कर-संबंधी लाभ, आसान अनुपालन और अन्य सहायता उपलब्ध हो सकती है। इसका एक प्रमुख लक्ष्य भारत को केवल नौकरी खोजने वालों का नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने वाले उद्यमियों का देश बनाना है। एक कमरे में बैठा युवक कोई नया सॉफ्टवेयर बना सकता है, किसी छोटे कस्बे की लड़की अपना ऑनलाइन व्यवसाय शुरू कर सकती है, और किसी कारीगर का पारंपरिक हुनर डिजिटल बाजार तक पहुंच सकता है।
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना — हाथों को हुनर की ताकत
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) का उद्देश्य युवाओं को उद्योग और रोजगार की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है। डिग्री अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन बदलती अर्थव्यवस्था में कौशल का महत्व भी उतना ही बढ़ गया है। मशीन चलाने वाला प्रशिक्षित युवक, सौर तकनीशियन, इलेक्ट्रिशियन, डिजिटल सेवा प्रदाता, मोबाइल रिपेयर विशेषज्ञ या आधुनिक निर्माण क्षेत्र का कुशल कामगार—ये सभी विकसित अर्थव्यवस्था के वास्तविक निर्माता हैं।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना — छोटे सपनों को कारोबार का अवसर
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) का उद्देश्य सूक्ष्म एवं छोटे उद्यमों को संस्थागत ऋण की सुविधा उपलब्ध कराकर स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देना है। भारत की अर्थव्यवस्था केवल बड़े कारखानों से नहीं चलती—लाखों छोटी दुकानें, कुटीर उद्योग, सेवा व्यवसाय और सूक्ष्म उद्यम भी इसकी रीढ़ हैं।
प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना — छत बने ऊर्जा का साधन
प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना का लक्ष्य आवासीय क्षेत्र में रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देना है। आधिकारिक दिशानिर्देशों में एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर स्थापित करने और एक करोड़ परिवारों को प्रतिमाह 300 यूनिट तक मुफ्त या कम लागत वाली बिजली उपलब्ध कराने का उद्देश्य बताया गया है। कल तक घर की छत केवल धूप और बारिश से बचाने का साधन थी, आज वही छत बिजली पैदा करने का माध्यम बन सकती है।
मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया — उत्पादन से तकनीक तक
मेक इन इंडिया का उद्देश्य भारत में विनिर्माण और निवेश को बढ़ावा देना तथा देश को वैश्विक उत्पादन श्रृंखलाओं में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका के लिए तैयार करना रहा है, वहीं डिजिटल इंडिया ने सरकारी सेवाओं, डिजिटल भुगतान और तकनीकी पहुंच को व्यापक बनाने की दिशा में काम किया है।
योजनाओं की सफलता का असली पैमाना
किसी भी योजना की सफलता केवल उसके नाम से तय नहीं होती। उसका असली मूल्यांकन तब होगा जब प्रशिक्षण के बाद युवक को काम मिले, स्टार्टअप को बाजार मिले, छोटे उद्यमी को समय पर ऋण मिले, सौर योजना का लाभ पात्र परिवार तक पहुंचे और आत्मनिर्भरता का लाभ छोटे शहरों और गांवों तक दिखाई दे। नीति बनाना शुरुआत है; ईमानदार क्रियान्वयन, पारदर्शिता और अंतिम व्यक्ति तक पहुंच उसका असली परीक्षण है। भारत की शक्ति उसके आकार में ही नहीं, उसके करोड़ों लोगों की मेहनत, प्रतिभा और उद्यमशीलता में छिपी है।
