दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार की सोशल मीडिया कंपनियों को एडवाइजरी, फर्जी पोस्ट और AI वीडियो पर सख्ती के निर्देश
नई दिल्ली। दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) के इस्तीफे की मांग से जुड़े घटनाक्रम के बीच केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भ्रामक और गैरकानूनी सामग्री पर तेजी से कार्रवाई करने की सलाह दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की एडवाइजरी में अधिकृत सरकारी एजेंसियों से मिलने वाली शिकायतों को प्राथमिकता देने और कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली ऑनलाइन सामग्री पर सतर्कता बरतने को कहा गया है।
सरकार की चिंता है कि विरोध प्रदर्शनों से संबंधित गलत जानकारी, भ्रामक तस्वीरें और एडिट किए गए वीडियो सोशल मीडिया के माध्यम से तेजी से प्रसारित हो सकते हैं। ऐसी सामग्री लोगों के बीच भ्रम पैदा करने, सार्वजनिक शांति भंग करने और तनाव बढ़ाने का कारण बन सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया कंपनियों को शिकायतों का समय पर निपटारा करने और लागू कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है।
फर्जी तस्वीरों और भ्रामक वीडियो पर नजर रखने के निर्देश
एडवाइजरी में ऐसी सामग्री को लेकर विशेष चिंता जताई गई है, जिसे वास्तविक घटनाओं से जोड़कर साझा किया जाता है, जबकि उसका संदर्भ गलत या भ्रामक हो सकता है। सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली पुरानी तस्वीरों, एडिट किए गए वीडियो और भ्रामक दावों से किसी घटना को लेकर गलत धारणा बन सकती है।
सरकार ने प्लेटफॉर्म्स से कहा है कि वे अधिकृत एजेंसियों की ओर से प्राप्त शिकायतों पर प्राथमिकता के आधार पर ध्यान दें। हालांकि, किसी भी सामग्री के संबंध में कार्रवाई लागू कानूनों और संबंधित नियमों के अनुरूप की जानी चाहिए।
AI से तैयार तस्वीरों और वीडियो पर लेबल लगाने की सलाह
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच कृत्रिम रूप से तैयार की गई तस्वीरों और वीडियो की पहचान भी महत्वपूर्ण हो गई है। एडवाइजरी में ऐसे कंटेंट पर स्पष्ट लेबल लगाने पर जोर दिया गया है, जिसे दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों या मौजूदा घटनाओं की वास्तविक रिकॉर्डिंग बताकर साझा किया जा रहा हो।
AI से तैयार वीडियो और तस्वीरें कई बार वास्तविक फुटेज जैसी दिखाई दे सकती हैं। यदि इन्हें बिना उचित जानकारी के साझा किया जाए, तो दर्शकों के लिए वास्तविकता और कृत्रिम सामग्री के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में लेबलिंग से उपयोगकर्ताओं को सामग्री की प्रकृति समझने में मदद मिल सकती है।
कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग पर जोर
केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को अधिकृत सरकारी एजेंसियों और कानून प्रवर्तन संस्थाओं के साथ सहयोग करने की सलाह दी है। जरूरत पड़ने पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने और शिकायतों पर निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्रवाई करने का निर्देश भी एडवाइजरी का हिस्सा बताया गया है।
इस संबंध में सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत लागू दायित्वों का पालन महत्वपूर्ण है। इन नियमों के अनुसार सोशल मीडिया मध्यस्थों को संबंधित कानूनी आवश्यकताओं और निर्धारित प्रक्रियाओं का ध्यान रखना होता है।
ऑनलाइन अफवाहों पर नियंत्रण की कोशिश
दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर साझा की जाने वाली सामग्री लोगों तक घटनाओं की जानकारी पहुंचाने में अहम भूमिका निभाती है। लेकिन गलत संदर्भ में प्रसारित तस्वीरें, भ्रामक दावे और AI से तैयार वीडियो स्थिति को लेकर भ्रम भी पैदा कर सकते हैं।
सरकार की एडवाइजरी का उद्देश्य ऑनलाइन सामग्री से जुड़े जोखिमों को कम करना, अधिकृत शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई को बढ़ावा देना और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग सुनिश्चित करना है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से अपेक्षा की गई है कि वे लागू नियमों के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करें और भ्रामक या गैरकानूनी सामग्री से संबंधित शिकायतों को गंभीरता से लें।
नोट: इस समाचार में एडवाइजरी से संबंधित उपलब्ध विवरणों के आधार पर जानकारी प्रस्तुत की गई है। निर्देशों के सटीक शब्दों और दायरे की पुष्टि के लिए मंत्रालय की आधिकारिक एडवाइजरी देखी जानी चाहिए।
