Ujjain के ग्राम गुराड़िया में फसल संगोष्ठी का भव्य आयोजन: किसानों को मिली वैज्ञानिक खेती,
1 जून 2026 को मध्य प्रदेश के Ujjain जिले के नागदा तहसील अंतर्गत ग्राम गुराड़िया में कृषि जागरूकता और किसानों के सशक्तिकरण को समर्पित एक महत्वपूर्ण फसल संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्व पर्यावरण दिवस अभियान के अंतर्गत चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड द्वारा संचालित “उत्तम संतुलित पोषण अभियान (USPA Project)” के तहत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि शिक्षा को बढ़ावा देना और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना था।
यह आयोजन ऐसे समय में किया गया है जब कृषि क्षेत्र में उत्पादन लागत, मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियाँ लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में किसानों को वैज्ञानिक खेती की ओर प्रेरित करना इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य रहा।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य
इस फसल संगोष्ठी का मूल उद्देश्य किसानों को खरीफ फसलों की वैज्ञानिक खेती, संतुलित पोषण प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों के महत्व के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी देना था।
विशेषज्ञों ने बताया कि आज के समय में केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। बदलते मौसम, मिट्टी की उर्वरता में गिरावट और बढ़ती लागत के बीच किसानों को ऐसे उपाय अपनाने होंगे जो उत्पादन को भी बढ़ाएँ और पर्यावरण को भी सुरक्षित रखें।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि यदि किसान संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करते हैं और मृदा परीक्षण के आधार पर खेती करते हैं, तो फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है।
चंबल फर्टिलाइजर्स की भूमिका और कृषि विकास में योगदान
कार्यक्रम के दौरान श्री अजय चौधरी (DM-M, उज्जैन) ने चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड की कंपनी प्रोफाइल पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि कंपनी लंबे समय से किसानों के हित में कार्य कर रही है और कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उन्होंने कहा कि कंपनी केवल उर्वरक उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को शिक्षा, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता भी प्रदान करती है, जिससे वे आधुनिक कृषि पद्धतियों को समझ सकें और उन्हें अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकें।
उन्होंने आगामी खरीफ सीजन के लिए उपलब्ध उत्पादों की जानकारी देते हुए किसानों को यह भी बताया कि सही समय पर सही मात्रा में पोषक तत्वों का उपयोग फसल की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करता है।
संतुलित पोषण और वैज्ञानिक खेती पर जोर
श्री चौधरी ने अपने संबोधन में विशेष रूप से संतुलित पोषण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि खेत की मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों का असंतुलन उत्पादन क्षमता को प्रभावित करता है।
उन्होंने किसानों को समझाया कि नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे प्रमुख पोषक तत्वों का सही अनुपात में उपयोग आवश्यक है। इसके साथ ही सूक्ष्म पोषक तत्वों की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसान मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरक का उपयोग करें, तो न केवल लागत कम होगी बल्कि उत्पादन में भी सुधार होगा।
चंबल उत्पादों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता
इस अवसर पर श्री आशीष कोठारी (चंबल डीलर) और श्री सचिन मकवाना (चंबल रिटेलर) ने किसानों को चंबल फर्टिलाइजर्स के उत्पादों की गुणवत्ता, शुद्धता और विश्वसनीयता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि कंपनी के सभी उत्पाद निर्धारित वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप तैयार किए जाते हैं और कृषि अनुसंधान के आधार पर उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित की जाती है।
उन्होंने किसानों को यह भी समझाया कि बाजार में उपलब्ध विभिन्न कृषि आदानों के बीच सही उत्पाद का चयन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। गलत या मिलावटी उत्पाद फसल को नुकसान पहुँचा सकते हैं, जबकि प्रमाणित उत्पाद उत्पादन बढ़ाने में मदद करते हैं।
उत्पादों की पहचान और सही उपयोग की जानकारी
कार्यक्रम में किसानों को यह भी बताया गया कि कृषि उत्पादों की असल पहचान कैसे की जाए। विशेषज्ञों ने बताया कि पैकेजिंग, लेबलिंग और प्रमाणन चिह्नों के आधार पर उत्पादों की गुणवत्ता को पहचाना जा सकता है।
इसके साथ ही यह भी समझाया गया कि अलग-अलग फसलों के लिए अलग-अलग पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है और सभी फसलों में एक ही प्रकार के उर्वरक का उपयोग करना उचित नहीं होता।
किसानों को यह भी सलाह दी गई कि वे कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही उत्पादों का उपयोग करें।
खरीफ फसलों के लिए तकनीकी मार्गदर्शन
संगोष्ठी के दौरान खरीफ फसलों जैसे सोयाबीन, मक्का, धान और दलहन फसलों में संतुलित पोषण प्रबंधन पर विशेष चर्चा की गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि खरीफ सीजन में नमी और वर्षा की अधिकता के कारण पोषक तत्वों का सही प्रबंधन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
किसानों को बताया गया कि फसल चक्र अपनाने और जैविक पदार्थों का उपयोग करने से मिट्टी की गुणवत्ता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है।
पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ खेती की आवश्यकता
कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों का उपयोग पर्यावरण और मिट्टी दोनों के लिए हानिकारक हो सकता है।
इसलिए किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता है, जिसमें जैविक खाद, फसल चक्र और जल संरक्षण तकनीकों का उपयोग शामिल है।
यह भी बताया गया कि पर्यावरण संरक्षण और कृषि उत्पादन को साथ लेकर चलना ही भविष्य की कृषि का आधार है।
किसानों की सक्रिय भागीदारी
इस संगोष्ठी में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और पूरे कार्यक्रम के दौरान उत्साहपूर्वक चर्चा में हिस्सा लिया।
किसानों ने अपने-अपने कृषि संबंधी प्रश्न विशेषज्ञों के सामने रखे, जिनका समाधान विस्तारपूर्वक किया गया। कई किसानों ने फसल उत्पादन में आ रही समस्याओं, मिट्टी की गुणवत्ता और कीट नियंत्रण से जुड़े सवाल पूछे।
विशेषज्ञों द्वारा दिए गए व्यावहारिक सुझावों को किसानों ने काफी उपयोगी बताया।
किसानों की प्रतिक्रिया और अनुभव
कार्यक्रम में शामिल किसानों ने इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों की सराहना की। उनका कहना था कि इस प्रकार की संगोष्ठियों से उन्हें नई तकनीकों को समझने और अपनाने में मदद मिलती है।
किसानों ने यह भी कहा कि पहले उन्हें उर्वरकों और पोषक तत्वों के सही उपयोग की पर्याप्त जानकारी नहीं थी, लेकिन ऐसे कार्यक्रमों से उनकी समझ बेहतर हो रही है।
भविष्य की दिशा और निष्कर्ष
कार्यक्रम के अंत में किसानों को आगामी खरीफ सीजन में वैज्ञानिक और संतुलित खेती अपनाने का संकल्प दिलाया गया। सभी उपस्थित किसानों ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने और बेहतर उत्पादन के लिए प्रयास करने की प्रतिबद्धता जताई।
इस प्रकार ग्राम गुराड़िया में आयोजित यह फसल संगोष्ठी केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि कृषि जागरूकता और ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
यह आयोजन यह संदेश देता है कि यदि किसानों को सही समय पर सही जानकारी और तकनीकी मार्गदर्शन मिले, तो वे न केवल अपनी आय बढ़ा सकते हैं बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
