युजवेंद्र चहल ने रेड बॉल क्रिकेट से लिया संन्यास, वनडे और टी20 में वापसी पर रहेगा ध्यान
49 फर्स्ट क्लास मैचों में लिए 148 विकेट, भारत के लिए टेस्ट खेलने का सपना अधूरा रहा
भारतीय लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल ने लाल गेंद यानी फर्स्ट क्लास क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की है। शुक्रवार, 2 अक्टूबर को सामने आए इस फैसले के साथ उनके लंबे प्रारूप के करियर का अंत हो गया। हालांकि चहल ने स्पष्ट किया है कि वह वनडे और टी20 क्रिकेट खेलना जारी रखेंगे। उनका लक्ष्य सीमित ओवरों के प्रारूप में अच्छा प्रदर्शन करके भारतीय टीम में दोबारा अवसर हासिल करना है।
चहल की घोषणा पूरे क्रिकेट करियर से संन्यास की नहीं है। उन्होंने केवल लाल गेंद के मुकाबलों को अलविदा कहा है। ऐसे में उन्हें आगे सफेद गेंद के क्रिकेट में खेलते देखा जा सकेगा। राष्ट्रीय टीम से दूर रहने के बावजूद उन्होंने देश के लिए फिर खेलने की इच्छा जताई है और वापसी के लिए प्रयास जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया है।
148 विकेट के साथ समाप्त हुआ फर्स्ट क्लास सफर
चहल ने वर्ष 2009 में हरियाणा की ओर से फर्स्ट क्लास क्रिकेट में पदार्पण किया था। करीब 17 वर्षों के इस सफर में उन्होंने घरेलू क्रिकेट के साथ इंग्लैंड की काउंटी प्रतियोगिता में भी हिस्सा लिया। अपने फर्स्ट क्लास करियर में उन्होंने 49 मुकाबलों में 148 विकेट हासिल किए। इस दौरान उनका गेंदबाजी औसत 32.27 रहा।
इन आंकड़ों को अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट का रिकॉर्ड नहीं समझना चाहिए। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में घरेलू और काउंटी के मान्यता प्राप्त लंबे प्रारूप वाले मुकाबले शामिल होते हैं। चहल की उपलब्धियाँ इसी श्रेणी से जुड़ी हैं। उनकी घोषणा का सही अर्थ यह है कि वह अब लंबे प्रारूप के इन मुकाबलों में नहीं खेलेंगे।
टेस्ट कैप हासिल करने की इच्छा रह गई अधूरी
चहल ने भारत के लिए वनडे और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला, लेकिन उन्हें टेस्ट टीम में पदार्पण का अवसर नहीं मिला। संन्यास की घोषणा के दौरान उन्होंने बताया कि टेस्ट कैप हासिल करना उनका लंबे समय से सपना था। यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी, फिर भी उन्होंने अपने सफर और मिले अवसरों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उनके फैसले के साथ टेस्ट क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व करने की संभावना वाला अध्याय भी समाप्त हो गया है। इसलिए इस खबर को “टेस्ट से संन्यास” कहने के बजाय “फर्स्ट क्लास क्रिकेट से संन्यास” कहना अधिक सटीक है। चहल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान मुख्य रूप से लेग स्पिन गेंदबाज के तौर पर रखते हैं।
लॉर्ड्स में खेला अंतिम मुकाबला
चहल ने अपना अंतिम फर्स्ट क्लास मैच इंग्लैंड के ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर नॉर्थम्प्टनशायर की ओर से खेला। काउंटी क्रिकेट उनके लाल गेंद के सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। अब इस प्रारूप से विदाई के बाद उनकी आगे की क्रिकेट यात्रा वनडे और टी20 मुकाबलों पर केंद्रित होगी।
देश के लिए खेलने की इच्छा बरकरार
चहल ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि उनके भीतर भारत के लिए खेलने की भूख अभी बाकी है। उन्होंने विश्वास जताया कि उनमें क्रिकेट बचा हुआ है और राष्ट्रीय टीम में एक और अवसर पाने के लिए पूरी मेहनत करेंगे। यह बयान बताता है कि लाल गेंद से विदाई के बावजूद उनकी प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेलने की इच्छा कायम है।
भारतीय टीम में वापसी के लिए प्रदर्शन और चयन प्रक्रिया महत्वपूर्ण होंगे। उनकी घोषणा में वापसी का संकल्प है, लेकिन किसी आगामी अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला में चयन की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इस फैसले को टीम इंडिया में वापसी सुनिश्चित होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
विश्व कप चयन को लेकर कोई घोषणा नहीं
वर्ष 2027 के वनडे विश्व कप से पहले चहल का यह फैसला सामने आया है। हालांकि उपलब्ध घोषणा में उन्होंने विश्व कप टीम में जगह मिलने या किसी विशेष टूर्नामेंट के लिए चयन का दावा नहीं किया है। उनका स्पष्ट संदेश सीमित ओवरों में खेलते रहने और भारत के लिए दोबारा अवसर हासिल करने का है। लाल गेंद का सफर समाप्त हुआ है, लेकिन उनका क्रिकेट करियर जारी रहेगा।
