चाँदखेड़ी दिगंबर जैन मंदिर परिसर विवाद: निष्पक्ष जांच की मांग तेज, धार्मिक सौहार्द बनाए रखने की अपील | राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ, विश्व जैन संगठन और जैन राजनीतिक चेतना मंच की संयुक्त पहल
राजस्थान के सुप्रसिद्ध अतिशय क्षेत्र चाँदखेड़ी दिगंबर जैन मंदिर में हाल ही में घटी घटना को लेकर जैन समाज में व्यापक चिंता और असंतोष देखने को मिल रहा है। यह मंदिर परिसर लगभग 300 वर्ष पुराना है और देशभर से हजारों श्रद्धालु यहाँ प्रतिवर्ष दर्शन, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए आते हैं। मंदिर परिसर में धर्मशाला, भोजनशाला और यात्रियों की आवासीय व्यवस्था भी मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित की जाती है।
इसी प्राचीन और पवित्र जैन क्षेत्र में विगत दिनों कुछ मूर्तियों के स्थानांतरण को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। इस पूरे मामले पर राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ, विश्व जैन संगठन, और जैन राजनीतिक चेतना मंच भारत ने तथ्यात्मक जानकारी साझा करते हुए निष्पक्ष जांच की जोरदार मांग की है।
वर्षों से रखी अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों पर सहमति से निर्णय
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने स्पष्ट किया कि चाँदखेड़ी जैन मंदिर परिसर में लंबे समय से कुछ अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियाँ भी रखी हुई थीं। लेकिन इन मूर्तियों की न तो नियमित पूजा होती थी और न ही पर्याप्त देखरेख। इस मुद्दे पर ग्राम के कई प्रतिष्ठित नागरिकों और चाँदखेड़ी जैन मंदिर ट्रस्ट समिति के बीच आपसी चर्चा, सहमति और लिखित निवेदन के बाद यह निर्णय लिया गया कि:
- इन मूर्तियों को सम्मानपूर्वक अन्य स्थान पर स्थापित किया जाए,
- नया मंदिर बनाकर विधि-विधान से विराजमान किया जाए,
- ताकि सभी मूर्तियों की पूजा-अर्चना नियमित और सम्मानपूर्वक हो सके।
इस सहमति के अनुसार ग्रामवासियों ने प्रस्ताव दिया और चाँदखेड़ी मंदिर ट्रस्ट समिति ने 750 वर्गफुट (25×50) भूमि उपलब्ध कराने के साथ नए मंदिर निर्माण हेतु 21 लाख रुपये सहयोग राशि देने का भी निर्णय लिया।
सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ स्थानांतरण कार्य
राजेश जैन दद्दू और जैन राजनीतिक चेतना मंच के अध्यक्ष सुभाष काला ने बताया कि मूर्तियों का स्थानांतरण किसी विवाद या गुप्त कार्यवाही के तहत नहीं किया गया था, बल्कि:
- ग्रामवासियों की आपसी सहमति,
- पुजारी और गांव के प्रमुख लोगों की उपस्थिति में,
- पूर्ण सौहार्द और धार्मिक सम्मान के साथ यह प्रक्रिया संपन्न हुई।
लेकिन इसी दिन कुछ व्यक्तियों ने अचानक विरोध दर्ज कराया, जिसके चलते पुलिस की मौजूदगी में मूर्तियों को पुनः पुराने स्थान पर स्थापित कर दिया गया।
असामाजिक तत्वों द्वारा झूठी शिकायतों का आरोप
सुबोध काला और दद्दू ने आरोप लगाया कि:
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कुछ असामाजिक तत्वों ने,
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समाज में भ्रम फैलाने के उद्देश्य से,
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मंदिर समिति, पुजारी और ग्रामवासियों के विरुद्ध झूठी और मनगढ़ंत शिकायतें दर्ज करवाईं।
इन शिकायतों के कारण चाँदखेड़ी जैसे शांत धार्मिक क्षेत्र में अनावश्यक तनाव और असहज माहौल उत्पन्न हुआ, जो कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
स्पष्ट घोषणा: स्थानांतरण में ट्रस्ट समिति की कोई भूमिका नहीं
विश्व जैन संगठन के मयंक जैन ने महत्वपूर्ण तथ्य पेश करते हुए कहा कि:
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मूर्तियों का स्थानांतरण चाँदखेड़ी मंदिर ट्रस्ट समिति द्वारा नहीं किया गया था।
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समिति का इस कार्य से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कोई संबंध नहीं था।
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यह पूरा निर्णय और प्रक्रिया ग्रामवासियों की आपसी सहमति से की गई थी।
समिति का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना था कि सभी देवी-देवताओं की पूजा समान आदर और नियमित रूप से होती रहे।
निष्पक्ष जांच और झूठी FIR निरस्त करने की मांग
जैन राजनीतिक चेतना मंच और अन्य जैन संगठनों ने राजस्थान सरकार और प्रशासन को पत्र लिखकर निम्न मांगें की हैं:
1. उच्चस्तरीय और पूर्णतः निष्पक्ष जांच करवाई जाए
ताकि सत्य सामने आए और किसी भी निर्दोष व्यक्ति पर झूठा आरोप न लगे।
2. मंदिर ट्रस्ट समिति के विरुद्ध दर्ज झूठी शिकायतें और FIR निरस्त की जाएं
क्योंकि ये शिकायतें तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश जैसी प्रतीत होती हैं।
3. धार्मिक माहौल बिगाड़ने की किसी भी प्रयास पर प्रशासन सख्त कार्रवाई करे
गांव में कानून और शांति बनाए रखने के लिए उच्चस्तरीय निगरानी आवश्यक है।
4. शांति समिति की बैठक बुलाकर सभी पक्षों को भरोसा दिया जाए
धार्मिक एकता, सुरक्षा और सौहार्द के लिए प्रशासनिक निर्देश जारी किए जाएं।
महत्वपूर्ण प्रमाण और दस्तावेज
जैन संगठनों ने अपने दावों को प्रमाणित करने के लिए तीन प्रमुख दस्तावेजों का उल्लेख किया है:
1. शपथ पत्र दिनांक 05.11.2025
चाँदखेड़ी के प्रतिष्ठित नागरिक रामबाबू (हिंदू विश्व परिषद और गो रक्षक सेवादल पदाधिकारी) द्वारा दिया गया, जिसमें स्पष्ट लिखा है कि मूर्तियाँ स्थानांतरित करने का निर्णय ग्रामवासियों ने सहमति से लिया था, न कि ट्रस्ट समिति ने।
2. चाँदखेड़ी नागरिकों की प्रेस कॉन्फ्रेंस
प्रेसवार्ता में स्थानीय नागरिकों ने साफ कहा कि:
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मूर्ति हटाने में ट्रस्ट समिति या उसके अध्यक्ष का कोई हाथ नहीं है।
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यह केवल ग्रामवासियों का निर्णय और कार्य था।
3. सेशन न्यायाधीश झालावाड़ का आदेश (दिनांक 14.11.2025)
आदेश की कंडिका क्रमांक 6 में कहा गया है कि:
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आरोपी अध्यक्ष हुकम जैन काका पर चोरी का आरोप सिद्ध नहीं होता,
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सह-अभियुक्तों की सहमति भी सिद्ध नहीं होती।
इससे यह भी प्रमाणित होता है कि आरोप निराधार हैं।
जैन समाज से राजेश जैन दद्दू की अपील
राजेश जैन दद्दू ने पूरे भारत के जैन समाज से भावुक अपील करते हुए कहा:
“समाज जागे और अपनी धर्म संस्कृति एवं अपने आयतनों की सुरक्षा के लिए एक स्वर में खड़ा हो। आज चाँदखेड़ी में जो हुआ, वह किसी भी धार्मिक स्थल के साथ नहीं होना चाहिए। सत्य सामने आए और न्याय हो — यह समय की मांग है।”
निष्कर्ष
चाँदखेड़ी दिगंबर जैन मंदिर विवाद अब केवल एक स्थानीय विवाद नहीं बल्कि धार्मिक सौहार्द, आपसी विश्वास और प्रशासनिक निष्पक्षता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन गया है।
जैन संगठन, ट्रस्ट समिति और ग्रामवासी सभी एक स्वर में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके और मंदिर परिसर में शांति, सुरक्षा और धार्मिक एकता कायम रह सके।







